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संघ आया सामने

udaybhoomi 21/10/2018/span> Technology

विकल्प शर्मा : भोपाल : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी ने पांच राज्यों में हो रहे चुनावों के मददेनजर पूरी ताकत केवल मध्यप्रदेश में ही झोंक दी है. यह पहला अवसर है कि जब संघ खुलकर सामने आया है या मीडिया की खबरों का हिस्सा बना है.
,   संघ ने पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व पर दबाव बनाते हुए मध्यप्रदेश से 78 टिकट काटने की बात कही है जिसमें 17 मंत्री शामिल हैं. इसके साथ संघ के कई अनुवांशिक संगठनों ने खुलकर चुनाव की कमान अपने हाथ में ले ली है. क्या यह माना जाना चाहिए कि संघ 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद कुछ बड़ा करने या बदलाव का मन बना रहा है. पार्टी में कोई भी इस पर खुलकर बोलने को नहीं तैयार है लेकिन कई संगठन मंत्री इस और इशारा करते हैं कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को दिल्ली भेजने की तैयारी चल रही है. पार्टी से ज्यादा संघ में इस कदम को लेकर बड़ी तैयारी की जा रही है।
,   संघ के प्रचारक इशारा करते हैं कि 2014 में भाजपा की बड़ी जीत को केवल मोदी की जीत नहीं माना जा सकता है. संघ प्रमुख मोहन भागवत इस ओर इशारा कर भी चुके हैं. इसलिए 2019 में लोकसभा के परिणाम आने के बाद कुछ भी हो सकता है. संघ कोई अप्रत्याशित और बड़ा फैसला ले सकता है.
,   दूसरी तरफ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित अपने तोड फोड अभियान में लगे हुए हैं. संघ इस बात को बहुत अच्छी रणनीति नहीं मान रहा है. लेकिन सूत्र बताते हैं पूर्व में भाजपा में रहने वाले लक्ष्मण सिंह, जो दिग्विजय सिंह के छोटे भाई हैं, की पुत्र वधु को भाजपा में लाकर चुनाव लड़ाने की तैयारी चल रही है. दूसरी तरफ कांग्रेस के प्रदेश मुखिया कमलनाथ की बातचीत अमित शाह से चल रही है. कमलनाथ 2019 में कोई बड़ा फेसला ले सकते हैं. उधर पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ में बडा खेल खेलने की तैयारी चल रही है. वैसे तो अभी अजीत जोगी मायावती के साथ गठबंधन कर चुके हैं लेकिन सूत्र बताते हैं कि अंदरूनी तौर पर जोगी भाजपा का साथ दे रहे हैं. यदि छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार बनती है तो अमित जोगी को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है और उधर अजीत जोगी के केन्द्र में जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है.
,   मध्यप्रदेश की राजनीति ऐसे मोड़ पर आ खडी हुई है जहां दो बडे ध्रुव आपस में टकराने के लिए आमादा हैं. दरअसल बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान का 36 का आंकड़ा रहा हैं लेकिन संकेत है कि गौर को इस बार टिकट नहीं मिलेगा. ऐसी परिस्थितियों में गोर कोशिश में है कि उनकी सीट से उनकी बहु कृष्णा गौर को टिकट दिया जाये. गौरतलब है कि पूर्व में गौर को अटल जी के कहने पर टिकट दिया जाता रहा है. एक समय ऐसा भी आया था जब उमा भारती को गौर की वजह से अपमान झेलना पडा था लेकिन नई रणनीति के तहत शिवराज को गोविंदपुरा से लडने की तैयारी चल रही है. इस कदम से एक तीर से कई निशाने लगाये जा रहे हैं. हालांकि कृष्णा गौर बेफिक्र हैं. वह तो यहां तक कहती हैं शिवराज जी का स्वागत है गोविंदपुरा में लेकिन दूसरी तरफ शिवराज की पत्नी को बुधनी से चुनाव लडा कर उन्हें बडी भूमिका दी जा सकती है.
,   कुछ भृष्ट लोगों को भी किनारे लगाने का काम किया जा रहा है. एक है बृजेश लूनावत जो मीडिया के लोगों का जमावड़ा अपने आसपास लगाये रहते हैं. यह महाशय इस बात का प्रचार करते रहते हैं कि ये शिवराज और अमित शाह के बहुत करीबी है जबकि ऐसा कुछ नहीं है. बृजेश मध्यप्रदेश में जमीनों पर कब्जा करने और करवाने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं. यह बात किसी से छिपी नहीं है कि मध्यप्रदेश में पत्रकारों का एक माफिया गुट है जो इस तरह का लाइजनिंग वर्क करता है. इसमें कुछ मंत्री भी बड़ी भूमिका निभाते रहे हैं. नेता और पत्रकारों का यह गठजोड़ मध्यप्रदेश में बड़ा खेल खेल रहा है लेकिन चुनाव में बृजेश का रास्ता रोकने के लिए अमित शाह ने रजत सेठी को बैठा दिया है.
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