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घर बैठे देवी-देवताओं की मूर्तियों का भू-विसर्जन

udaybhoomi 12/11/2018/span> Technology

संज्ञा शर्मा : लखनऊ : राजधानी में ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी संस्था ने पहल करके अपने बल पर देवी-देवताओं की मूर्तियों के भू-विसर्जन के लिये लगातार 15 दिनों तक अभियान चलाने का निर्णय लिया है. यही नहीं संस्था ने एक वैन इस कार्य के लिये निशुल्क मुहैया कराई है. जो बुजुर्गों और घाट तक पहुंचने में अस्मर्थ लोगों के बुलावे पर तत्काल उनके आवास पर पहुंचेगी और उनकी मूर्तियों का विधिवत भू-विसर्जन करेगी. इसके लिये संस्था ने एक हेल्पलाइन नम्बर भी जारी किया है.
,   इस संस्था का नाम स्वच्छ पर्यावरण आंदोलन सेना है जिसने रविवार से देवी-देवताओं की मूर्तियों को उठाकर झूले लाल पार्क के निकट गोमती तट पर भू-विसर्जन के अभियान की शुरुआत कर दी है. लगातार 21वें रविवार को झूले लाल पार्क के निकट अटल बिहारी वाजपेयी गोमती तट पर बने भू-विसर्जन स्थल पर सफाई भी की. स्वच्छ पर्यावरण आंदोलन सेना के संयोजक और पूर्व पार्षद रणजीत सिंह के नेतृत्व मे दर्जनों स्वयंसेवकों ने श्रमदान किया. बाबूगंज पुलिस चौकी के पास पड़ी हुई सैकड़ों मूर्तियों को उठाया. निरालानगर, अलीगंज सेक्टर ए ,बी, डी ,साई मन्दिर, राम राम बैंक चौराहा,जानकीपुरम, मडियांव गांव के अंदर से लगभग दो हजार मूर्तियों को उठाया गया और उनका विधिवत विसर्जन किया गया. जानकीपुरम वार्ड के पूर्व पार्षद चांद सिद्दीकी ने अपने वार्ड में इस कार्य में सहयोग दिया. श्रमदान करने वालों में विष्णु तिवारी, कृपा शंकर वर्मा, मुकेश चौरसिया, भुवन पांडे, रज्जू तिवारी, अर्जुन मंडल , शिवराज , प्रह्लाद सिंह, राजीव तिवारी, सहित तमाम स्वयंसेवकों ने भाग लिया.
,   संस्था के पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार से मांग की कि गोमती नदी के विभिन्न तटों को देवी-देवताओं की मूर्तियों के भू- विसर्जन के लिये विकसित किया जाये. मूर्ति विसर्जन के लिए लोगों को इधर-उधर भटकना न पड़े. सीनियर सिटीजन व अन्य लोग जो गोमती तट पर पहुंचने में असमर्थ हैं संस्था ने उनके लिए हेल्पलाइन नम्बर 9415414111 जारी किया है जिस पर काल करने पर मूर्ति उठाओ अभियान मोबाइल वैन उनके दरवाजे से मूर्तियों को उठाकर विधिवत भू-विसर्जन करने का कार्य निःशुल्क करेगी.
,  खण्डित मूर्तियां पर्यावरण को पहुंचाती नुकसान
,  -नदी को प्रदूषित करती हैं
,  -प्राणवायु को भी दूषित करती है
,  -इनमें प्रयोग होने वाले सीसा के रंग हानीकारक होते हैं
,  -यह नदी के ईको-सिस्टम को बिगाड़ती है
,  -इनको खाकर जलचर मरते हैं
,  -इनमें प्रयोग होने वाली रासायनिक धातु कभी नष्ट नहीं होती
,  -प्लास्टिक की मालाएँ और गोटे भी प्रदूषण के लिए खतरा बनते हैं
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