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अफगानिस्तान में तालिबान पर मदर ऑफ़ आल बम

udaybhoomi 21/11/2017/span> Technology

शंकर रे : नयी दिल्ली : अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने वर्तमान राष्ट्रपति अशरफ गनी के खिलाफ मोर्चा शुरू कर दिया है. वे अमेरिका के सामने नतमस्तक हो जाने के लिए उनकी आलोचना कर रहे हैं. उनका आरोप है कि गनी अमेरिकी सैनिकों को मनमानी करने की इजाजत दे रहे हैं और उसके कारण ही अमेरिकी सेना ने पूर्वी अफगानिस्तान में 9797 किलाग्राम का एक बम गिराया, जिससे करीब 100 लोग मारे गए। इस बम को ‘सभी बमों की मां’ भी कहा जाता है.
,   काबुल में एक सभा को संबोधित करते हुए करजई ने अफगानी राष्ट्रपति से सवाल किया कि वे अमेरिका को वैसे बमों का इस्तेमाल करने की इजाजत कैसे दे सकते हैं, जो परमाणु बम जैसे शक्तिशाली हैं. उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने अमेरिका को वैसा करने की इजाजत दे रखी है, तो यह एक राष्ट्रीय शर्म की बात है और इसे देशद्रोह कहा जा सकता है. जिस बम का इस्तेमाल पिछले 9 नवंबर को पूर्वी अफगानिस्तान में हुआ और जिसके खिलाफ करजई आपत्ति उठा रहे हैं, उसका निर्माण 2003 में अमेरिका ने किया था. उसी साल उसे अमेरिका में ही टेस्ट किया गया था, लेकिन उसका इस्तेमाल पहली बार अफगानिस्तान में हुआ है. उस बम को जीपीएस द्वारा मॉनिटर किया जाता है. यह बम बहुत ही विध्वंसक ताकत रखता है. यह 11 टन टीएनटी के बराबर विघ्वंसक क्षमता रखता है, जिसकी तुलना हिरोशिमा और नागासाकी में गिराए गए बमों से की जा सकती है. अंतर यह है कि हिरोशिमा और नागासाकी के बमों से विकिरण निकलता था, जबकि अफगानिस्तान में गिराए गए बम से नहीं निकला, क्योंकि वह परमाणु बम नहीं था.
,   करजई के उस आरोप पर अफगानिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय से प्रतिक्रिया में एक बयान जारी किया गया, जो व्यंग्यात्मक था. उसमें कहा गया कि सभी अफगानियों को यह अधिकार है कि वह अपना विचार व्यक्त कर सकें. आगे कहा गया कि अफगानिस्तान में अभिव्यक्ति की आजादी है. अफगानिस्तान में अमेरिका के सबसे बड़े सैनिक कमांडर निकोल्सन ने कहा कि उस बम को सैनिक जरूरतों के तहत ही गिराया गया और उसके पीछे कोई राजनैतिक मंशा नहीं थी. उन्होंने कहा कि इस्लामिक स्टेट के आतंकवादी पूर्वी अफगानिस्तान में सक्रिय है और उनकी कमर को तोड़ने के लिए इस बम का इस्तेमाल किया गया. दूसरी तरफ राष्ट्रपति गनी ने ट्रंप के प्रति अपने समर्थन को फिर दुहराया है. वे दक्षिण कांधार में सेना को संबोधित कर रहे थे. गौरतलब हो कि यही इलाका तालिबान की जन्मभूमि है. उन्होंने तालिबानों को कहा कि वे इस युद्ध को जीत नहीं सकते. इसलिए उनके लिए अच्छा यही होगा कि वे हिंसा त्यागकर बातचीत को आगे आएं. उन्होंने कहा कि अमेरिका उनके साथ है और वह आगे भी उनके साथ बना रहेगा. वह साफ कर रहे थे कि अमेरिकी सैनिकों के अफगानिस्तान में रहने की कोई समय सीमा नहीं है.
,   करजई जब अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हुआ करते थे, वे अमेरिकी समर्थन से ही राष्ट्रपति बने थे, लेकिन वह इस पद से हट गए. उसके बाद वे अमेरिका के आलोचक हो गए हैं. अमेरिकी सैनिकों द्वारा की जाने वाली बमबारी की आलोचना करते रहते हैं. इसके कारण वे अमेरिका ही नहीं, बल्कि अन्य पश्चिमी देशों की आंखों के कांटे भी बन गए हैं. एक समय था, जब करजई सोवियत संघ के बहुत खिलाफ थे. उसके बाद वे तालिबान के भी विरोध में आवाज उठाते रहे. इसके कारण ही अमेरिका उनको पसंद करता था और उसने उन्हें अफगानिस्तान का राष्ट्रपति बनाने में मदद की. लेकिन अब वे अफगानिस्तान के लोगों से अमेरिका के खिलाफ उठ खड़ा होने की अपील करते हैं। (संवाद)
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