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तीन दशक में यू पी में शैया पर पहुंची कांग्रेस

udaybhoomi 23/10/2018/span> Technology

राजकुमार शर्मा : लखनऊ : कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ता खोज रहे हैं कि तीन दशक से लगातार उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के घटते जनाधार का मूल कारण क्या है. कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपनी मूल कांग्रेस की राह से इन तीन दशकों में इस कदर भटक गयी हे कि कांग्रेस के परम्परागत वोटर एवं निष्ठावान कार्यकर्ता दरकती कांग्रेस के लगातार घटते जनाधार से हैरान है.
,   कांग्रेस के प्रदेश मुखिया पद पर जिस तरह अरुण सिंह ‘मुन्ना’एवं निर्मल खत्री को छोड़कर गैर कांग्रेसी हाथों में कमान सौंपी गयी, उसके कारण कमान संभालने वाले नेता ने अपनी सेहत तो सुधारी किन्तु कांग्रेस की हालत पतली कर दी. कांग्रेस को पूरी तरह से श्रीमती इंदिरा गांधी एवं पंडित कमलापति त्रिपाठी की राह से भटका कर चलाने की कार्यवाही की गयी, जिसके चलते कांग्रेस का परम्परागत मतदाता उससे बिदक गया और यह भी कहा जा सकता है कि उसके ब्राह्मण एवं मुसलमान के बिदकने का असर यह हुआ कि कांग्रेस का चुनावों में प्रदर्शन भी लगातार कमजोर हो गया. कांग्रेस के पथभ्रमित होने का दौर स्व. राजीव गांधी के समय (काल) में ही हो गया था.
,   अयोध्या मामले को जब तूल दिया जा रहा था, अयोध्या में कथित बाबरी मस्जिद को ढहाने की साजिश रचकर आंदोलन चलाया जा रहा था, उसी समय कालदृष्टा पंडित जी ने अयोध्या कूच करने की घोषणा के साथ बाबरी मस्जिद पर गिरने वाले पहले फावड़े को अपना गरदन देने की बात कही थी. राजीव गांधी द्वारा पंडित जी के संकल्प की अनदेखी करने के कारण पंडित जी का संकल्प ‘नक्कारखाने में तूती की आवाज सिद्ध हुआ. अयोध्या में वही हुआ जिस अनहोनी कि आशंका पंडित जी को थी. देश की सद्भावना अयोध्या में तार-तार हो गयी. कांग्रेस को जिम्मेदार होने के बावजूद चुप्पी साधने से प्रदेश में कांगे्रस को भी भारी धक्का लगा और उसका वोट का बड़ा तबका उससे बिदक गया.
,   इस घटना ने साम्प्रदायिक शक्तियों को इतनी ऊर्जा की कि पूरे देश में ‘तिरंगा’की जगह ‘भगवा’लहराने लगा. कांग्रेस के कई दिग्गज उन दिनों आंख मिचौली का खेल खेलते हुए कांग्रेस की जगह जातिवादी मुखौटा वाले नेता मुलायम सिंह यादव को यूपी में अपना भाग्यविधाता समझने लगे थे. इससे श्री मुलायम सिंह को सत्ता का स्वाद चखने का पूरा अवसर मिल गया. कांग्रेस हाईकमान ने जिन विकास पुरुष कहे जाने वाले पंडित नारायण दत्त तिवारी का सम्मान बढ़ाया, वही तिवारी जी ने सपा प्रमुख मुलायम को आशीर्वाद प्रदान कर उनकी सत्ता में वापसी कराई और कांग्रेस की पुरानी मजबूत दीवार को दरका दिया.
,   इस दौर में दलित की एक बेटी का भाजपा के बल पर सत्ता का सुख भोगना एवं दलित की बेटी से ‘दौलत की बेटी’तक का सफर पूरा करना भी कांग्रेस के सूबे के नेताओं की दोगली नीति के कारण ही संभव हो सका था. दलित वोट जो कांग्रेस का परम्परागत वोट रहा उस वोट को कांग्रेस से हटाकर दलित की बेटी के नाम पर उत्तर प्रदेश में सौदा किये जाने का भी दौर चला. देश में यूपीए अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के प्रयास से यूपीए की सरकार बनी एवं मनमोहन सिंह ‘सरदार’की प्रधानमंत्री के पद पर ताजपोशी हुई. उस दौर में भी कांग्रेस की हालत उत्तर प्रदेश में सुधारने के कोई ऐसे सार्थक प्रयास नहीं किये गये जिससे कांग्रेस को बढ़त मिले. इस दौर में सूबे की मुखिया की जिम्मेदारी सपा सहित कई दलों में कार्य कर चुकी इलाहाबाद निवासी डा. रीता बहुगुणा जोशी को सौंप दी गयी. कांग्रेस के दिग्गजों ने एक कारपोरेट घराने के दबाव में आकर डा. जोशी को कमान सौंपकर वही काम किया जो कभी कांग्रेस के पीठ में छूरा भोंकने का काम उनके पिता स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा ने किया था. उनके काल में कांग्रेस के पदों से लेकर विधायकों की सीटों तक को बोली लगाकर नीलाम कर धनार्जन करने का खेल खेला गया, जिसका परिणाम रहा कि कांग्रेस का निष्ठावान कार्यकर्ता लगातार आहत हुआ. सूबे के मुखिया की माली हालत दिन दूना रात चैगुनी बढ़ गयी और कांग्रेस हाशिए पर पहुंच गयी.
,   उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को बद से बदतर हालत से उबारने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने दखल दी. दस जनपथ की लाडली प्रियंका ने इस बार देश के हृदय प्रदेश उत्तर प्रदेश के मुखिया का दायित्व सिनेमा के ग्लैमर से राजनीति का भविष्य सुधारने की मंशा से फिल्मों के खलनायक राजबब्बर को नायक बनाकर पेश कर दिया. राजबब्बर का राजनैतिक अनुभव शून्य था. बब्बर को राजीव गांधी पर बोफोर्स घोटाले का आरोप लगाने वाले विश्वनाथ प्रताप सिंह ‘राजा माण्डा’का उनके पतन काल में जब वे किसान हितैषी बनकर देश भ्रमण कर रहे थे, उन्हीं दिनों में झोला ढोने का अवसर मिला था. बब्बर ने सूबे का सरदार बनकर तीन चर्चित माफियाओं की कांग्रेस में ताजपोशी करने का काम वेटी प्रियंका को विश्वास में लेकर किया जिसमें लैक्स फैड घोटाले के लिए चर्चित बादशाह सिंह, मायावती के साथ विश्वासघात करने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी सहित बलरामपुर के चर्चित माफिया रिजवान जहीर को कांग्रेसी बनाने का काम किया.
,   राजबब्बर द्वारा सिद्दीकी को कांग्रेस के दिग्गज नेता के रूप में सजाने संवारने को निष्ठावान कांग्रेसी एक बड़ा घोटाला बताते हैं, जिससे यूपीए में साथ रही मायावती को कांग्रेस के ‘बब्बर कदम’से भी धक्का लगा. सिद्दीकी जैसे कथित दागी नेता को कांग्रेस में जिसने कद्दावर बनाने का विरोध किया उसे दल से ही बाहर का रास्ता दिखाया गया. इन तीन दशक में कांग्रेस शय्या पर पहुंच गयी है. शय्या पर से कैसे इसे उठाया जाय, यह चिंता कांग्रेसजनों को सता रही है.
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