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क्या कह रहा है चुनावी हवा का रुख

udaybhoomi 29/10/2018/span> Technology

विकल्प शर्मा : भोपाल : छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में दलबदल राजनीति के फायदे को भांप कर आखिर क्षणों में पाला बदलना भी जोरों से चल रहा है. क्या यह इस बात का कोई संकेत है कि आम हवा किस तरफ बह रही है तो छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और मध्यप्रदेश में भाजपा के लिए संकट मुंह बाये खड़ा है।
13 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ में पाली तानाखर विधानसभा सीट से कांग्रेस के वरिष्ठ आदिवासी नेता रामदयाल उइके ठीक उस समय भाजपा में शामिल हो गये. जब पार्टी अध्यक्ष अमितशाह राज्य के दौरे पर थे. जबकि 1998 में भाजपा के टिकट पर मारवाही से विधायक चुने गये थे लेकिन बाद में कांग्रेस में शामिल हो गये और 2000 में जोगी के लिए अपनी सीट खाली कर दी जिससे वह मुख्यमंत्री बनकर सदन में पहुंच सके. इसके बाद 2003, 2008 और 2013 में कांग्रेस के टिकट पर पाली तनाखार से विधायक चुने जाते रहे. मुख्यमंत्री रमनसिंह ने उनकी वापसी को घर वापसी बताया. कांग्रेस के लिये उइके महत्वपूर्ण व्यक्ति थे क्योंकि वे जोगी के बहुत करीबी थे।
नवगठित जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ में उन्हें जाने से रोकने के लिए कांग्रेस ने उइके को कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया था. उइके के पाला बदलने पर जोगी ने कहा उइके खुद को कांग्रेस में उपेक्षित महसूस कर रहे थे क्योंकि पार्टी दूसरे नेताओं को ज्यादा महत्व दे रही थी. आदिवासियों के लिए आरक्षित सबसे ज्यादा 29 सीट कांग्रेस के पास होने से उनमें से कुछ को अपने पाले में खींच लेना भाजपा के लिए सत्ता में बने रहना बहुत मायने रखता है.
2012 में कांग्रेस से निष्कासित पूर्व केन्द्रीय मंत्री अरविंद नेताम इस साल पार्टी में वापस आ गये थे. जे.पी.सी. युवा शाखा के अध्यक्ष विनोद तिवारी कांग्रेस में शामिल हो गये हैं. जबकि जे.सी.सी. के कुछ अन्य नेता जिन्हें चुनावों में पार्टी की ओर से टिकट दिया गया, बसपा और जे.सी.सी. के बीच सीटों के बंटवारे में आपसी सीटें बसपा को दिये जाने के बाद भाजपा में चले गये.
पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में कांग्रेस को दल बदल का फायदा मिल रहा है. केबीनेट मंत्री का दर्जा रखने वाली पदमा शुक्ला पहली नेता थी. अब तक कोई जाना पहचाना नाम भाजपा में शामिल नहीं हुआ है. पिछले तीन चुनावों के मुकाबले इस बार चुनाव भाजपा के लिए क्यों अलग मालूम पड़ रहा है. कटनी में पदमा शुक्ला जैसो के कुछ फेरबदल महत्वपूर्ण हो सकते हैं क्योंकि पाठक जिनके खिलाफ उन्होंने 2013 में चुनाव लडा था, अब भाजपा में है लेकिन सुनील मिश्रा और रमाशंकर चौधरी जनता का मूड समझने के लिए जाने जाते हैं.
भाजपा ने 14 अक्टूबर को होशंगाबाद में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव संगठन रामलाल के सामने पूर्व मंत्री रमाशंकर चौधरी को पेश किया. कांग्रेस ने भी नेताओं को पार्टी में वापस लेने की रणनीति बदल दी है. जो संकट के समय पार्टी छोडकर चले गये थे ऐसे कई पूर्व कांग्रेसी नेता पार्टी में लौटना चाहते हैं लेकिन कमलनाथ हमेशा से व्यवहारिक रहे हैं जो लोग कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं. उन्हें टिकट मिलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता.


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