ग्रेटर नोएडा: जेवर लिंक एक्सप्रेसवे की निर्माण एजेंसी पर कैबिनेट की मुहर, तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य

-गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा 74.3 किमी लंबा लिंक एक्सप्रेसवे, यमुना अथॉरिटी ने खरीदी 92 प्रतिशत जमीन

उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की दिशा में जेवर लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना ने एक और कदम आगे बढ़ाया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में इस परियोजना के दोनों पैकेजों के लिए निर्माण एजेंसी के चयन को मंजूरी दे दी गई। करीब 74.3 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे यमुना एक्सप्रेसवे के पास सेक्टर-21 की प्रस्तावित फिल्म सिटी के नजदीक से शुरू होकर बुलंदशहर के स्याना क्षेत्र के पास गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। परियोजना के पूरा होने से नोएडा एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।

जेवर लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की ओर से कराया जाएगा। परियोजना को इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मॉडल पर विकसित किया जाएगा। इसे दो पैकेज में बांटा गया है। पहला पैकेज 24.467 किलोमीटर लंबा होगा, जो गौतमबुद्ध नगर के भाईपुर ब्रह्मनान से बुलंदशहर के बीचीछुआला तक बनेगा। वहीं, दूसरा पैकेज करीब 50 किलोमीटर का होगा, जो बीचीछुआला से बुलंदशहर के स्याना क्षेत्र तक जाएगा। दोनों पैकेजों का निर्माण करीब तीन वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसी पांच वर्ष तक एक्सप्रेसवे के अनुरक्षण की जिम्मेदारी भी संभालेगी।

परियोजना के लिए जमीन खरीदने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। यमुना प्राधिकरण को अपने क्षेत्र में एक्सप्रेसवे के लिए करीब 740 एकड़ जमीन खरीदनी है। इसमें से लगभग 92 प्रतिशत जमीन खरीदी जा चुकी है। शेष जमीन की खरीद के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन भूखंडों की है, जहां मकान बने हुए हैं और जिन्हें एक्सप्रेसवे निर्माण के लिए हटाने या स्थानांतरित करने की जरूरत है। इन मकानों का मूल्यांकन लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से कराया गया है। मूल्यांकन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, ताकि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो सके और निर्माण कार्य में बाधा न आए।

जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के बनने से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और गंगा एक्सप्रेसवे के बीच सीधा संपर्क विकसित होगा। इससे नोएडा-ग्रेटर नोएडा के अलावा बुलंदशहर, स्याना और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दूसरे क्षेत्रों के लोगों को भी लाभ मिलने की संभावना है। बेहतर सड़क संपर्क से यात्रियों की आवाजाही के साथ माल परिवहन को भी सुविधा मिल सकती है। इसके अलावा एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिलेगी।

कैबिनेट बैठक में जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के अलावा तीन अन्य लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के विकासकर्ताओं के चयन को भी मंजूरी दी गई। इनमें फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के पैकेज-1 और पैकेज-2, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाला लिंक एक्सप्रेसवे तथा झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के दोनों पैकेज शामिल हैं। इन चारों परियोजनाओं पर कुल करीब 17,542 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण की दिशा में आगे की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।