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आराम से कथा कहूँ कि समाज के लिये सड़कों पर उतरूँ ?

udaybhoomi 1/10/2018/span> Technology

जगदीश वर्मा समंदर : वृन्दावन : एससी-एसटी एक्ट संशोधन में बिना जाँच गिरफ्तारी के विरोध में सवर्ण समाज की आवाज उठा रहे सबसे बड़े चेहरे पं देवकीनंदन ठाकुरजी ने आगामी रणनीति को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से जनता से सुझाव माँगे हैं. इस दिशा में सरकार की ओर से सकारात्मक पहल न होने को लेकर उन्होने आक्रोश व्यक्त किया है. उन्होने समयावधि पूर्ण होने पर भी सवर्ण समाज की माँग न मानने पर अखण्ड भारत मिशन की आगामी रणीनीति और राजनीति को लेकर अपने अनुयायियों और सर्वसमाज से राय व्यक्त करने को कहा है. उन्होने फेसबुक लाईव के माध्यम से इस एक्ट संशोधन का विरोध कर रहे लोगों को एक साथ मिलकर लड़ाई लड़ने का आव्हान किया.
,   गौरतलब है कि इस समय देवकीनंदन ठाकुर भागवत कथा के लिये अमेरिका में हैं. भारत में उनके संगठन अखण्ड भारत मिशन के साथ अन्य संस्थाये एवं संगठन एससी-एसटी एक्ट संशोधन के विरोध में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. 6 सितम्बर भारत बंद और आगरा में देवकीनंदन महाराज की गिरफ्तारी के बाद इस आन्दोलन में और तेजी आयी थी लेकिन पूर्वनिर्धारित कार्यक्रमों के चलते वे यूएसए चले गये. इससे पूर्व 4 सितम्बर को ग्वालियर में एक विरोध प्रदर्शन के मध्य देवकीनंदन महाराज ने इस एक्ट संशोधन को वापस लेकर सुप्रीम कोर्ट के अनुसार ही लागू करने के लिये सरकार को दो माह का अल्टीमेटम दिया था. वह अक्टूबर के अन्तिम सप्ताह में स्वदेश लौट रहे हैं.
,   सोमवार को अमेरिका से फेसबुक लाईव के माध्यम से पं देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि सरकार सवर्ण समाज की एसएसी-एसटी एक्ट संशोधन विरोधी आवाज को दबा रही है. उन्होंने कहा कि हमारे जितने भी सांसद हैं, उन्होने भी इस पर चिंता नहीं जताई कि एससी-एसटी एक्ट से समाज बँट सकता है. इसका मतलब ये नहीं है की हम चाहते हैं कि हमारे दलित भाइयों के साथ बुरे व्यवहार की छूट मिले, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है लेकिन दूसरे समाज के लोगों को भी बिना अपराध के सजा न हो यह हमारी माँग है.
,   उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर, जब हमारे प्रधानमंत्री ने स्वच्छता अभियान की शुरुआत की थी तो हमने भी इसमें बढ़ चढकर हिस्सा लिया था. गंगा-यमुना के साथ नगर की सफाई के लिये भी झाडू लेकर सड़कों पर उतरे, नोटबंदी से लेकर उनके अन्य निर्णयों का भी हमने समर्थन किया लेकिन बिना जाँच के किसी निर्दोष को जेल भेजे जाने की व्यवस्था का समर्थन कैसे करें ? उन्होने कहा कि वोटों की राजनीति के चलते भारत को दलित और सवर्ण समाज में बाँट दिया गया है. प्रधानमंत्री ने रेडियो पर अपने मन की बात कही, उनके मन की हर एक बात सुनी गयी, लेकिन इस कानून के विरोध में जो जनता सड़क पर है उसके मन की बात कौन सुनेगा ?
,   पं देवकीनंदन ठाकुर ने जनता से सलाह भी मांगी, उन्होंने कहा कि मेरे पास एक ऑप्शन था की मैं आराम से कथा करता रहूं, ठाकुर जी का भजन, कथा करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ और ये सब चल रहा था तब अचानक से ये एक्ट आया. लोगों ने समाज न बंटने देने की दुहाई पर समर्थन माँगा तो सहयोग के लिये प्रस्तुत हो गया. अपनी सरकार से अपेक्षा थी कि वह जल्द ही जनभावना को समझेगी लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक पहल सरकार ने नहीं की है, उल्टे मुझे ही गिरफ्तार कर लिया. सरकार को दिया हुआ समय भी समाप्त हो रहा है, उसके बाद भी सरकार लगातार जनविरोध की उपेक्षा कर रही है.
,   सर्वसमाज को सम्बोधन में अपने विचार साझा करते हुये पं. देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि अब मेरे सामने दो विकल्प हैं कि या तो मैं व्यास पीठ पर आराम से कथा कहते हुये देश और समाज हित की सिर्फ बातें ही कहता रहूं, करूं कुछ भी नहीं. या फिर अपने देश और समाज के लिये कुछ करने को सड़कों पर उतरूँ. उन्होने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं आपको राजनीति से क्या मतलब है, जो हो रहा है होने दें, आप कथा ही करते रहिए. कई लोग कह रहे हैं कि नहीं महाराज आप व्यास पीठ सेवा के साथ ही लोगों की आवाज भी बनिए. देश को अखण्ड देखने वाले बहुत सारे लोगों की उम्मीद मुझसे बंध गई हैं. बहुत से लोग कह रहे हैं चुनाव लडिए, कोई कह रहा है आप नही लड़ सकते तो अपने उम्मीदवार लडवाइए. उन्हे लग रहा है कोई तो है जो हमारी आवाज बनने के लिये सामने आया है. इस सम्बन्ध में अपने अनुयायियों से सलाह माँगते हुये उन्होने कहा कि आप अपने विचार दिजिए कि मैं क्या करूं ?
,   देवकीनंदन ठाकुरजी नाम के फेसबुक पेज पर सुबह 11 बजे लाइव हुये इस वीडियों को पहले तीन घंटे में 1 लाख से ज्यादा लोगों ने देख लिया वहीं 9 हजार से ज्यादा लोगों ने अपनी राय भी दे दी थी. अधिकांश कमेन्टस में लोगों ने चुनाव लडकर सरकार को सबक सिखाने की राय रखी. वहीं कई कमेन्टस में सरकार द्वारा देवकीनंदन महाराज को नुकसान पहुचाये जाने की आशका व्यक्त की गयी और उन्हें ऐसे मामलों में पैरवी न करने की सलाह मिली.
,   अखण्ड भारत मिशन के सचिव विजय शर्मा ने बताया कि देश के विभिन्न भागों से बड़ी संख्या में लोग एवं संगठन लगातार सम्पर्क कर रहे हैं. लोग इस आन्दोलन को अंजाम तक पहुचाने के पक्ष में हैं लेकिन हमें अभी भी सरकार से आशा है कि वह जन भावना को समझते हुये जल्द ही कोई निर्णय लेगी. तब तक मिशन द्वारा लोगों की प्रतिक्रियाओं और राय का अध्ययन कर आगामी रणनीति बनायी जा रही हैं. मंगलवार 2 अक्टूबर को गाँधी जयंती पर इस पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है. फेसबुक लाइव के माध्यम से ही यह घोषणा की जायेगी.
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