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चीन ने जमाया ग्वादर में डेरा

udaybhoomi 23/10/2017/span> Technology

कर्नल विपिन पाठक : नयी दिल्ली : अदन की खाड़ी में अफ्रीका के सींग कहे जाने वाले इलाके में अपना पहला मिलिटरी बेस बना लेने के बाद अब चीन की निगाह दूसरे फौजी ठिकाने के लिए पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह पर टिक गयी है. चीनी हुक्मरान अरब सागर में अपनी बंदरगाह सुविधाओं को बढ़ा कर बड़े पानी के जहाजों की आवाजाही को सुगम बनाने में जुट गया है. बीते सितम्बर के महीने में बड़ी तादाद में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के अफसरों और सैकड़ों चीनी कामगारों ने ग्वादर पहुँच कर अपना डेरा जमा लिया है. संकेत इस बात के भी मिले हैं की ग्वादर के पूरब में सैकड़ों किलोमीटर दूर अंतरिक्ष अनुसन्धान और कम्पुटर सेण्टर के लिए जाने जाने वाले कराची के पास सोन्मियानी खाड़ी क्षेत्र का दौरा चीनियों ने किया है. ये इस बात का इशारा है कि चीन नियंत्रण रेखा के इस इलाके में बंदरगाह सुविधाओं के लिए एकदम तैयार हो चुका है.
,   चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सत्ता पर दूसरी बार अपनी पकड़ मजबूत करने के बाद सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के दिग्गजों की बैठक में अपने पड़ोसियों को भरोसा दिलाया है कि वो उनके साथ विवाद के मसले बातचीत से सुलझाना चाहता है लेकिन अपने रणनीतिक हितों की कीमत पर नहीं. शी ने कहा कि वो सौहार्द्र, ईमानदारी, परस्पर फायदे, दोस्ती और साझेदारी की नीति के अधर पर पडोसी देशों के साथ अपने रिश्तों को परवान चढ़ाएंगे. इसके साथ ही वो चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी को एक विश्वस्तरीय ताकत बनाने में कोई कोर कसार बाकि नहीं रखेंगे.
,   अमेरिका में चीन के राजदूत कुई तियानकाई ने १७ अक्टूबर को कहा है कि अमेरिका –चीन रिश्तों को पॉवर शिफ्टिंग थ्योरी के चश्मे से देखना एक गलत धारणा होगी. कुई ने कहा कि शून्य राशि मानसिकता अब बासी और पुराणी हो चली है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों का ऐतिहासिक मिशन वैश्विक प्रभुत्व को एक से दूसरे को स्थानांतरित करना नहीं है. यह एक गलत द्रष्टिकोण है जो अगर कायम रहे तो विरोध बढेगा. कुई ने जोर देकर कहा कि चीन विरोध और झगडे के बजाय आपसी सम्मान और सहयोग की रौशनी में संबंधों को आगे बढाने का इच्छुक है.
,   उधर रिश्तों में लम्बे तनाव के बाद पारंपरिक मित्र देश उत्तर कोरिया ने चीन की कम्युनिष्ट पार्टी की १९ वीं कांग्रेस को सन्देश भेज कर शी जिनपिंग और वरिष्ठ नेताओं को बधाई भेजने में तनिक भी देर नहीं लगाई. पूरी दुनिया को अपने खौफनाक इरादों से दहलाने वाले उत्तर कोरिया की वर्कर्स पार्टी ऑफ़ कोरिया की तरफ से न्यूज़ एजेंसी के सी एन ए द्वारा भेजे गए तीन पेराग्राफ के बधाई सन्देश में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना के सभी सदस्यों और नागरिकों को मुबारकबाद ने अमेरिका समेत सभी शांतिप्रिय देशों के कान खड़े कर दिये हैं.
,   इधर चीन ने १७ अक्टूबर को ही जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे को फिर धोंसियाया है कि वो विवादित यासुकुनी समाधि के दौरे से परहेज करें. फ़िलहाल आबे ने भी १७ अक्टूबर को यासुकुनी के सालाना पतझड़ उत्सव के उद्घाटन में जाने के बजाय शान्ति का प्रतीक मसाकाकी ट्री भेज कर औपचारिकता निभाना ज्यादा मुनासिब समझा है. पता चला है कि शायद ही इस समारोह के दौरान यासुकुनी समाधि स्थल का दौरा करें. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता कांग ने हाल में साफ साफ कहा है कि इस समाधि पर चीन का दावा है और उसे इस मसले पर जापान का रुख पसंद नहीं है.
,   चीन की इन हरकतों के बीच अमेरिका के विदेश मंत्री रेक्स तिल्लेर्सन ने भी साफ कर दिया है कि एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए वो भारत के साथ सहयोग की नीति पर कायम है. रेक्स मानते हैं कि भारत उनका रणनीतिक साझीदार है और गैर लोकतान्त्रिक देश चीन के साथ उनकी स्वाभाविक मित्रता नहीं हो सकती है. उन्होंने दक्षिणी चीन सागर विवाद का उदहारण देते हुए कहा कि कई बार चीन ने अंतर्राष्ट्रीय समझौते को टाक पर रख कर कम किया है.
,   इस सबसे बेपरवाह चीन के वैज्ञनिकों और शोधकर्ताओं ने बेजिंग से शंघाई के बीच दो हज़ार किलोमीटर में क्वांटम संचार लाईनें बिछाने में कामयाबी हासिल कर ली है और सितम्बर से ये चालू भी हो गयी है. चाइनीज एकेडमी ऑफ़ साइंसेस की इस काम पर जुटी टीम के मुखिया पान जियान्वेइ के अनुसार क्वांटम संचार लाइन की सबसे बड़ी खूबी ये है कि चाहे जितने यूजर बढ़ जाएँ ये कभी जाम का सामना नहीं करेंगी. अब ये टीम रिले स्टेशन की दूरी ३०० से ५०० किलोमीटर तक बढाने पर काम कर रही है ताकि रिले स्टेशन की संख्या कम हो और लागत भी कम हो जाए.
,   खास बात ये भी है चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सम्मेलन के फैसलों को गोपनीय रखने के लिए और उन्हें सोशल मीडिया की पहुँच से बचाने के लिए टेक कंपनियों ने प्रोफाइल पिक्चर बदलने पर अंकुश लगा दिया था. इस मूव के चलते देशव्यापी चीनी सोशल मीडिया प्लेटफार्म वी चैट, क्यू क्यू , वेइबो यहाँ तक कि अलीबाबा का पेमेंट प्लेटफार्म अली पे थप होकर रह गयीं. हालांकि इसका असर केवल चीन में रहने वालों पर ही पड़ा. चीन कितनी ख़ामोशी से अपने सियासी फैसले लेता है इसी से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है कि दो साल में एक बार होने वाली पार्टी कांग्रेस की गोपनीयता के लिय उसने ऑनलाइन और ऑफलाइन सिक्यूरिटी को एक हफ्ते तक टॉप गियर में रखा.
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