- 2041 के मास्टर प्लान में लॉजिस्टिक्स, मिक्स्ड और मल्टीपल लैंड यूज के लिए होंगे नए प्रावधान
- प्लानिंग और इंडस्ट्री विभाग ने शुरू की तैयारी, वेयरहाउसिंग भूखंडों की स्कीम लाने की योजना
- नीतियां तैयार होने के बाद खुलेंगे आवंटन के रास्ते, औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर
उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) तीन नई लैंड यूज पॉलिसी तैयार कर रहा है। वर्ष 2041 के मास्टर प्लान में लॉजिस्टिक्स, मिक्स्ड लैंड यूज और मल्टीपल लैंड यूज के लिए अलग-अलग नीतिगत प्रावधान नहीं होने के कारण अब इस दिशा में काम शुरू किया गया है। प्राधिकरण के प्लानिंग और इंडस्ट्री विभाग संयुक्त रूप से इन नीतियों को तैयार कर रहे हैं। इनके लागू होने के बाद संबंधित श्रेणियों में भूखंड आवंटन की योजनाएं लाने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।
एयरपोर्ट के आसपास तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र में माल के भंडारण, परिवहन और आपूर्ति शृंखला से जुड़ी गतिविधियों की संभावनाओं को देखते हुए प्राधिकरण लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग क्षेत्र पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसके लिए भूखंड आवंटन योजना लाने की तैयारी है। हालांकि, संबंधित भूमि उपयोग के लिए स्पष्ट नीति और नियोजन संबंधी प्रावधान तय नहीं होने के कारण अभी योजना शुरू नहीं की जा सकती। ऐसे में पहले नियमों को अंतिम रूप देने पर जोर दिया जा रहा है।
लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग के लिए बनेगी नीति
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नजदीक होने से यीडा क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग से जुड़ी इकाइयों के विकास की संभावनाएं हैं। इस क्षेत्र में सामान के भंडारण, माल ढुलाई, परिवहन और आपूर्ति शृंखला प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं। एयरपोर्ट के जरिए माल की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए ऐसे भूखंडों की मांग विकसित होने की संभावना है।
प्राधिकरण इसी जरूरत को देखते हुए लॉजिस्टिक्स लैंड यूज के लिए अलग नीति तैयार कर रहा है। नीति में भूमि के उपयोग, विकास की शर्तों और संबंधित गतिविधियों के नियोजन को लेकर प्रावधान स्पष्ट किए जाएंगे। नियम तय होने के बाद लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग के लिए भूखंड आवंटन योजना लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।
मिक्स्ड और मल्टीपल लैंड यूज के नियम भी होंगे स्पष्ट
लॉजिस्टिक्स के अलावा मिक्स्ड लैंड यूज और मल्टीपल लैंड यूज के लिए भी अलग-अलग नीतियां तैयार की जा रही हैं। इन नीतियों के जरिए संबंधित भूमि श्रेणियों में अनुमन्य गतिविधियों और विकास संबंधी शर्तों को स्पष्ट करने की तैयारी है। इससे प्राधिकरण के नियोजन ढांचे में इन श्रेणियों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्टता आएगी।
तीनों नीतियों को तैयार करने की जिम्मेदारी प्लानिंग और इंडस्ट्री विभाग को संयुक्त रूप से दी गई है। दोनों विभाग भूमि उपयोग से संबंधित जरूरतों और औद्योगिक विकास की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रावधानों पर काम कर रहे हैं। नीतियों को अंतिम रूप देने के बाद ही संबंधित योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।
नीति तैयार होने के बाद आएगी भूखंड आवंटन योजना
यीडा की योजना है कि तीनों लैंड यूज पॉलिसी को जल्द अंतिम रूप दिया जाए, ताकि इनके तहत भूखंड आवंटन की प्रक्रिया शुरू की जा सके। खासतौर पर एयरपोर्ट के आसपास लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग क्षेत्र में निवेश के अवसर विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि, आवंटन योजना कब शुरू होगी, यह नीतियों को अंतिम रूप दिए जाने और आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
यीडा के सीईओ आरके सिंह के अनुसार, तीनों लैंड यूज की नीतियां तैयार होने के बाद संबंधित योजनाएं लाई जा सकेंगी। इससे क्षेत्र में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ निवेश के नए अवसर तैयार करने में मदद मिलेगी। प्राधिकरण का यह कदम एयरपोर्ट के आसपास नियोजित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई नीतियों के जरिए भूमि उपयोग के नियम स्पष्ट होने से संबंधित क्षेत्रों में निवेश और भूखंड आवंटन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

















