- आयोजक समितियों को अग्निशमन, भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश
- सीसीटीवी, पुलिस गश्त और आपात सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। रामलीला में रावण दहन और दुर्गा पूजा आयोजनों को सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए डीसीपी ट्रांस हिंडन ऋजुल ने शुक्रवार को आयोजक समितियों के साथ गोष्ठी कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। आयोजकों की जिम्मेदारी है कि वे पुलिस और प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर सभी सुरक्षा मानकों का पालन करें, ताकि श्रद्धालुओं और दर्शकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। डीसीपी ऋजुल ने निर्देश दिए कि रामलीला और रावण दहन स्थलों पर आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं। बिजली के तारों, अस्थायी कनेक्शन और विद्युत उपकरणों की जांच कराई जाए, ताकि शॉर्ट सर्किट से हादसा न हो। आयोजन स्थल पर अग्निशमन यंत्र, रेत और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध रहें। रावण दहन के दौरान मंच और दर्शकों के बीच पर्याप्त दूरी रखी जाए तथा पुतलों की ऊंचाई निर्धारित नियमों के अनुरूप हो।

पुतलों की स्थापना से पहले आवश्यक अनुमति और तकनीकी जांच भी सुनिश्चित की जाए। डीसीपी ने कहा कि भीड़ प्रबंधन में किसी भी स्तर पर चूक नहीं होनी चाहिए। आयोजक पर्याप्त संख्या में स्वयंसेवकों की तैनाती करें, जो दर्शकों को दिशा बताने, पार्किंग संभालने और जरूरतमंदों की मदद करने में पुलिस का सहयोग कर सकें। वाहनों के लिए निर्धारित पार्किंग स्थल बनाए जाएं और एंबुलेंस, अग्निशमन वाहनों सहित आपातकालीन सेवाओं के रास्ते हर हाल में खुले रखे जाएं।
यातायात बाधित होने या जाम की स्थिति बनने पर तत्काल व्यवस्था दुरुस्त की जाए। खाद्य पदार्थों की दुकानों और अस्थायी स्टॉलों पर भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। गैस सिलेंडर, चूल्हे और बिजली से चलने वाले उपकरण सुरक्षित स्थान पर रखे जाएं। अस्थायी ढांचों और झूलों की फिटनेस तथा जरूरी अनुमतियों की जांच कराई जाए। रात के समय सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
सीसीटीवी, पुलिस गश्त और महिला सुरक्षा का रखें ध्यान
डीसीपी ऋजुल ने संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने और उन्हें लगातार चालू रखने के निर्देश दिए। संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल पुलिस को सूचना देने को कहा गया। आयोजन स्थलों के आसपास नियमित पुलिस गश्त और निगरानी रखी जाएगी, जबकि आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस और अग्निशमन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। महिला सुरक्षा और जागरूकता के लिए मिशन शक्ति तथा ऑपरेशन प्रहार से संबंधित संदेशों के प्रचार-प्रसार और बैनर-पोस्टर लगाने के निर्देश भी दिए गए।
बच्चों या परिजनों से बिछडऩे की स्थिति में सहायता के लिए खोया-पाया केंद्र सक्रिय रखने को कहा गया। साथ ही साफ-सफाई, कचरे के उचित निस्तारण और लाउडस्पीकर के निर्धारित समय व ध्वनि सीमा के पालन पर जोर दिया गया। डीसीपी ट्रांस हिंडन ऋजुल ने आयोजक समितियों से अपील की कि वे सुरक्षा व्यवस्था को औपचारिकता न समझें और प्रत्येक निर्देश का गंभीरता से पालन करें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोजन की सफलता तभी मानी जाएगी, जब श्रद्धालुओं की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त रहे। सभी समितियां पुलिस-प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर जिम्मेदारी से काम करें, ताकि त्योहार शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सकें।

















