थाने पहुंचने से पहले सुलझेंगे छोटे विवाद, पीएलवी कराएंगे मुफ्त समझौता

  • हर थाने में तैनात होंगे पैरालीगल वालंटियर, दोनों पक्षों को समझौते का देंगे मौका
  • मारपीट, घरेलू-संपत्ति विवाद से लेकर चेक अनादर तक के मामले आएंगे पीएलवी की मेज पर 

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। अदालतों में लंबित मुकदमों का बोझ कम करने और छोटे-छोटे विवादों का थाने पहुंचने से पहले ही समाधान कराने की दिशा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और पुलिस प्रशासन ने नई पहल शुरू की है। अब जिले के प्रत्येक थाने में पैरालीगल वालंटियर (पीएलवी) तैनात किए जाएंगे। गैर-गंभीर मामलों में पुलिस प्रथम दृष्टया मुकदमा दर्ज करने के बजाय दोनों पक्षों को पीएलवी के पास भेजेगी। पीएलवी दोनों पक्षों के बीच निश्शुल्क मध्यस्थता कर समझौता कराने का प्रयास करेंगे। समझौता होने पर दोनों पक्षों का राजीनामा लिखवाकर मामला समाप्त किया जा सकेगा। पुलिस लाइन स्थित परमजीत हॉल में गुरुवार को पीएलवी और मिशन शक्ति प्रभारियों की बैठक में इस व्यवस्था की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में पुलिस उपायुक्त मुख्यालय बलवंत कुमार चौधरी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नेहा बनौधिया और सहायक पुलिस आयुक्त महिला अपराध सुचिता सिंह मौजूद रहीं।

अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों और पीएलवी को जरूरतमंद महिलाओं एवं अन्य पीडि़तों को निश्शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने और उनके विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी समझाई। हत्या, डकैती, लूट और चोरी जैसे गंभीर एवं जघन्य अपराध इस व्यवस्था के दायरे से बाहर रहेंगे। ऐसे मामलों में पुलिस नियमानुसार सीधे कानूनी कार्रवाई करेगी। पुलिस उपायुक्त मुख्यालय बलवंत कुमार चौधरी ने कहा कि पीएलवी व्यवस्था का उद्देश्य छोटे और गैर-गंभीर विवादों को आपसी सहमति से शीघ्र सुलझाना है। इससे लोगों को अनावश्यक रूप से मुकदमेबाजी में जाने से राहत मिलेगी और पुलिस तथा न्यायालय दोनों पर काम का दबाव कम होगा।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नेहा बनौधिया ने कहा कि प्रत्येक जरूरतमंद व्यक्ति को निश्शुल्क विधिक सहायता और अपने अधिकारों की जानकारी मिलना जरूरी है। पीएलवी पुलिस और पीडि़त के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेंगे और जरूरतमंदों तक समयबद्ध कानूनी सहायता पहुंचाने में सहयोग करेंगे। सहायक पुलिस आयुक्त महिला अपराध सुचिता सिंह ने कहा कि विशेष रूप से महिलाओं से जुड़े घरेलू और पारिवारिक विवादों में पीएलवी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। पुलिस और पीएलवी के बेहतर समन्वय से पीडि़तों को समय पर सहायता मिलेगी और आपसी सहमति से सुलझाए जा सकने वाले विवादों का त्वरित समाधान संभव होगा।

पहले समझौते का प्रयास, नहीं माने तो मुकदमा
नई व्यवस्था के तहत किसी थाने में गैर-गंभीर विवाद की शिकायत आने पर दोनों पक्षों को पीएलवी के पास भेजा जाएगा। पीएलवी दोनों पक्षों की बात सुनकर निश्शुल्क मध्यस्थता के माध्यम से विवाद सुलझाने का प्रयास करेंगे। यदि दोनों पक्ष सहमत हो जाते हैं तो राजीनामा तैयार कराया जाएगा और मामला वहीं समाप्त किया जा सकेगा। समझौता नहीं होने की स्थिति में पुलिस नियमानुसार मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई करेगी।

पीएलवी की मेज पर मारपीट, घरेलू विवाद, संपत्ति विवाद, मकान मालिक-किराएदार विवाद, धन की वसूली, पति-पत्नी के विवाद, तलाक, बच्चों की अभिरक्षा, भरण-पोषण, बकाया वेतन, नौकरी से गलत तरीके से निकालने, सड़क दुर्घटना मुआवजा, चेक अनादर, बिजली चोरी तथा बैंक और वित्तीय लेन-देन से जुड़े विवाद लाए जा सकेंगे।