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‘कथा कथन’से मुंशी प्रेमचंद की याद

udaybhoomi 15/7/2018/span> Technology

सिटिजन रिपोर्टर : लखनउ : मुंशी प्रेमचन्द की 138वीं जन्म तिथि को राजधानी लखनउ में अलग अंदाज में उनकी कहानियां सुना कर मनाया गया. ‘कथा कथन’के इस आयोजन ने उर्दू अकादमी सभागार में आये श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया. भारतीय भाषाओं को बचाने की मुहिम के तहत शुरू हुए ‘कथा कथन’में प्रख्यात हिंदी कथा लेखकों की कहानियों का मंच पर मंचन नहीं वाचन किया जाता है. यह तरीका नया है पर कहानी को जिन्दा करने और मंच को नयी दिशा देने वाला है और प्रभावी भी मंच के जैसा है. इसने अनायास ही कभी बचपन में दादी नानी से सोते समय सुनी कहानियों की अंदाज को ताजा तो कर ही दिया है, कालजयी कहानियां रचने वाले साहित्यकारों को नयी पीीढ़ी को रूबरू कराने का भगीरथ प्रयास भी आरंभ किया है. देखना है ये कोशिशें आगे कितना और क्या रंग लाती हैं. कथा कथन का मंत्र है-आइये, सुनिये, जुड़िये.
,   मुंशी प्रेमचन्द की दो बैलों की कथा और पंच परमेश्वर का वाचन इसलिये भी अनोखा रहा क्योकि इनका अवधी में रूपांतर करके भावों के साथ वाचन किया गया और अवधी के जानकारों द्वारा सराहा भी गया. लखनउ अवध की जमीन भी है. इस वाचन में आकाशवाणी की वरिष्ठ उद्घोषिका नूतन वशिष्ठ, सत्यानंद वर्मा, पुनीता अवस्थी, शिवांशु पाठक, अंकुर सक्सेना, विवेक श्रीवास्तव, अनुपमा शरद, श्वेता यादव और रमाकांत यादव ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा और लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर किया ही, कहीं कहीं भाव प्रवणता की खूबसूरती ने श्रोताओं या कहें दर्शकों को आंखों की कोर पोंछने के लिये रूमाल निकालने को भी मजबूर कर दिया.
,   इस अवसर पर डा. अपूर्वा अवस्थी के कहानी संग्रह कही अनकही का विमोचन भी किया गया. उर्दू अकादमी की अध्यक्ष डा. आसिफा जमानी, साहित्यकार डा. विद्याबिंदु सिंह, अवधी भाषा के उन्नयन को समर्पित डा. रामबहादुर मिश्र, आकाशवाणी के पूर्व एडीजी विजय बनर्जी, मीडिया4सिटिजन के संपादक रजनीकांत वशिष्ठ और आकाशवाणी की नूतन वशिष्ठ ने कार्यक्रम के पहले दीप जला कर कार्यक्रम का आरंभ किया और पुस्तक का विमोचन किया.
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