-संदिग्ध दस्तावेजों पर डीएम की पैनी नजर, सत्यापन में सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा
-सरकारी व्यवस्था में सेंध की कोशिश पर तत्काल हुआ एक्शन, जिम्मेदारों के खिलाफ शुरू हुई कानूनी कार्रवाई
उदय भूमि संवाददाता
कानपुर देहात। सरकारी कार्यों और नियुक्ति प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों के सहारे प्रवेश की कोशिश का मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी कपिल सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए चार फर्मों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कराई है। बेसिक शिक्षा विभाग में मानवशक्ति आउटसोर्सिंग सेवाओं के माध्यम से नियुक्ति से संबंधित पत्रावली में प्रस्तुत बैंक की ईएमडी और एफडीआर संदिग्ध पाए जाने पर जिलाधिकारी ने तत्काल उनका सत्यापन कराने के निर्देश दिए। जांच में चारों फर्मों की ओर से प्रस्तुत बैंक दस्तावेज फर्जी और कूटरचित पाए गए। इसके बाद चारों फर्मों को सरकारी ई-मार्केट पोर्टल पर प्रतिबंधित करने के साथ उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मामला बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़ा है। मानवशक्ति आउटसोर्सिंग सेवाओं के माध्यम से नियुक्ति के संबंध में अनुमोदन के लिए पत्रावली जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। पत्रावली के साथ विभिन्न फर्मों की ओर से बैंक ईएमडी और एफडीआर से संबंधित दस्तावेज लगाए गए थे।
दस्तावेजों को देखने के दौरान जिलाधिकारी कपिल सिंह को इनमें कुछ गड़बड़ी की आशंका हुई। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए केवल दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय उनकी वास्तविकता की जांच कराने का फैसला किया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्यों, निविदाओं, नियुक्ति प्रक्रियाओं अथवा किसी अन्य शासकीय प्रक्रिया में फर्जी या कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी कपिल सिंह ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि दस्तावेजों की जांच पूरी गंभीरता से की जाए और किसी भी स्तर पर संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर तत्काल उच्चाधिकारियों को अवगत कराते हुए नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जिलाधिकारी की सख्त कार्यशैली का असर इस मामले में भी साफ दिखाई दिया। संदिग्ध दस्तावेजों पर केवल विभागीय स्तर की औपचारिक जांच तक मामला सीमित नहीं रखा गया, बल्कि सत्यापन कराकर फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद जेम पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने एवं एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की गई। प्रशासन ने साफ किया है कि शासकीय व्यवस्था में फर्जी दस्तावेजों के जरिए प्रवेश करने की कोशिश करने वाले किसी भी फर्म या व्यक्ति को संरक्षण नहीं दिया जाएगा।
डीएम के निर्देश पर बैंक दस्तावेजों का कराया सत्यापन
जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला अग्रणी प्रबंधक तथा उपायुक्त, राज्य कर के माध्यम से संबंधित बैंक दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान चार फर्मों की ओर से प्रस्तुत बैंक ईएमडी और एफडीआर वास्तविक नहीं पाए गए। जांच में मैसर्स वीवर्सॉफ्ट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ, मैसर्स एसबीएनके एंटरप्राइजेज, लखनऊ, मैसर्स एएस इंफ्राटेक, गोमती नगर विस्तार, लखनऊ और मैसर्स गंगोत्री मैनपावर एंड सिक्योरिटी एजेंसी, मेरठ रोड, करनाल द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज फर्जी और कूटरचित पाए गए। फर्जी दस्तावेज सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने मामले में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को संबंधित चारों फर्मों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकारी विभागों से जुड़े कार्यों और नियुक्ति जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में दस्तावेजों की सत्यता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
चारों फर्मों पर दोहरी कार्रवाई, प्रतिबंध के साथ एफआईआर
जिलाधिकारी के निर्देशों के अनुपालन में चारों फर्मों को सरकारी ई-मार्केट पोर्टल पर प्रतिबंधित करने की कार्रवाई की गई। इसके साथ ही फर्जी और कूटरचित बैंक दस्तावेज प्रस्तुत करने के मामले में संबंधित फर्मों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर दी गई है। पुलिस और संबंधित विभागों की ओर से मामले में आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई को सरकारी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जिलाधिकारी की सतर्कता के चलते फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी प्रक्रिया में आगे बढऩे की कोशिश समय रहते पकड़ में आ गई।

















