धरनास्थल के पास किसान ने खुदकुशी की

सुसाइड नोट में लिखा, बेकार न जाए शहादत

नई दिल्ली। नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत एक और किसान ने शनिवार को खुदकुशी कर ली। किसान का शव धरनास्थल के पास शौचालय में फंदे पर लटका मिला। इससे एकाएक सनसनी फैल गई। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रारंभिक जांच-पड़ताल के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। नए कृषि कानूनों के विरोध में पिछले 38 दिन से दिल्ली के सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन चल रहा है। केंद्र सरकार के साथ कई दौर की वार्ता के बावजूद समस्या का समाधान नहीं निकल पाया है। इस बीच गाजीपुर बॉर्डर पर किसान कश्मीर सिंह निवासी रामपुर (उत्तर प्रदेश) ने फांसी लगाकर जान दे दी। शनिवार की सुबह कश्मीर का शव धरनास्थल के पास शौचालय में मिलने से हड़कंप मच गया। कश्मीर सिंह ने आत्महत्या से पहले सुसाइड नोट भी छोड़ा है। सुसाइड नोट में उन्होंने किसान आंदोलन के संबंध में अपील भी लिखी है। सुसाइड नोट में लिखा है कि उनकी शहादत बेकार ना जाए। कश्मीर ने यह भी लिखा है कि उनका अंतिम संस्कार दिल्ली-यूपी की सीमा पर किया जाए। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर जाकर तफ्तीश की। बाद में शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। बता दें कि गाजीपुर सीमा पर शुक्रवार को बागपत जनपद के भगवानपुर नांगल गांव निवासी मोहर सिंह (57) को धरनास्थल पर दिल का दौरा पड़ा था। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया। यहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। आंदोलन के दौरान अब तक 40 से ज्यादा किसानों की जान जा चुकी है। उधर, भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन के दरम्यान जिन किसानों की मृत्यु हो गई, उन्हें शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए। किसा आंदोलन में भाकियू कार्यकर्ता बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।