-गोवंश संरक्षण को मिला आधुनिक आधार, 13 शेड, चार भूसा घर और दो सरोवर तैयार
-मॉडल गौशाला में 146 नंदी और 488 गायों की देखभाल, 29 कर्मचारियों के साथ पशु चिकित्सक तैनात
-गोबर और गोमूत्र से बनेंगे उपयोगी उत्पाद, अपशिष्ट प्रबंधन को दिया गया आधुनिक रूप
-गौशाला परिसर में लगाए गए 5,000 पौधे, पांच उद्यानों से विकसित होगा हरित वातावरण
उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। यमुना प्राधिकरण ने गोवंश के संरक्षण और बेहतर देखभाल के लिए फलैदा बांगर में करीब आठ हेक्टेयर क्षेत्र में मॉडल गौशाला तैयार की है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस गौशाला में करीब 600 गोवंश को रखने की क्षमता है। गौशाला की सुरक्षा और गोवंश की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। बुधवार को गौशाला की औपचारिक शुरुआत कर दी गई। इस दौरान यमुना अथॉरिटी के सीईओ आरके सिंह ने नवीनीकरण कार्य का निरीक्षण किया और परिसर में पौधरोपण भी किया।
गौशाला में फिलहाल 146 नंदी और 488 गाय रखी गई हैं। इनके रहने के लिए कुल 13 शेड बनाए गए हैं। गोवंश के लिए चारे की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए चार भूसा घर भी तैयार किए गए हैं। इसके अलावा परिसर में दो गोवंश सरोवर (तालाब) बनाए गए हैं। इनका उपयोग वर्षा जल संचयन के लिए भी किया जा सकेगा। इससे गौशाला में पानी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

गोबर और गोमूत्र से तैयार होंगे उपयोगी उत्पाद
मॉडल गौशाला में गोबर और गोमूत्र के बेहतर उपयोग पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए गोबर प्रसंस्करण केंद्र और जरूरी उपकरण लगाए गए हैं। यहां गोबर, खाद और गोमूत्र से विभिन्न उपयोगी उत्पाद तैयार करने की व्यवस्था की गई है। इससे गौशाला से निकलने वाले अपशिष्ट का उचित प्रबंधन करने के साथ उसे उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
गोवंश की बेहतर देखभाल के लिए गौशाला में 29 कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही एक पशु चिकित्सक और एक सहायक को भी तैनात किया गया है, ताकि बीमार या घायल पशुओं को समय पर उपचार मिल सके। किसी गोवंश की मृत्यु होने की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के तहत अंतिम संस्कार के लिए गोवंश क्रिमिनेशन सेंटर भी बनाया गया है।
रोशनी और निगरानी की भी व्यवस्था
गौशाला परिसर को रात के समय भी सुरक्षित और रोशन रखने के लिए चार हाईमास्ट लाइट और 40 स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। गोवंश की गतिविधियों और परिसर की निगरानी के लिए छह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा गर्मी के मौसम में पशुओं को राहत देने के लिए 67 पंखे लगाए गए हैं।
परिसर को हरा-भरा बनाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। गौशाला में करीब 5,000 पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा पांच उद्यान विकसित किए गए हैं। इससे गौशाला का वातावरण बेहतर होने के साथ गोवंश के लिए भी अनुकूल माहौल तैयार होगा।
ओएसडी शैलेंद्र सिंह की योजना को मिला आकार
फलैदा बांगर की इस गौशाला को मॉडल रूप देने की योजना यमुना अथॉरिटी के ओएसडी शैलेंद्र सिंह की रही है। योजना के तहत गौशाला में गोवंश के रहने, चारे, उपचार, स्वच्छता, पानी, प्रकाश, निगरानी और अपशिष्ट प्रबंधन जैसी सुविधाओं को एक ही परिसर में विकसित किया गया है। अब इस व्यवस्था को धरातल पर उतार दिया गया है। बुधवार को निरीक्षण के दौरान सीईओ आरके सिंह ने गौशाला में किए गए नवीनीकरण और उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने परिसर में पौधरोपण भी किया। इस अवसर पर एसीईओ मनीष मीणा, राजेश कुमार और शैलेन्द्र भाटिया, ओएसडी शैलेन्द्र सिंह, महराम सिंह, जीएम प्रोजेक्ट राजेंद्र भाटी, उप निदेशक उद्यान आनंद मोहन सिंह, आरती सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। यमुना अथॉरिटी की ओर से तैयार की गई इस मॉडल गौशाला का उद्देश्य गोवंश को सुरक्षित और व्यवस्थित आश्रय उपलब्ध कराने के साथ गौशाला संचालन को आधुनिक और बेहतर व्यवस्था से जोड़ना है।

















