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क्यों राजनितिक अराजकता का शिखर है बुंदेलखंड

udaybhoomi 13/11/2018/span> Technology

विकल्प शर्मा : लखनऊ : उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड का इलाका आज राजनितिक अराजकता का शिखर है. यहाँ के मतदाता ने सभी मूल्यों और राजनीतिक दलों को किनारे करके २०१४ और २०१७ में मोदी पर अपनी निष्ठा जताई और जनप्रतिनिधि चुन कर भेजे. पर आज वे उनके माध्यम से अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं.
,   जिला संगठन से लेकर संसद तक आज बुंदेलखंड पर अलग अलग तरह से अत्याचार कर रहे हैं. सांसद और विधायक निधि से आने वाला पैसा सांसद और विधायकों की निजी यात्राओं और दूसरे मदों पर खर्च किया जा रहा है. ठेकेदारों के वारे न्यारे हो रहे हैं.यहाँ बालू माफिया से लेकर शिक्षा माफिया तक अपने पैर पसार रहे हैं.
,   बांदा के विधायक प्रकाश द्विवेदी अब सांसद बनने का सपना संजोये हुए हैं. लेकिन हालात ये हैं कि बांदा से महोबा जाना हो तो बस से ढाई घंटे लगते हैं. सड़कों की हालत बद से बदतर है. यहाँ सड़क में गड्ढे नहीं गड्ढों में सड़क नज़र आ रही है. किसान को कर्जमाफी के नाम पर छाला जा रहा है. कई रिपोर्ट बतातीं हैं कि यहाँ के सांसद को २०१९ में मौका नहीं दिया जाना चाहिए. सूत्र बताते हैं कि बांदा के वर्तमान सांसद भैरव प्रसाद मिश्र की जगह केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल को लाने की तैयारी हो रही है. या फिर उनके मना करने पर किसी बुद्धिजीवी व्यक्ति को चुनाव लड़ना ज्यादा श्रेयस्कर होगा.
,   इसी तरह बबेरू के विधायक चन्द्र पाल कुशवाहा ने शिव शंकर शर्मा के कॉलेज पर कब्ज़ा कर उसे अपनी सम्पत्ति बना लिया. धड़ल्ले से विधायक निधि के नाम पर करोड़ों की उगाही कर रहे हैं. इनके बारे में जो रिपोर्ट है उसमे साफ तौर पर कहा गया है कि इन्हें २०२२ के चुनाव में पनाह टिकट देना पार्टी के लिए घातक सिद्ध होगा. झाँसी की सांसद और केन्द्रीय मंत्री उमा भारती ने नमामि गंगे के नाम पर अपने एक चहेते को करोड़ों का ठेका सौंप दिया. और अब वे चुनाव लड़ने से मना कर रहीं हैं. इसी स्थिति में पार्टी एक दवा कम्पनी के मालिक विश्वनाथ शर्मा पर डोरे डाल रही है. इसी तरह से हमीरपुर महोबा के लिए युवराज सिंह का नाम आगे आ रहा है. गौरतलब है कि सपा से भाजपा में आये युवराज सिंह को विधानसभा चुनाव भी लड़ाया जाना था लेकिन केशव मौर्या ने उनका टिकट काट दिया.
,   इस तरह से उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड का इलाका राजनीतिक अराजकता का शिखर बना हुआ है और प्रकाश द्विवेदी लखनऊ में बैठ कर सुनील बंसल और चाँद बड़े नेताओं के मोहरे बन कर बुंदेलखंड में बालू की खेती कर रहे हैं. इन्हीं में से एक छोटे नेता इंदरपाल पटेल जो पूर्व में बांदा के जिला अध्यक्ष रह चुके हैं, विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के नाम भेजने के नाम पर लाखों डकार चुके हैं. जिस बुंदेलखंड का मतदाता दो जून की रोटी और पानी को तरस रहा है उसी बुंदेलखंड के जनप्रतिनिधि अपनी जेबें भरने में लगे हुए हैं.
,   इन स्थितियों में भाजपा का मतदाता उससे दूर जा रहा है. बेहतर होगा कि वहां के स्थानीय राजनीतिक दल बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा को आगे कर भाजपा अपनी लाज बचा सकती है.
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