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शरद पूर्णिमा तो कहीं कोजागरी लक्ष्मी पूजा

udaybhoomi 24/10/2018/span> Technology

बबिता बसाक : लखनऊ : हम सभी अपने दैनिक जीवन में मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं ताकि उनका आशीर्वाद और उनका वास सदैव हमारे साथ रहें। दुर्गा पूजा की तरह शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष विधान है। गत बुधवार को राजधानी के समस्त दुर्गा पांडालों में कोजागरी लक्ष्मी पूजा का भव्य आयोजन देखने को मिला। समस्त दुर्गा पांडालों में मां लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करके संपूर्ण विधि विधान से मां की पूजा अर्चना की गई।
,   महिलाओं ने व्रत रखकर मां के स्वागत हेतु आम के पत्ते से तोरण और चावल से रंगोली बनाई। खील, लैया, चूरा, कच्चा नारियल, चीनी, दूध व दही आदि से प्रसाद तैयार किया गया। शाम के समय पूजा में सम्मिलित होकर भक्तों ने मां को पुष्पाजंलि दी। आरती व होम के बाद भक्तों ने प्रसाद व भोग ग्रहण किया।
,   पांडालों के अलावा घर-घर में भी कोजागरी लक्ष्मी पूजा का उत्साह तो अधिकांश घरों में खीर बनाकर (अमृत वर्षा हेतु) रात भर छत पर रखने की प्रथा देखने को मिली। कोजागरी अर्थात् कौन जागता है ? और जो जागता है वो पाता है, इस मान्यता के अनुसार, कोजागरी लक्ष्मी पूजा के दिन पूजा स्थल पर रात भर दीपक प्रज्जवलन व संपूर्ण रात्रि जगने की परम्परा आज भी कहीं-कहीं देखने को मिलती है।
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