-सीबीएसई की पहल के तहत जिला स्तरीय कार्यशाला में 15 विद्यालयों के शिक्षकों ने किया प्रतिभाग
-केडीबी पब्लिक स्कूल में विशेषज्ञों ने केस स्टडी और नवाचारी शिक्षण के जरिए समझाया एआई का इस्तेमाल
-गणित समेत विभिन्न विषयों में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग को शामिल करने पर हुआ गहन मंथन
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। बदलते तकनीकी दौर में विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने और शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से सोमवार को कविनगर स्थित के.डी.बी. पब्लिक स्कूल, ओल्ड कवि नगर में सोमवार को कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (सीटी) एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) विषय पर जिला स्तरीय विचार-विमर्श एवं एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। सीबीएसई की प्रशिक्षण अधिसूचना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला में जिले के 15 प्रतिष्ठित विद्यालयों से आए शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्या निवेदिता राणा, उप-प्रधानाचार्या नम्रता दूबे, विद्यालय के समस्त कोऑर्डिनेटर एवं शिक्षकों की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। प्रधानाचार्या ने विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों का स्वागत करते हुए कहा कि तकनीक के तेजी से बदलते दौर में शिक्षण व्यवस्था को भी नई सोच और आधुनिक तकनीकों के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की समझ विकसित करने के साथ इन अवधारणाओं को विभिन्न विषयों के शिक्षण-अधिगम से जोडऩा रहा।
विशेषज्ञों ने विभिन्न सत्रों, केस स्टडी और नवाचारी शिक्षण अभ्यासों के माध्यम से शिक्षकों को सीटी एवं एआई के व्यावहारिक और प्रभावी प्रयोग की जानकारी दी। कार्यशाला में शिक्षकों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि कम्प्यूटेशनल थिंकिंग केवल कंप्यूटर विज्ञान तक सीमित अवधारणा नहीं है, बल्कि इसे गणित, विज्ञान, भाषा और अन्य विषयों के शिक्षण में भी प्रभावी ढंग से शामिल किया जा सकता है। शिक्षकों ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से विद्यार्थियों में समस्या समाधान, तार्किक सोच और रचनात्मक क्षमता विकसित करने के तरीकों पर चर्चा की। कार्यशाला के प्रमुख विषयों में ‘गणनात्मक सोच और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तत्परता की आधारशिला के रूप में गणित’ तथा माध्यमिक स्तर पर विभिन्न विषयों के बीच अंतरविषयी संबंध और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग जैसे विषय शामिल रहे। कार्यशाला के दौरान विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों ने अपने नवीन शिक्षण-अभ्यास और विषय आधारित केस स्टडी प्रस्तुत की। शिक्षकों ने अपने अनुभवों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार तकनीकी संसाधनों और एआई आधारित तरीकों को शिक्षण प्रक्रिया में शामिल करके विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता को और प्रभावी बनाया जा सकता है।

कार्यशाला में प्रस्तुत केस स्टडी में से तीन उत्कृष्ट केस स्टडी विशेष रूप से सराही गईं। इनमें के.डी.बी. पब्लिक स्कूल, कवि नगर की निधि भोला, सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल की ट्विंकल शर्मा तथा इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल, प्रताप विहार की प्रगति चौधरी द्वारा प्रस्तुत केस स्टडी शामिल रहीं। इन शिक्षकों ने कम्प्यूटेशनल थिंकिंग एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों को अपनाने से जुड़े अपने प्रयासों और अनुभवों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उत्कृष्ट केस स्टडी प्रस्तुत करने वाले शिक्षकों के प्रयास की कार्यशाला में मौजूद सभी शिक्षकों ने सराहना की। प्रस्तुतियों के दौरान शिक्षकों ने एक-दूसरे के नवीन प्रयोगों से सीखने और उन्हें अपनी कक्षाओं में लागू करने की संभावनाओं पर भी विचार साझा किए। एक दिवसीय कार्यशाला ने शिक्षकों को तकनीकी एवं रचनात्मक शिक्षण पद्धतियों से जोडऩे के साथ शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका को समझने का अवसर प्रदान किया।
कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें समस्या समाधान, तार्किक चिंतन, रचनात्मकता और तकनीकी दक्षताओं से भी सुसज्जित किया जाना आवश्यक है। कार्यशाला में शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी ने इसे ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान का प्रभावी मंच बनाया। विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को बदलते शैक्षिक परिवेश के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही इनके माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी और शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की दिशा में भी मजबूत आधार तैयार होता है। के.डी.बी. पब्लिक स्कूल में आयोजित यह जिला स्तरीय कार्यशाला शिक्षकों के लिए आधुनिक तकनीक, नवाचार और रचनात्मक शिक्षण को समझने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हुई।

















