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क्या के.सी.आर. की जागीर है तेलंगाना

udaybhoomi 29/10/2018/span> Technology

विकल्प शर्मा : भोपाल : अपना कार्यकाल पूरा होने से नौ माह पहले ही विधानसभा को भंग करके पहली चाल चलकर लाभ पाने की के.चन्द्रशेखर राव की उम्मीद शायद ज्योतिष के चक्कर में छूट जाय. मतदान की तारीख 7 दिसम्बर के दिन अमावस्या है और मतगणना के दिन 7 दिसम्बर को मंगलवार है. दोनों ही दिनों को राव अपशुकुनी मानते हैं.
,   तेलंगना राष्ट्र समिति के मुखिया ने इन चुनावों में कम से कम 50 फीसदी मत को हासिल करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए वे अधिकतम तोहफे पहुंचाने की रणनीति पर चल रहे हैं. वे यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि हर परिवार को उनकी सरकार की 40 प्रमुख विकास और कल्याण योजनाओं में से कम तीन का का प्रत्यक्ष फायदा मिल सके. उनकी सरकार ने रुपये 272014 में से इन योजनाओं पर 218377 करोड रुपये खर्च किये हैं और उसका दावा राज्य की कुल 2.14 करोड की ग्रामीण आबादी में 1.05 करोड लोगों को इसका फायदा मिला है. अगर इन सभी योजनाओं में से लाभ पाने वाले हरेक व्यक्ति को तोड लिया तो उनकी कुल संख्या 69246598 हो जाती है जो राज्य 3.52 करोड़ की आबदी का तकरीबन 3 गुना है. सत्तारूढ पार्टी इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है. चुनावों में उसे इसका भरपूर फायदा मिलेगा.
,   लेकिन के.सी.आर. के सामने कांग्रेस की तगड़ी चुनौती है. कांग्रेस ने 2018 के इन चुनावों को के.सी.आर. परिवार और तेलांगना के लोगों के बीच धर्म युद्ध के रूप में पेश करने का अभियान छेड रखा है. विरोधी दल बार बार चार मुख्य मुददे उठाते रहे हैं. पहला कि टी.आर.एस. का शासन निरंकुश है. राज्य को के.सी.आर. परिवार की जागीर के रूप में तब्दिल कर दिया गया है जिसमें के.सी.आर. के अलावा के.टी.आर. लोकसभा सदस्य के.कविता शामिल हैं. राव की पार्टी और अन्य नेता भ्रष्टाचार में लिप्त हैं. दिल्ली में भाजपा और हैदराबाद में ओवेसी से सांठगांठ है.
,   विश्लेषण का मानना है कि के सी आर यह उम्मीद लगाये हुये हैं की यह चुनाव मुसलमानों के समर्थन से जीत जाये और फिर लोकसभा चुनावों के लिए अपनी निष्ठा भाजपा के पक्ष में जता दे. राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति चुनाव में टी.आर.एस. ने भाजपा के उम्मीदवारों के पक्ष में वोट दिया था. के.सी.आर. इस भरोसे में हैं कि विभिन्न तोहफे देने से लोगों के पास उनके पक्ष में वोट देने के सिवाय और कोई चारा नहीं रहेगा.
,   के.सी.आर. यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि छोटे मोटे सत्ता विरोधी गुट और छोटी पार्टियां मिलकर महाकूटनीति के खिलाफ एक तीसरा मोर्चा बना लेगी जिससे टी.आर.एस. विरोधी वोट बंट जायेंगे. तेलगू अभिनेता पवन कल्याण की पार्टी जनसेवा 24 सीटों पर चुनाव लडेगी. बसपा भाजपा और आम आदमी पार्टी सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार खडे कर रही है. पर टी.आर.एस. के खिलाफ असंतोष पूरे राज्य में फैला हुआ है.
,   क्या के.सी.आर. ने चुनाव समय से पहले करा कर और उसकी कोई वाजिब वजह न बताकर बड़ी भूल कर दी है. फिर कई चुनावी वादे भी अधूरे पडे है जिनमें मुसलमानों के लिए 12 फीसदी आरक्षण. हर दलित परिवार को तीन एकड जमीन का अनुदान और हर गरीब परिवार को 2 बेडरूम का मकान और एक नौकरी भी उसमें शामिल है. फिर दशहरे पर बाथुकुमा साडी के वादे को भी कम ही लोग भूले होंगे. चुनाव आयोग ने करीब 91 लाख साडियों के वितरण पर रोक लगा दी जिस पर राज्य सरकार ने 280 करोड रूपये खर्च किये.
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