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बधाई टीम इंडिया, आस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीत का सपना साकार

udaybhoomi 7/1/2019/span> Technology

आदर्श प्रकाश सिंह : लखनऊ : आस्ट्रेलिया दौरे पर 71 वर्षों के बाद भारत ने टेस्ट क्रिकेट सीरीज जीत कर इतिहास रच दिया है. अभी तक टीम इंडिया ने 11 बार वहां का दौरा किया था लेकिन टेस्ट सीरीज में जीत हासिल नहीं हो पाई. कभी हार तो कभी ड्रा से ही संतोष करना पड़ा. मगर, विराट कोहली की अगुवाई में मौजूदा टीम ने चार मैचों की सीरीज को 2-1 से अपने नाम कर लिया है. सिडनी में खेला गया आखिरी टेस्ट मैच सोमवार को बारिश एवं खराब मौसम की वजह से बिना नतीजे के समाप्त हो गया. इस तरह इन्द्र देवता ने कंगारू टीम को 3-1 की हार से बचा लिया. आखिरी दिन के खेल में भारत को जीत के लिए दस विकेट चाहिए थे. पूरी उम्मीद थी कि हमारे गेंदबाज आस्ट्रेलिया को आउट कर चौथा टेस्ट जीत लेंगे लेकिन लंच के बाद ही मैच ड्रा घोषित कर दिया गया.
,   इस जीत ने भारतीय क्रिकेट में नई इबारत लिख दी है. अस्सी-नब्बे के दशक में सुनील गावसकर, कपिल देव और उनके बाद सचिन तेंदुलकर एवं राहुल द्रविण जैसे महारथी जो काम नहीं कर पाए वह इस नौजवान टीम ने कर दिखाया. आज समूचा देश खुशी से झूम रहा है. आखिर कंगारुओं को उन्हीं के देश में जाकर हराने का सपना जो साकार हो गया है. खेल प्रेमी जानते हैं कि विदेशी पिचों पर भारतीय टीम का प्रदर्शन कभी अच्छा नहीं रहता है. दुनिया भर में अपनी टीम की इस बात के लिए आलोचना होती है कि वह केवल अपने घर में शेर है. खासकर इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में हमारे बल्लेबाज घुटने टेक देते हैं. वहां की तेज पिचों पर हम रन नहीं बना पाते. 2018 के शुरू में दक्षिण अफ्रीका और बाद में इंग्लैंड दौरे में यह बात सच साबित हो गई. दोनों सीरीज में टीम इंडिया को पराजय स्वीकार करनी पड़ी. जीत के लिए चौथी पारी में 200 रन बनाने में भी भारतीय टीम के हाथ पांव फूलने लगते हैं लेकिन उसी विराट की टीम ने गलतियों से सबक लेते हुए आस्ट्रेलिया में बाजी पलट दी. इस विजय से टीम में नया आत्मविश्वास भी जगा है. अब विदेशी धरती पर पांच दिनों के मैचों में जीत के दरवाजे खुल गए हैं.
,   मौजूदा सीरीज इस मायने में खास है कि भारत की गेंदबाजी में पैनापन दिखा है. यह एक तथ्य है कि टेस्ट मैच जीतने के लिए विपक्षी टीम के 20 विकेट लेने होते हैं. यानी विरोधी टीम को दो बार आउट करने की जिम्मेदारी गेंदबाजों पर होती है. यह भी सही है कि विदेशी मैदानों पर स्पिन के बजाय तेज गेंदबाज अधिक कामयाब रहते हैं. कपिल देव के बाद भारत के पास स्तरीय तेज गेंदबाज का अकाल पड़ गया था. मगर, आज जसप्रीत बुमराह और मुहम्मद शमी के रूप में फास्ट बालर की बढ़िया जोड़ी हमारे पास है. आस्ट्रेलिया में इस जोड़ी की बदौलत ही हम सीरीज जीत सके हैं.
,   खासकर, बुमराह ने इतना प्रभावित किया है कि उसे विश्व का सबसे तेज गेंदबाज कहा जा रहा है. आस्ट्रेलिया के कई पूर्व क्रिकेटरों ने उसकी जमकर तारीफ की है. चार टेस्ट मैचों में बुमराह के नाम 21 विकेट हैं. दिलचस्प यह कि उसने पिछले साल ही दक्षिण अफ्रीका दौरे से अपना करियर शुरू किया है. यानी क्रिकेट के लंबे प्रारूप में खेलते हुए उसे अधिक दिन नहीं हुए हैं. भुवनेश्वर कुमार, ईशांत शर्मा, उमेश यादव और हार्दिक पांड्या ये सभी हमारी तेज गेंदबाजी को मजबूती प्रदान करते हैं. भुवनेश्वर को कोई टेस्ट मैच खेलने का मौका ही नहीं मिला. इससे जाहिर होता है कि इस विभाग में हमारी बेंच स्ट्रेंथ कितनी मजबूत है. जहां तक स्पिन विभाग की बात है तो रविचंद्रन अश्विन हमारे मुख्य स्पिनर हैं लेकिन उनकी फिटनेस चिंता की बात है. वह केवल एक टेस्ट खेल पाए. रवींद्र जडेजा को आखिरी दो टेस्ट में मौका मिला. मेलबर्न में उन्होंने पांच विकेट लेकर भारत को जिताने में अहम भूमिका निभाई. चाइनामैन गेंदबाज कुलदीप यादव को केवल सिडनी में मौका मिला और इस लड़के ने पहली पारी में कंगारुओं के पांच विकेट उखाड़ कर डंका बजा दिया. दूसरी पारी बारिश से नहीं धुली होती तो कुलदीप ने अवश्य कहर ढाया होता.
,   बल्लेबाजी में हम आस्ट्रेलिया से बीस रहे. इसका सबूत यह है कि उनकी ओर से कोई शतक नहीं लगा जबकि भारत के चेतेश्वर पुजारा ने अकेले तीन शतक जड़ डाले. पुजारा 521 रन बनाकर दोनों ही टीमों में टाप स्कोरर रहे. उन्हें मैन आफ द सीरीज चुना गया. हालांकि, धीमी बल्लेबाजी के लिए पुजारा की आलोचना भी हुई लेकिन वह जानते हैं कि उनका काम नींव मजबूत करना है और यह काम उन्होंने बखूबी किया. सिडनी में 193 रनों की शानदार पारी की वजह से पुजारा मैन आफ द मैच भी रहे. दरअसल, पुजारा की बल्लेबाजी ने दोनों टीमों में बड़ा अंतर पैदा कर दिया. मेलबर्न में उनके शतक और कप्तान विराट कोहली के साथ 170 रनों की साझेदारी ने जीत का आधार तैयार किया. बाद में बुमराह ने 6 विकेट लेकर कंगारुओं की कमर तोड़ी. जीत के बाद विराट ने पूरी टीम को इसका श्रेय दिया है. उनके बल्ले से हालांकि एक शतक ही निकला लेकिन अपने आक्रामक नेतृत्व की वजह से आज उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है वह इतिहास के रूप में दर्ज हो गया है.
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