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बीज वसुधा में हो, सुगंध आसमान में

udaybhoomi 21/10/2018/span> Technology

रजनीकांत वशिष्ठ : लखनऊ : ‘...बीज वसुधा में हो, सुगंध आसमान में’. कवि और शिक्षक और हिंदी संस्थान के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने पुष्प पर लिखे अपने एक छंद की लाइन से डा. लक्ष्मीशंकर मिश्र निशंक के कृतित्व को जब परिभाषित किया तो प्रेक्षगृह तालियों से गूँज उठा.
,   अवसर था के के सी डिग्री कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और कवि डा. लक्ष्मीशंकर मिश्र ‘निशंक’ जन्म शताब्दी समारोह का जिसका आयोजन रविवार २१ अक्टूबर २०१८ को यहाँ उर्दू अकादमी प्रेक्षागृह में किया गया था और डा. उदय प्रताप सिंह मुख्य अतिथि की हैसियत से अपने छंदों के जरिये निशंक जी को पुष्पांजलि अर्पित कर रहे थे.
,   डा. लक्ष्मी शंकर मिश्र ‘निशंक’अध्ययन संस्थान द्वारा आयोजित इस समारोह में अध्यक्षता कर रहे लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डा. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने निशंक के कृतित्व पर अपने वक्तव्य में कहा कि निशंक जी ने अपने समय में अतुकांत कविता के विरुद्ध छान्दसिक कविता को स्थापित करने का आन्दोलन चलाया था. भक्ति काल और रीतिकाल काव्य शास्त्र की आत्मा छंद ही हुआ करते थे. उनके दौर में अतुकांत कविता का एक चलन चला पर वो कविता रसिकों के गले नहीं उतर सकी.
,   डा. दीक्षित ने कहा कि हर भाषा का अपना व्याकरण होता है. हिंदी साहित्य में व्याकरण अधिकांश संस्कृत साहित्य से लिया गया. निशंक जी ने न केवल सवैया छंद की साधना की बल्कि छंदों पर शोध करके हिंदी काव्य शास्त्र को समृद्ध किया और काव्य शास्त्र को व्याकरण दे गए. इसके साथ ही निशंक जी ने भारतेंदु हरिश्चंद, महाबीर प्रसाद द्विवेदी या सनेही जी परंपरा में एक कवि गुरु या मांडलिक कवि की भूमिका भी निभायी. वो नए कवियों की रचनाओं को सुधारने उन्हें समझाने में भी आजीवन लगे रहे. वो मंचों पर भी कविता पाठ के लिए गए पर उनकी कविता कभी मंचीयता के व्यवसाय से प्रभावित नहीं रही.
,   इस अवसर पर निशंक जी की परंपरा का अनुसरण करने वाले वरिष्ठ कवि और छंदकार जगमोहन नाथ कपूर ‘सरस कपूर’ को डा. लक्ष्मीशंकर मिश्र ‘निशंक’ साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया. साथ ही उनके शिष्यों-साहित्यकार डा. रामकिशोर वाजपेयी, लखनऊ विश्वविद्यालय, राजनीति शास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रमेश दीक्षित, शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अम्बिका प्रसाद तिवारी और हिंदी संस्थान के पूर्व सहायक संपादक देवीशंकर द्विवेदी को विशिष्ट सम्मान से नवाजा गया. कार्यक्रम का आयोजन अध्ययन संस्थान के अध्यक्ष डा. कमलाशंकर त्रिपाठी और मंत्री मुकुल मिश्र ने किया. समारोह का कुशल संचालन जीतेन्द्र कुमार सिंह ने और धन्यवाद ज्ञापन जाकिर अली रजनीश ने किया.
,   समारोह में कवयित्री डा. विद्याबिंदु सिंह, हिंदुस्तान के पूर्व संपादक नवीन जोशी, विश्व संवाद के संपादक प्रद्युम्न तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार महेश पांडे, आर डी शुक्ल, मधुसुदन त्रिपाठी, अशोक त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार उपस्थित थे.
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