- बीएड के नवप्रवेशित विद्यार्थियों को शिक्षक-शिक्षा, अनुशासन और व्यावसायिक विकास की दी गई सीख
- विशेषज्ञ वक्ता ज्योति देसवाल ने बताया शिक्षक की भूमिका का महत्व, रचनात्मक शिक्षण अपनाने को किया प्रेरित
- 8 सितंबर तक चलेंगे विविध कार्यक्रम, योग, खेल, पुस्तकालय परिचय और पूर्व छात्र संवाद होंगे आकर्षण
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। मोहन नगर स्थित मॉडर्न कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में बीएड पाठ्यक्रम सत्र 2026-27 के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए आठ दिवसीय विद्यार्थी परिचय कार्यक्रम ‘दीक्षारम्भ’ का मंगलवार को भव्य शुभारंभ हुआ। एक सितंबर से आठ सितंबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को महाविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, नियमों, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, उपलब्ध संसाधनों तथा विभिन्न शैक्षणिक और सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों से परिचित कराना है। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई। इस अवसर पर पाठ्यचर्या एवं शिक्षक विकास सहयोगी, ऋषिकुलशाला, गाजियाबाद की सुश्री ज्योति देसवाल का विशेष स्वागत किया गया। उन्होंने बीएड विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शिक्षक-शिक्षा के महत्व, एक कुशल शिक्षक की भूमिका और व्यावसायिक विकास के विभिन्न आयामों पर विस्तार से विचार रखे।
सुश्री ज्योति देसवाल ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, चरित्र और भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला मार्गदर्शक होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, नवीन शिक्षण विधियों को अपनाने, तकनीकी दक्षता विकसित करने और कक्षा में रचनात्मक तथा विद्यार्थी-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने शैक्षिक एवं व्यावसायिक अनुभव साझा करते हुए शिक्षक के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके प्रभावी समाधान के व्यावहारिक पहलुओं पर भी चर्चा की। उनका संवादात्मक और अनुभवपरक संबोधन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी रहा। इससे विद्यार्थियों को शिक्षक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों और भविष्य के व्यावसायिक विकास की दिशा को समझने में सहायता मिली।

शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों और नेतृत्व पर जोर
महाविद्यालय के सचिव विनीत गोयल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ कौशल, नैतिक मूल्य, नेतृत्व क्षमता और सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास भी जरूरी है। शिक्षक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और बीएड विद्यार्थी भविष्य के शिक्षकों के रूप में राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी निभाएंगे। प्राचार्या प्रो. (डॉ.) निशा सिंह ने स्वागत भाषण में कहा कि ‘दीक्षारम्भ’विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक वातावरण में सहजता से सामंजस्य स्थापित करने और शिक्षण-प्रशिक्षण प्रक्रिया को समझने का महत्वपूर्ण अवसर देता है। उन्होंने कहा कि शिक्षण केवल ज्ञान अर्जित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन-मूल्यों, अनुशासन, संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण के विकास का भी माध्यम है।
आठ दिन तक होंगी विविध गतिविधियां
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के लिए विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक, रचनात्मक और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें संकाय परिचय, आचार संहिता की जानकारी, पुस्तकालय परिचय, मार्गदर्शक-विद्यार्थी संवाद, परिसर भ्रमण, योग सत्र, साहित्यिक गतिविधियां, खेलों का परिचय, जीवन कौशल पर विशेषज्ञ व्याख्यान, समूह चर्चा और पूर्व छात्रों से संवाद प्रमुख हैं। इसके अलावा स्थानीय भ्रमण, मूल्य संवर्धित पाठ्यक्रमों का परिचय और विभिन्न विषयों से संबंधित पाठ्यक्रम परिचय सत्र भी होंगे।
‘दीक्षारम्भ’ विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा और शिक्षक-प्रशिक्षण की यात्रा का महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण है। कार्यक्रम उन्हें शैक्षणिक दिशा देने के साथ व्यक्तित्व विकास, व्यावसायिक दक्षता, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करने में सहायक होगा। शुभारंभ अवसर पर शिक्षा विभाग के सभी प्रवक्ता और महाविद्यालय के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन आभार एवं धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।















