- कंपनी बनाकर प्राकृतिक रेशों से बने उत्पादों को वैश्विक पटल पर पहुंचा रहे
- एक्सपो मार्ट में लगे फेयर में कंपनी के उत्पाद बने विदेशी खरीदारों की पसंद
- प्राकृतिक रेशों के कालीनों की विदेशों में बढ़ी मांग
उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण रोजगार और भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने के विजन के साथ पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. अरुण वीर सिंह की पहल अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बना रही है। उनके द्वारा स्थापित फाइबर एन लूम कंपनी प्राकृतिक रेशों से हस्तनिर्मित कालीन तैयार कर भारतीय पारंपरिक हुनर को नई दिशा दे रही है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपोमार्ट में आयोजित आईएचजीएफ दिल्ली फेयर ऑटम-2026 में कंपनी के उत्पाद विदेशी खरीदारों के आकर्षण का केंद्र बने हैं।डॉ. अरुण वीर सिंह का उद्देश्य केवल कारोबार का विस्तार करना नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग, पारंपरिक कला का संरक्षण और ग्रामीण कारीगरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। वर्ष 1987 बैच के पूर्व आईएएस अधिकारी ने इसी सोच के साथ वर्ष 2036 तक उत्पादन प्रक्रिया में शून्य कार्बन उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

प्राकृतिक रेशों से तैयार हो रहे पर्यावरण अनुकूल कालीन
फाइबर एन.लूम के उत्पादों में जलकुंभी, जूट, सिसल, समुद्री घास, एलोवेरा, भांग, कपास, ऊन और केनाफ जैसे प्राकृतिक रेशों का इस्तेमाल किया जाता है। कंपनी के अनुसार, कालीनों की प्राकृतिक बनावट और मूल रंग बरकरार रखने के लिए कृत्रिम रंगों, ब्लीच और रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल से परहेज किया जाता है। इनका उपयोग घरों, कार्यालयों और रेस्तरां की सजावट में किया जा सकता है। उत्पादों के पुनर्चक्रण और दोबारा इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

200 महिलाओं को मिला रोजगार
डॉ. सिंह के विजन में ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तीकरण भी अहम हैं। वर्तमान में करीब 200 महिलाएं इस पहल से जुड़ी हैं। कालीनों का उत्पादन भदोही और सीतापुर में हो रहा है, जबकि फतेहपुर सीकरी में नया केंद्र खोलने की योजना है। कंपनी बुनकरों को लाभांश में भागीदार बनाने की दिशा में भी काम कर रही है, ताकि उन्हें उत्पादन के साथ कारोबार की सफलता का लाभ मिल सके।
जापान और मैक्सिको से मिले ऑर्डर
कंपनी के प्राकृतिक कालीन ग्रीस, चिली, अमेरिका और रूस समेत कई देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। दिल्ली फेयर में जापान और मैक्सिको के खरीदारों से बड़े ऑर्डर मिलने की जानकारी दी गई है। कंपनी का लक्ष्य पर्यावरण अनुकूल उत्पादन के साथ भारतीय हस्तशिल्प को वैश्विक बाजार में स्थापित करना और वर्ष 2047 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में योगदान देना है।

















