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विज्ञापन में अभिनेत्री के पहनावे और कुत्ते को राखी बांधने के दृश्य पर जताई आपत्ति
भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को मनोरंजन और विज्ञापन की सनसनी का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए: तरुण मिश्र
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विज्ञापन बनाने वाली कंपनी की जिम्मेदारी भी तय हो, व्यावसायिक हितों से ऊपर होनी चाहिए सामाजिक संवेदनशीलता
उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली। रक्षाबंधन जैसे पारंपरिक और भावनात्मक पर्व के मौके पर अभिनेत्री कृति सेनन के एक ज्वैलरी विज्ञापन को लेकर शुरू हुए विवाद पर जनसेवक तरुण मिश्र ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने विज्ञापन में अभिनेत्री के पहनावे और कुत्ते को राखी बांधने के दृश्य को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी व्यावसायिक विज्ञापन में रचनात्मक स्वतंत्रता के साथ भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार रक्षाबंधन केवल एक सामान्य त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और सुरक्षा के रिश्ते का प्रतीक है।
तरुण मिश्र ने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर प्रसारित किए गए विज्ञापन को लेकर जिस तरह सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं, उससे यह स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में दर्शकों को विज्ञापन की प्रस्तुति असहज लगी। उन्होंने कहा कि किसी कलाकार के व्यक्तिगत जीवन या उसके पालतू पशु से प्रेम पर सवाल उठाना उचित नहीं है, लेकिन जब किसी पारंपरिक त्योहार को केंद्र में रखकर व्यावसायिक विज्ञापन तैयार किया जाता है तो उसके संदेश और दृश्यों को लेकर अधिक संवेदनशीलता अपेक्षित होती है।
तरुण मिश्र ने इस पूरे विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कृति सेनन और कंगना रनौत दोनों महिलाएं हैं और यदि किसी महिला कलाकार के पहनावे को लेकर राजनीतिक बहस खड़ी होती है तो उस पर प्रतिक्रिया देते समय भाषा और दृष्टिकोण में संवेदनशीलता होनी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी की ओर से इस विषय पर प्रतिक्रिया दिए जाने के संदर्भ में कहा कि यदि कांग्रेस को इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया देनी थी तो पार्टी की किसी महिला नेता के माध्यम से भी बात रखी जा सकती थी। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को सांस्कृतिक और महिला संबंधी विषयों पर प्रतिक्रिया देते समय मुद्दे को राजनीतिक रंग देने के बजाय समाज की भावनाओं और महिला सम्मान के व्यापक पक्ष को ध्यान में रखना चाहिए।
तरुण मिश्र ने कहा कि रक्षाबंधन भारतीय परिवार व्यवस्था और भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व है। आधुनिक विज्ञापन उद्योग में नए प्रयोगों की गुंजाइश जरूर है, लेकिन व्यावसायिक सफलता के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक भावनाओं की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने विज्ञापन कंपनियों और ब्रांडों से अपील की कि वे त्योहारों पर आधारित सामग्री तैयार करते समय भारतीय परंपराओं, पारिवारिक मूल्यों और समाज की संवेदनशीलता का सम्मान करें, ताकि मनोरंजन और व्यावसायिक प्रचार के साथ पर्व की गरिमा भी बनी रहे।
‘विज्ञापन में रचनात्मकता के साथ मर्यादा भी जरूरी’
तरुण मिश्र ने विज्ञापन में कृति सेनन के पहनावे पर भी आपत्ति जताते हुए कहा कि उनका सवाल अभिनेत्री के व्यक्तिगत पहनावे को लेकर नहीं, बल्कि त्योहार और विज्ञापन की प्रस्तुति को लेकर है। उन्होंने कहा कि ज्वैलरी ब्रांड अपने उत्पाद को आकर्षक तरीके से प्रस्तुत कर सकता है, लेकिन इसके लिए ऐसा प्रस्तुतिकरण जरूरी नहीं जिसमें दर्शकों को यह लगे कि भारतीय पर्व की गरिमा से समझौता किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विज्ञापन किसी भी ब्रांड की सार्वजनिक छवि बनाने का माध्यम होता है।
ऐसे में निर्माता, ब्रांड और विज्ञापन से जुड़े सभी पक्षों की जिम्मेदारी है कि वे समाज की भावनाओं को ध्यान में रखें। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी विज्ञापन की प्रस्तुति को लेकर बड़े स्तर पर आपत्ति सामने आती है और बाद में उसे हटाना पड़ता है तो प्रसारण से पहले उसकी विषयवस्तु पर पर्याप्त विचार क्यों नहीं किया गया। तरुण मिश्र ने कहा कि विज्ञापन को कंपनी द्वारा हटाया जाना अपने आप में यह दर्शाता है कि विवाद को गंभीरता से लिया गया। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल दौर में एक बार कोई सामग्री सार्वजनिक होने के बाद उसके प्रसार को पूरी तरह रोक पाना मुश्किल होता है।
‘राखी का रिश्ता भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक’
कुत्ते को राखी बांधने के दृश्य को लेकर तरुण मिश्र ने कहा कि उन्हें पशुओं से प्रेम या पालतू जानवर रखने से कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना है कि आपत्ति उस प्रतीकात्मक प्रस्तुति को लेकर है जिसमें रक्षाबंधन जैसे भाई-बहन के पारंपरिक पर्व को अलग तरीके से दिखाया गया। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में रक्षाबंधन की अपनी विशेष सांस्कृतिक और पारिवारिक पहचान है, इसलिए इस पर्व से जुड़े संदेश को प्रस्तुत करते समय उसके मूल भाव का ध्यान रखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पशु प्रेम अपनी जगह महत्वपूर्ण है और लोगों के अपने पालतू जानवरों के प्रति भावनात्मक संबंध होते हैं, लेकिन रक्षाबंधन की परंपरा को लेकर समाज की अपनी मान्यताएं और भावनाएं हैं। इसलिए किसी व्यावसायिक विज्ञापन में दोनों भावनाओं को जोड़ते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
















