‘गुड टच’ की समझ बनी सुरक्षा की ढाल, छात्राओं को सिखाए आत्मरक्षा के गुर

-बिराज फाउंडेशन और गणेश हॉस्पिटल की पहल, चौधरी छबील दास स्कूल में हुआ जागरूकता प्रशिक्षण
-विशेषज्ञों ने समझाया-असहज स्पर्श पर चुप न रहें, भरोसेमंद व्यक्ति को तुरंत बताएं
-पिंक सेफ्टी ड्राइव के जरिए बच्चों को सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति किया जा रहा जागरूक

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। बच्चों को व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति जागरूक करने और उन्हें किसी भी अनुचित व्यवहार को पहचानने का आत्मविश्वास देने के उद्देश्य से गुरुवार को बिराज फाउंडेशन और गणेश हॉस्पिटल की ओर से पटेल नगर स्थित चौधरी छबील दास स्कूल में पिंक सेफ्टी ड्राइव के तहत जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को गुड टच और बैड टच के बीच अंतर समझाने के साथ ऐसी परिस्थितियों में खुद को सुरक्षित रखने के व्यावहारिक तरीके बताए गए। विशेषज्ञों ने छात्राओं को स्पष्ट किया कि सुरक्षा के प्रति जागरूकता छोटी उम्र से विकसित होना बेहद जरूरी है। कार्यक्रम में डॉ. मोनिशा शर्मा और डॉ. निशा ने छात्राओं से संवाद करते हुए व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।

उन्होंने सरल तरीके से समझाया कि हर स्पर्श सामान्य या स्वीकार्य नहीं होता। बच्चों को यह पहचानना आना चाहिए कि कौन-सा व्यवहार उन्हें सुरक्षित और सहज महसूस कराता है तथा कौन-सा व्यवहार असहज या अनुचित हो सकता है। छात्राओं को बताया गया कि यदि कोई व्यक्ति उन्हें किसी भी तरह से असहज महसूस कराता है तो डरने या चुप रहने के बजाय तुरंत वहां से हटना चाहिए और अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए। पिंक सेफ्टी ड्राइव के तहत आयोजित इस कार्यक्रम ने छात्राओं को व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति सजग करने के साथ उन्हें अपनी बात खुलकर रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम के माध्यम से यह भी स्पष्ट किया गया कि बच्चों की सुरक्षा केवल उनकी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार, विद्यालय और पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।

असहज व्यवहार पर चुप्पी नहीं, तुरंत आवाज उठाने की सीख
विशेषज्ञों ने छात्राओं को उनके शरीर की निजता और निजी अंगों से संबंधित जरूरी जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी प्रकार का अनुचित स्पर्श स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने छात्राओं को अपनी सीमाओं को समझने और जरूरत पडऩे पर स्पष्ट रूप से ‘नहीं’ कहने के लिए प्रेरित किया। साथ ही आपात स्थिति में घबराने के बजाय आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने और आसपास मौजूद लोगों से सहायता लेने के तरीके भी समझाए गए।

कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़े सवाल भी पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने सहज भाषा में जवाब दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों के साथ सुरक्षा से जुड़े विषयों पर खुलकर बातचीत करने से उनमें झिझक कम होती है और वे किसी असहज स्थिति में समय रहते मदद मांगने के लिए आगे आ पाते हैं। इसलिए अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका भी इस दिशा में बेहद महत्वपूर्ण है।

बिराज फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. बिराज सिंह ने बताया कि संस्था की ओर से पिंक सेफ्टी ड्राइव के साथ-साथ बच्चों के लिए विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में गुड टच-बैड टच के साथ मानसिक तनाव, मासिक धर्म स्वच्छता और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें अपने स्वास्थ्य, सुरक्षा और मानसिक मजबूती के प्रति जागरूक बनाना भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि इन जागरूकता अभियानों में गणेश हॉस्पिटल का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों के माध्यम से बच्चों को उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े विषयों की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में डर पैदा करना नहीं, बल्कि उन्हें जागरूक, आत्मविश्वासी और किसी भी असहज परिस्थिति का सामना करने के लिए सक्षम बनाना है।