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किसानों की खातिर महंगी दाल के लिए तैयार रहिये

udaybhoomi 4/1/2018/span> Technology

आशीष मिश्र : बांदा : कुछ महीनो से सस्ती दालों की खरीद करने के आदी हो चुके आम जन को आने वाले दिनो मे महंगी दालें खरीदनी पड़ सकती है, क्योकि इसके लिये सरकार द्वारा कुछ बड़े फैसले लिये जाने की तैयारी चल रही है , जिसके तहत सरकार घरेलू बाजार में दालों की कीमतो मे वृद्धि करने की तैयारी मे है. ऐसा इसलिये, क्योंकि रबी सीजन में मे बोये गये चने व मसूर की फसल जब तैयार हो तो किसानों को बाजार में कम से कम सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम एस पी )के बराबर कीमत प्राप्त हो सके. वर्तमान में थोक बाजार में चना के साथ साथ मसूर, उड़द, मूंग, अरहर आदि सभी एमएसपी से नीचे बिक रही है. बाजार मे ऐसी स्थिति घरेलू उत्पादन नही अपितु बंफर आयात की वजह से हो गयी है.
,   केन्द्रीय उपभोक्ता मामलों के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि एक जनवरी 2018 को देश में 16.97 लाख टन दालों का बफर स्टॉक था, साथ ही इस समय रबी मौसम में चने और मसूर की फसल आने वाली है. कर्नाटक, बिहार, झारखंड समेत कई राज्यों में अरहर की फसल तैयार होने वाली है. अगले दो महीनो में ये फसले बाजार मे आ जाएंगी और अभी बाजार में आयातित दालों की इतनी उपलब्धता है कि यदि फसल की कीमत से जोड़ा जाये, तो यह न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम पड़ रहा है , जो किसानो के हित में नही है. अत: सरकार दालो के मूल्य मे बढ़ोतरी करने की तैयारी मे है , जिससे किसानो को कम से कम एमएसपी के बराबर मूल्य प्राप्त हो सके.
,   आयात शुल्क बढ़ोतरी का असर नही है. घरेलू बाजार मे दालों की कीमत में तेजी के लिये सरकार ने कुछ महीने पहले ही अरहर, मूंग, उड़द में मात्रात्मक प्रतिबंध लगाया था, लेकिन इसका कुछ खास असर नही हुआ. इसके उपरांत बीते 21 दिसम्बर को चना व मसूर के आयात पर शुल्क10 % से बढ़ाकर 30% कर दिया. इससे पहले भी पीली मटर के आयात पर शुल्क 50% तक किया जा चुका है , परन्तु इसका असर भी बाजार में ज्यादा दिन नही दिखा और वर्तमान में दालों की कीमत थोक बाजार में काफी कम है.
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