- नवरात्रि में नारी शक्ति का गुणगान, दशहरे पर सत्य और धर्म की विजय का संदेश
- मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की मनमोहक प्रस्तुति से विद्यार्थियों ने दिखाई भारतीय संस्कृति की झलक
- रावण वध, सीता चरित्र और गरबा संध्या बनी उत्सव की खास आकर्षण
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। प्रताप विहार स्थित गौतम पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शनिवार को नवरात्रि और दशहरा का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। विद्यालय परिसर माता रानी के जयकारों, भक्ति गीतों और रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों से सराबोर नजर आया। विद्यार्थियों ने मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की मनमोहक प्रस्तुतियों, गरबा-डांडिया नृत्य और रामायण पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की सुंदर झलक प्रस्तुत की। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को नारी शक्ति, साहस, सत्य, मर्यादा और बुराई पर अच्छाई की विजय के महत्व से परिचित कराना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्या पूनम गौतम, निदेशक आशीष गौतम, उपप्रधानाचार्या तनुजा और एकेडमिक हेड चेतन शर्मा ने मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के स्मरण और पूजन के साथ किया। विद्यार्थियों ने देवी के विभिन्न रूपों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से शक्ति, साहस, करुणा, धैर्य और सकारात्मकता का संदेश दिया गया।

विद्यालय की प्रधानाचार्या पूनम गौतम ने कहा कि नवरात्रि हमें नारी शक्ति, साहस और आत्मविश्वास का सम्मान करना सिखाती है, जबकि दशहरा सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं को करीब से समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने विद्यार्थियों से नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने और महिलाओं के प्रति सम्मान की भावना बनाए रखने का आह्वान किया। विद्यालय के निदेशक आशीष गौतम ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम विद्यार्थियों में संस्कार, रचनात्मकता, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। उन्होंने बच्चों को सकारात्मक विचार अपनाने, बुराइयों का त्याग करने और अच्छाई के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।

प्रधानाचार्या तनुजा ने कहा कि नवरात्रि और दशहरा जैसे पर्व विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। मां दुर्गा के नौ स्वरूप नारी शक्ति, साहस और आत्मविश्वास की प्रेरणा देते हैं, जबकि भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देता है। विद्यालय में ऐसे आयोजनों का उद्देश्य बच्चों को किताबी शिक्षा के साथ संस्कारवान बनाना और उनमें महिलाओं के प्रति सम्मान, आपसी सहयोग तथा बुराई पर अच्छाई की विजय की भावना विकसित करना है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखकर प्रसन्नता हुई और ऐसे कार्यक्रम उनके सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

एकेडमिक हेड चेतन शर्मा ने भी विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों और उत्साह की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्यक्रम का समापन माता रानी के जयकारों और मंगलकामनाओं के साथ हुआ। नवरात्रि और दशहरे का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए भक्ति, ज्ञान, संस्कृति और मनोरंजन का सुंदर संगम बना। उत्सव ने सभी को नारी सम्मान, सद्भाव और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया।
मां दुर्गा की आराधना और गरबा-डांडिया ने बांधा समां
नवरात्रि उत्सव के दौरान विद्यालय में विभिन्न रचनात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। रावण फेस मेकिंग, दुर्गा फेस मेकिंग, डांडिया मेकिंग, स्वस्तिक मेकिंग और मां दुर्गा की आकृति निर्माण जैसी गतिविधियों में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा और रचनात्मक सोच का प्रदर्शन करते हुए धार्मिक प्रतीकों के महत्व को समझा। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण मां दुर्गा की आराधना के लिए आयोजित भव्य कीर्तन और गरबा संध्या रही।
भक्तिमय भजनों और माता रानी के जयकारों से विद्यालय परिसर गूंज उठा। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने पारंपरिक परिधान पहनकर गरबा और डांडिया नृत्य में उत्साहपूर्वक भाग लिया। रंग-बिरंगे परिधानों, पारंपरिक संगीत और भक्तिमय माहौल ने उत्सव को यादगार बना दिया। इस दौरान विद्यार्थियों ने भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं के प्रति अपनी रुचि और उत्साह का परिचय दिया।
सीता चरित्र और रावण वध से दिया धर्म की विजय का संदेश
दशहरा उत्सव के अंतर्गत विद्यार्थियों ने भगवान श्रीराम के जीवन, माता सीता के चरित्र और रामायण के आदर्शों पर आधारित प्रस्तुतियां दीं। सीता चरित्र और रावण वध कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे। विद्यार्थियों ने अपने अभिनय और प्रस्तुतियों के माध्यम से सत्य, मर्यादा, त्याग और धर्म के महत्व को दर्शाया।
कार्यक्रम के जरिए यह संदेश दिया गया कि अहंकार, अन्याय और बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंतत: सत्य और धर्म की ही विजय होती है। विद्यार्थियों ने रामायण के प्रसंगों के माध्यम से जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाने और गलत कार्यों से दूर रहने की प्रेरणा दी। शिक्षकों ने भी बच्चों को पर्वों के सांस्कृतिक और नैतिक महत्व से परिचित कराया।

















