जेवर एयरपोर्ट की राह होगी आसान, 2086 करोड़ से बनेगा लिंक एक्सप्रेसवे का 24.5 किमी हिस्सा

  • यमुना अथॉरिटी क्षेत्र में निर्माण का ठेका एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मिला, तीन साल में काम पूरा करने का लक्ष्य
  • 74.4 किलोमीटर लंबा होगा जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, दो कंपनियां करेंगी निर्माण
  • गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे के बीच बनेगा सीधा संपर्क, एयरपोर्ट तक पहुंचना होगा आसान

उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंच को और सुगम बनाने की दिशा में जेवर लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना ने महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। 74.4 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है। यमुना अथॉरिटी के क्षेत्र में आने वाले 24.5 किलोमीटर हिस्से के निर्माण का ठेका एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को दिया गया है। कंपनी करीब 2086 करोड़ रुपये की लागत से इस हिस्से का निर्माण करेगी। निर्माण कार्य पूरा करने के लिए तीन साल का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। शेष हिस्से का निर्माण दूसरी कंपनी करेगी। इस परियोजना के पूरा होने से जेवर एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए एक और महत्वपूर्ण मार्ग उपलब्ध होगा। साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों को भी एयरपोर्ट से बेहतर सड़क संपर्क मिल सकेगा।

जेवर लिंक एक्सप्रेसवे बुलंदशहर के स्याना क्षेत्र से शुरू होकर यमुना एक्सप्रेसवे पर सेक्टर-21 में प्रस्तावित फिल्म सिटी के नजदीक जुड़ेगा। इसकी कुल लंबाई 74.4 किलोमीटर निर्धारित की गई है। परियोजना को दो हिस्सों में बांटकर निर्माण कराया जाएगा। यमुना अथॉरिटी के क्षेत्र में आने वाले 24.5 किलोमीटर हिस्से का निर्माण एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड करेगी। इसके लिए कंपनी को करीब 2086 करोड़ रुपये का ठेका मिला है। कंपनी के प्रबंध निदेशक एस. परमशिवन ने परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने की बात कही है।

परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण और खरीद की प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। यमुना अथॉरिटी अपने क्षेत्र में एक्सप्रेसवे के लिए करीब 92 प्रतिशत जमीन खरीद चुकी है। शेष जमीन की खरीद भी जल्द पूरी करने की तैयारी है। अथॉरिटी के एसीईओ राजेश कुमार के मुताबिक, परियोजना के लिए अधिकांश जमीन उपलब्ध हो चुकी है और बाकी जमीन की प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। जमीन की उपलब्धता इस परियोजना के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहलू है।

छह लेन का होगा एक्सप्रेसवे, भविष्य में आठ लेन तक विस्तार की सुविधा
जेवर लिंक एक्सप्रेसवे छह लेन का ग्रीनफील्ड और एक्सेस-कंट्रोल्ड मार्ग होगा। इसे इस तरह विकसित किया जाएगा कि मुख्य मार्ग पर यातायात का संचालन सुगम और व्यवस्थित रहे। भविष्य में वाहनों का दबाव बढऩे पर इसे आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इस व्यवस्था से आने वाले वर्षों में बढ़ती यातायात जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा लाभ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचने वाले यात्रियों और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेगा।

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना सिटी के लोगों को एयरपोर्ट जाने के लिए बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध होगा। इसके अलावा बुलंदशहर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों के लिए भी यह मार्ग उपयोगी साबित होगा। एक्सप्रेसवे के बनने से क्षेत्रीय यातायात को एक नया विकल्प मिलेगा और एयरपोर्ट तक पहुंचने में मौजूदा मार्गों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलेगी।

गंगा-यमुना एक्सप्रेसवे जुड़ेंगे, औद्योगिक विकास को मिलेगी रफ्तार
जेवर लिंक एक्सप्रेसवे की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसके माध्यम से गंगा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे के बीच सीधा सड़क संपर्क स्थापित होगा। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचना आसान होगा। साथ ही माल ढुलाई और परिवहन के लिए भी बेहतर मार्ग उपलब्ध होगा। औद्योगिक इकाइयों और कारोबारियों को अपने उत्पादों को विभिन्न बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिल सकेगी।

यमुना अथॉरिटी क्षेत्र में विकसित हो रहे औद्योगिक सेक्टरों, लॉजिस्टिक्स हब और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी यह एक्सप्रेसवे महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। बेहतर सड़क संपर्क होने से कच्चे माल की आपूर्ति, तैयार उत्पादों की ढुलाई और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है। एयरपोर्ट के आसपास विकसित हो रहे औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों को भी इससे लाभ मिल सकता है।

परियोजना के पूरा होने के बाद जेवर एयरपोर्ट केवल नोएडा और ग्रेटर नोएडा ही नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से के लिए भी अधिक सुलभ हो सकेगा। गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे के बीच संपर्क मजबूत होने से क्षेत्र में आवागमन और परिवहन व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। ऐसे में जेवर लिंक एक्सप्रेसवे को एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी के साथ-साथ क्षेत्रीय औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिहाज से भी अहम परियोजना माना जा रहा है।