वरिष्ठ नागरिक अकेले नहीं, हर कदम पर गाजियाबाद पुलिस आपके साथ

  • आपका अनुभव हमारी विरासत, सुरक्षा और सम्मान हमारी जिम्मेदारी: जे. रविंद्र गौड
  • मुख्यालय पर केंद्रीय वरिष्ठ नागरिक प्रकोष्ठ, हर थाने में उपनिरीक्षक के साथ महिला पुलिसकर्मी की तैनाती
  • भटककर दिल्ली बॉर्डर पहुंचे 85 वर्षीय बुजुर्ग को पुलिस ने सी-प्लान से तलाशकर परिवार से मिलाया

    उदय भूमि संवाददाता
    गाजियाबाद। उम्र के इस पड़ाव पर वरिष्ठ नागरिकों को केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि भरोसे, संवेदनशीलता और समय पर सहयोग की भी जरूरत होती है। इसी सोच के साथ कमिश्नरेट गाजियाबाद पुलिस ने वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और सेवा के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था लागू की है। पुलिस का प्रयास है कि बुजुर्गों को अपनी समस्या लेकर बार-बार थाने या पुलिस कार्यालय आने की जरूरत न पड़े, बल्कि जरूरत पडऩे पर पुलिस स्वयं उनके द्वार तक पहुंचे और उनकी समस्याओं को समझकर समाधान का प्रयास करे। पुलिस आयुक्त जे. रविंद्र गौड ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज के अनुभव, संस्कार और मूल्यों की अमूल्य धरोहर हैं। उनकी सुरक्षा और सम्मान केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पुलिस का स्पष्ट संदेश है- आपका अनुभव हमारी विरासत है, आपकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी।  बदलते सामाजिक और पारिवारिक परिवेश में वरिष्ठ नागरिकों के सामने सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। बढ़ते शहरीकरण और संयुक्त परिवारों की जगह छोटे परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति के बीच कई बुजुर्ग अकेले रह रहे हैं। ऐसे में पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ संवाद, मार्गदर्शन और व्यक्तिगत संपर्क पर भी जोर दिया है।

मुख्यालय पर केंद्रीय प्रकोष्ठ, थानों में विशेष व्यवस्था
वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित मामलों की निगरानी के लिए पुलिस आयुक्त कार्यालय में केंद्रीय वरिष्ठ नागरिक प्रकोष्ठ स्थापित किया गया है। इसका नेतृत्व निरीक्षक स्तर के अधिकारी द्वारा किया जा रहा है। प्रकोष्ठ थाना स्तर की पुलिस के साथ समन्वय करने, मामलों की निगरानी और कार्रवाई का फॉलोअप करने के साथ वरिष्ठ नागरिकों से लगातार प्रतिक्रिया भी लेता है। हर थाने में एक उपनिरीक्षक को वरिष्ठ नागरिक सहायता डेस्क का प्रभारी बनाया गया है। इसके अलावा महिला वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनने के लिए महिला आरक्षी या महिला मुख्य आरक्षी को भी नामित किया गया है।

इस व्यवस्था के माध्यम से शिकायतों की सुनवाई से लेकर आवश्यक पुलिस कार्रवाई तक लगातार निगरानी की जा रही है। पुलिस टीम वरिष्ठ नागरिकों के घर पहुंचकर उनकी सुरक्षा संबंधी जरूरतों की जानकारी भी लेती है। पार्क, बाजार और सार्वजनिक स्थानों पर चौपाल व जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से साइबर अपराध, धोखाधड़ी, अजनबियों से सावधानी तथा घरेलू सहायकों और अन्य सेवा प्रदाताओं के सत्यापन को लेकर भी जागरूक किया जा रहा है। वरिष्ठ नागरिकों को पुलिस हेल्पलाइन 18001800060 और राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन 14567 की जानकारी भी दी जा रही है।

भटक गए 85 वर्षीय बुजुर्ग को परिवार से मिलाया
गाजियाबाद पुलिस की इस संवेदनशील पहल का उदाहरण 10 सितंबर को उस समय सामने आया, जब हरदोई निवासी 85 वर्षीय राम भजन दिल्ली बॉर्डर क्षेत्र में अपने बेटे के पास रहते हुए रात में टहलने निकले और रास्ता भटक गए। अंकुर विहार वरिष्ठ नागरिक प्रकोष्ठ और चीता मोबाइल-44 की टीम ने बुजुर्ग को असहाय स्थिति में देखा और उनसे उनके परिवार के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया। वह मोबाइल नंबर या पता नहीं बता पा रहे थे। पुलिस ने सी-प्लान एप के माध्यम से उनके मूल निवास हरदोई से संबंधित जानकारी खंगाली और उनके भाई रामपाल का संपर्क नंबर प्राप्त किया।

इसके बाद पुलिस ने परिवार से संपर्क कर बुजुर्ग के बेटे सत्यदेव से संपर्क स्थापित किया और राम भजन को सकुशल उनके परिवार से मिलाया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बुजुर्ग को परिवार से मिलाने के बाद मिले आशीर्वाद और संतुष्टि ने पुलिसकर्मियों को और अधिक संवेदनशीलता के साथ काम करने की प्रेरणा दी। पुलिस आयुक्त ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी की जा रही है और वरिष्ठ अधिकारी समय-समय पर इसकी समीक्षा करते हैं। सहायक पुलिस आयुक्त, अपर पुलिस उपायुक्त और पुलिस उपायुक्त स्तर के अधिकारी व्यवस्था का पर्यवेक्षण करते हैं, जबकि पुलिस आयुक्त स्वयं भी इसकी निगरानी करते हैं।

जे. रविंदर गौड़
पुलिस आयुक्त

वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा हमारे लिए केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और सम्मान का विषय है। हमारा प्रयास है कि कोई भी बुजुर्ग खुद को अकेला महसूस न करे। जरूरत की घड़ी में गाजियाबाद पुलिस उनके साथ खड़ी मिले और हर संभव सहायता तत्काल उपलब्ध कराए। वरिष्ठ नागरिकों का विश्वास हमारी सबसे बड़ी ताकत है। सी बुजुर्ग को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाना पुलिस के लिए केवल एक कार्रवाई नहीं, बल्कि मानवीय जिम्मेदारी निभाने का अवसर है। कमिश्नरेट गाजियाबाद में वरिष्ठ नागरिकों के लिए शुरू की गई व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाएगा, ताकि जरूरत के समय उन्हें तत्काल पुलिस सहायता मिल सके और उन्हें यह भरोसा रहे कि वे किसी भी परिस्थिति में अकेले नहीं हैं।
-जे. रविंद्र गौड
पुलिस आयुक्त
कमिश्नरेट गाजियाबाद पुलिस