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देवभूमि उत्तराखण्ड में भाजपा को हाफ करना चाहती है कांग्रेस

udaybhoomi 10/1/2019/span> Technology

राजकुमार शर्मा : देहरादून : देवभूमि उत्तराखंड में भीषण बर्फबारी से बढ़ी सर्द की बावजूद देश में होने वाले आम चुनाव की गर्म तपिश ने राजनैतिक दलों की गर्मी बढ़ा दी है. पिछले आम चुनाव में ‘नमो मंत्र’के सहारे राज्य की पांचों सीटों को जीत कर भाजपा ने देवभूमि को कांग्रेस मुक्त बनाने के साथ हिमालय पर कमल खिलाया था. इस चुनाव में इस राज्य में भाजपा की कांग्रेस से सीधी टक्कर होने जा रही है.
,   होने वाले चुनाव में कांग्रेस हर हालत में भाजपा को हाफ करने की रणनीति के तहत हर तरह का खेल खेलने को तैयार है. हाल में तीन राज्यों की सत्ता खोने के बाद भी भाजपा के नेता उत्तराखंड को कांग्रेस मुक्त बनाये रखने के लिए बूथ स्तर तक अपनी तैयारी को काफी मान रहे हैं. इस संसदीय आम चुनाव 2019 में जहाँ मोदी बनाम राहुल गाँधी, भाजपा बनाम कांग्रेस एवं अन्य का मुकाबला होगा, वहीं भाजपा को मोदी के पाँच साल के मनमाने फैसले नोटबन्दी, जीएसटी, राफेल डील सहित कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे मुद्दे भाजपा को भारी सिद्ध होंगे.
,   उत्तराखण्ड को कांग्रेस मुक्त बनाने के लिए जिस चाणक्य नीति से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस के दस दिग्गजों को एक साथ तोड़कर पाला बदल करा कर कांग्रेस की दीवार को दरकाकर कांग्रेस मुक्त उत्तराखण्ड बनाने का पासा फेंक कर अपनी मंशा पूरी की थी. उसी राज्य में भाजपा को हाफ करने के लिए लक्ष्य बनाकर कांग्रेस ने भाजपा को उसी के दिखाये राह पर चल कर काम करने को हरी झण्डी दे दी है. कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने इस काम को अंजाम देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत को फ्री हैण्ड करके प्रत्याशियों को संस्तुति करने का पूरा अधिकार दे रखा है. सम्भावना है कि दल बदलकर भगवा चोला धारण कर चुके बड़े कद के नेता सतपाल महाराज, विजय बहुगुणा एवं डा॰ हरक सिंह रावत पर कांग्रेस दल बदल करा कर घर वापसी के डोरे डाल रही है.
,   इस जिम्मेदारी को हरीश दा खून का घूट पीकर भी करने को तैयार है. मूलतः कांग्रेसी विजय बहुगुणा, सतपाल महाराज को भाजपा ने अपने पाले में भले ही ले लिया है. फिर भी संघ परिवार से रिश्ते के मामले में कांग्रेस से भाजपा में आए दसों नेता सम्मान पाने के मामले में लगातार घुटन महसूस कर रहे हैं. भाजपा अपने नेताओं के युवा पुत्रों को राजनीति में कदम ताल की पूरी छूट देती है, वहीं दूसरे नेताओं को वंशवाद की बात कह कर जिस तरह कोसती है उससे कांग्रेस के दिग्गज नेता विजय बहुगुणा, पुत्र साकेत के भविष्य को लेकर दिन-रात चिन्तित रहते हैं. उन्हें भाजपा की इस दोहरी मापदण्ड की नीति उन्हें दुःखी करती है. उत्तराखंड की पाँच संसदीय सीटों में पाँचों पर भाजपा का कमल 2014 में खिला, यह उनकी शानदार उपलब्धि रही है.
,   टिहरी संसदीय सीट पर टिहरी राजघराने की रानी श्रीमती माला राज लक्ष्मी शाह भाजपा की सांसद हैं. इस चुनाव में राज लक्ष्मी की शाही सोच से तंग आ चुकी भाजपा एवं उसके दिग्गज उन्हें आइना दिखा कर अब यह नहीं चलेगा बताकर किनारे लगाने का मन बना चुके हैं. इस सीट पर कांग्रेस से प्रीतम सिंह एवं किशोर उपाध्याय मजबूत दावेदार हैं. बहुगुणा परिवार ने भी इसी सीट से ताल ठोकने का मन बना रखा है. कांग्रेस में विजय ने घर वापसी की तो उन्हें ही प्रत्याशी बनाया जा सकता है. इस सीट को कांग्रेस अपनी झोली में डालने के लिए आश्वस्त है.
,   पौड़ी गढ़वाल सीट पर पिछली बार जनरल भुवन चन्द्र खण्डूरी को शानदार सफलता मिली थी. ‘खण्डूरी है जरूरी’का नारा देने वाली भाजपा उम्र की दहलीज पार करने की बात कहकर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूरी को इस बार प्रत्याशी न बनाने का संदेश प्रचारित करा रही है. नये प्रत्याशी की तलाश जारी है. भाजपा जनरल के बदले जनरल रहे व्यक्ति को प्रत्याशी बनाने पर विचार कर रही है जिसमे देश के मौजूदा थलसेना अध्यक्ष विपिन रावत को वी॰आर॰एस॰ दिला कर चुनाव लड़ाने की चर्चा लगातार बढ़ रही है. इसी क्रम में कर्नल कोठियाल एवं अनिल बनौली भी दम ठोक रहे हैं. कांग्रेस भी दाव मारने के लिए उनके नहले पर दहला देना चाहती है. इन सबके बावजूद जनरल खण्डूरी की ईमानदार छवि जनता का उनसे मोह नहीं भंग कर रही है.
,   नैनीताल संसदीय सीट से भगत सिंह कोशियारी ‘भगत दा’सांसद हैं. भगत दा भी जनरल खण्डूरी की तरह ही उम्र की दहलीज पार कर चुके हैं. उन्हें भी इस बार किनारे लगाया जाना तय है. भगत दा की पसंद से प्रत्याशी का चयन हुआ तो दा की पहली पसंद रेखा आर्या ही होगी. इस सीट से कांग्रेस अपने दिग्गज नेता, नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश को प्रत्याशी बनाएगी.
,   हरिद्वार से पूर्व मुख्यमंत्री डा॰ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’सांसद हैं. उत्तराखण्ड की शान समझी जाने वाली इस सीट पर भाजपा निशंक को राष्ट्रीय संगठनात्मक राजनीति में लगाकर मदन कौशिक को नये प्रत्याशी के रूप में पेश करना चाहती है. कौशिक या निशंक के समक्ष कांग्रेस हाई कमान निष्ठावान कांग्रेसी महन्त एवं महाराज जयराम पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी को प्रत्याशी बना सकती है. एनएसयूआई की छात्र राजनीति से उपजे ब्रह्मचारी पूर्व कुलपति उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय रहे हैं. ब्रह्मचारी को प्रत्याशी बनाने में राहुल गाँधी की गहरी रुचि है.
,   अल्मोड़ा से अजय टम्टा सांसद हैं. यह सीट अनुसूचित जाति कोटे की है. बलराज पासी इस सीट में प्रबल दोवदार हैं इस सीट पर यशपाल आर्या ने भी दावेदारी ठोक दी है. यशपाल को अगर भाजपा ने हल्के में लिया तो वे कांग्रेस में घर वापसी करके कांग्रेस प्रत्याशी हो सकते हैं. कांग्रेस ने इस चुनाव का पूरा दारोमदार अपने जानदार सिपाही ‘हर दा’‘हरीश’को दे रखा है. हरीश-प्रीतम की जोड़ी भाजपा को अपनी रणनीति से हाफ करने की डगर पर काम कर रही है. भाजपा से राम मन्दिर मुद्दे पर देवभूमि की जनता नाराज है. देवभूमि का बच्चा-बच्चा अयोध्या में राम मन्दिर के पक्ष में है. भाजपा के नमो मंत्र का असर भी कम हो रहा है. उनकी मन की बात अब जनता नहीं सुनना चाहती उसकी मंशा है कि मोदी जी को जनता के मन की बात सुननी चाहिए थी. हरीश रावत को इस चुनाव में कांग्रेस हाईकमान टम्प कार्ड की तरह पौड़ी गढ़वाल सीट से प्रयोग कर सकती है.
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