जरूरतमंद बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बना नि:शुल्क एचएलए जांच शिविर

  • थैलेसीमिया और गंभीर रक्त विकारों से जूझ रहे मरीजों को मिली बड़ी राहत, 120 नमूने लिए गए
  • बोन मैरो प्रत्यारोपण की राह होगी आसान, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मिलेगा उपचार का सहारा
  • शारदा संस्थानों और पारस अस्पताल की पहल, जांच के साथ मरीजों व परिजनों को किया गया जागरूक

उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों एवं मरीजों को गंभीर रक्त संबंधी और आनुवंशिक बीमारियों के उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण जांच सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंगलवार को राजधानी लखनऊ में नि:शुल्क एचएलए जांच शिविर का आयोजन किया गया। शारदा हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा एवं शारदा केयर हेल्थसिटी के सहयोग से पारस न्यूरो-स्पाइन बहु-विशेषता अस्पताल, लखनऊ में आयोजित इस शिविर में थैलेसीमिया, सिकल सेल रोग और अन्य रक्त संबंधी विकारों से पीडि़त बच्चों एवं मरीजों के कुल 120 नमूने लिए गए। इस पहल से उन परिवारों को विशेष राहत मिली, जिनके लिए महंगी चिकित्सकीय जांच कराना आर्थिक रूप से कठिन होता है। शिविर का आयोजन बाल आयुष फाउंडेशन के सहयोग तथा थैलेसीमिया सेवा समिति के संस्थापक अविनाश सिंह और दिव्यांग सहायता केंद्र के विशेष सहयोग से किया गया।

सरस्वती पुरम, रायबरेली रोड स्थित पारस न्यूरो-स्पाइन बहु-विशेषता अस्पताल में आयोजित शिविर के दौरान मरीजों और उनके परिजनों को एचएलए जांच के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। चिकित्सकीय विशेषज्ञों ने बताया कि गंभीर रक्त विकारों से पीडि़त मरीजों के लिए आगे के उपचार की योजना तैयार करने में यह जांच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एचएलए जांच के माध्यम से बोन मैरो यानी अस्थि मज्जा अथवा स्टेम सेल प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त दाता की पहचान करने में सहायता मिलती है। विशेष रूप से थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से पीडि़त बच्चों के लिए परिवार के सदस्यों में उपयुक्त मिलान मिलने पर प्रत्यारोपण उपचार की संभावना बनती है। शिविर में इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए बच्चों के साथ उनके माता-पिता के नमूने भी लिए गए, ताकि उपयुक्त मिलान की स्थिति का पता लगाया जा सके।

जांच के साथ उपचार की राह दिखाने की पहल
प्रेस को जानकारी देते हुए शारदा केयर हेल्थसिटी एवं शारदा हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा के निदेशक, बिक्री एवं विपणन, गौरव पांडेय ने कहा कि एचएलए जांच रक्त संबंधी और आनुवंशिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के उपचार की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया तथा अन्य गंभीर रक्त विकारों के मरीजों में अस्थि मज्जा या स्टेम सेल प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त दाता के मूल्यांकन में इस जांच की अहम भूमिका होती है। शारदा केयर हेल्थसिटी के रक्त कैंसर एवं अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण विभाग के उपाध्यक्ष डॉ. पवन कुमार सिंह ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए ऐसी महंगी जांच कराना कई बार बड़ी चुनौती बन जाता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए नि:शुल्क शिविर लगाया गया, ताकि जरूरतमंद मरीजों को उपचार की अगली प्रक्रिया तक पहुंचने में आर्थिक बाधा का सामना न करना पड़े। उन्होंने बताया कि जिन बच्चों के नमूनों का उनके माता-पिता से उपयुक्त मिलान पाया जाएगा, उनके अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शारदा केयर हेल्थसिटी, ग्रेटर नोएडा में बहुत कम शुल्क अथवा पात्रता के अनुसार नि:शुल्क कराने की दिशा में सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। शिविर में 120 नमूने लिए जाने से बड़ी संख्या में बच्चों और उनके परिवारों को महत्वपूर्ण जांच का लाभ मिला। इस दौरान मरीजों और उनके परिजनों को बीमारी की प्रकृति, जांच की प्रक्रिया, संभावित उपचार विकल्पों और प्रत्यारोपण से जुड़ी आवश्यक जानकारी भी दी गई।

गंभीर बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर
शारदा केयर हेल्थसिटी एवं शारदा हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा के समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. कौसर शाह ने कहा कि शारदा संस्थान सामाजिक स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में लगातार विभिन्न पहल कर रहे हैं। थैलेसीमिया, रक्त संबंधी विकारों और अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण जैसे गंभीर उपचार क्षेत्रों में जरूरी जांच सुविधाएं और जागरूकता जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना संस्थान की प्राथमिकताओं में शामिल है। पारस न्यूरो-स्पाइन बहु-विशेषता अस्पताल, लखनऊ के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. प्रमोद चौरसिया ने कहा कि शिविर का उद्देश्य केवल नमूने एकत्र करना नहीं, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों को बीमारी तथा उपचार की पूरी प्रक्रिया के बारे में सही जानकारी उपलब्ध कराना भी है। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और सही चिकित्सकीय मार्गदर्शन गंभीर बीमारियों के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

शिविर के संचालन में संप्रति चक्रवर्ती, धर्मेंद्र मणि तिवारी, हर्षवर्धन तिवारी, प्रतीक राजपूत, सुमित श्रीवास्तव और पूनम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने मरीजों और उनके माता-पिता के पंजीकरण, मार्गदर्शन तथा आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने में सहयोग किया। वहीं गिरा अकादमिक फाउंडेशन, लखनऊ के निदेशक बलराज शर्मा की ओर से थैलेसीमिया से पीडि़त बच्चों को नि:शुल्क स्टेशनरी भी प्रदान की गई। आयोजकों ने कहा कि जरूरतमंद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और गंभीर रक्त विकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए भविष्य में भी इस प्रकार के स्वास्थ्य शिविर और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे। यह शिविर गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों के लिए जांच, परामर्श और संभावित उपचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण सहारा साबित हुआ।