राक्षस था मेरा पोता, गिरफ्तारी का अफसोस नहीं साहब, 79 वर्षीय दादा और चाचा ने मिलकर की थी हत्या

-48 घंटे में पुलिस ने खोला राज, दादा ने रची थी तीन अज्ञात लोगों की झूठी कहानी
-बिजली कटने की कहानी पर फंसे आरोपी, इलाके में थी बिजली, सिर्फ घर का कनेक्शन था कटा
-शराब और चोरी की आदत से परेशान था परिवार, बल्ली-दांव से वार कर उतारा मौत के घाट

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नंदग्राम थाना क्षेत्र के नूरनगर में माता मंदिर के पास 32 वर्षीय आशु उर्फ अश्वनी की हत्या का पुलिस ने महज 48 घंटे में पर्दाफाश कर दिया। मामले में पुलिस ने मृतक के 79 वर्षीय दादा भीम सिंह और 48 वर्षीय चाचा राकेश को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त बल्ली का टुकड़ा, तकिए का कवर और दो दांव बरामद किए हैं। पूछताछ में सामने आया कि आशु की शराब पीने, घर का सामान बेचने, चोरी करने और परिजनों से मारपीट की आदत से परेशान होकर दादा और चाचा ने उसकी हत्या की थी। सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सहायक पुलिस आयुक्त नंदग्राम जियाउद्दीन अहमद ने बताया कि हत्या के बाद दादा भीम सिंह ने पुलिस को गुमराह करने के लिए तीन अज्ञात लोगों की कहानी गढ़ी थी। उन्होंने बताया था कि शनिवार रात करीब साढ़े 11 बजे बिजली नहीं होने के कारण अंधेरा था। इसी दौरान तीन लोग नशे में धुत आशु को चारपाई पर लिटाकर फरार हो गए। अगले दिन सुबह छत पर चाय देने पहुंचे तो आशु मृत मिला।

पुलिस को दादा की कहानी शुरू से संदिग्ध लगी। पुलिस ने जब घटनास्थल और आसपास की बिजली व्यवस्था की जांच की तो पता चला कि घटना के समय पूरे इलाके में बिजली आ रही थी। सिर्फ आशु के घर का कनेक्शन बिजली का बिल जमा न होने के कारण पहले से कटा हुआ था। इस अहम सुराग के बाद पुलिस ने भीम सिंह से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया और हत्या की पूरी कहानी सामने आ गई। पूछताछ में सामने आया कि आशु शराब का आदी था और आए दिन परिवार से रुपये मांगता था। रुपये नहीं मिलने पर वह परिजनों से मारपीट करता और घर का सामान तक बेच देता था। दादा के मुताबिक उसकी आदतों से परिवार आर्थिक संकट में भी फंस गया था। आशु की मांगें पूरी करते-करते भीम सिंह पर कर्ज बढ़ गया था और उन्होंने अपना मकान नौ लाख रुपये में बेच दिया था।

इसमें छह लाख रुपये का लोन चुकाया गया, जबकि करीब डेढ़ लाख रुपये आशु द्वारा शराब के लिए लिए गए कर्ज को चुकाने में खर्च हुए। पुलिस के मुताबिक घटना वाली रात करीब साढ़े आठ बजे आशु ने फिर शराब के लिए रुपये मांगे। दादा ने रुपये देने से मना किया तो वह धमकी देकर बाहर चला गया। इससे परेशान होकर भीम सिंह ने अपने बेटे राकेश के साथ मिलकर उसकी हत्या की योजना बनाई। रात करीब 10 बजे आशु घर लौटा तो आरोपियों ने कथित रूप से पानी में नींद की गोलियां मिलाकर उसे पिला दीं।

रात करीब 12 बजे उसके बेहोश होने के बाद दोनों ने दांव और डंडे से वार कर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद भीम सिंह रातभर उसी घर में रहा, जहां छत पर उसके पोते का शव पड़ा था। इसके बाद पुलिस को गुमराह करने के लिए तीन अज्ञात लोगों के आशु को छोड़कर जाने की कहानी सुनाई। पुलिस की जांच में कहानी झूठी साबित होने के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर सोमवार को जेल भेज दिया गया। गिरफ्तारी के बाद भीम सिंह ने मीडियाकर्मियों से कहा कि उसका पोता परिवार का जीना दुश्वार कर चुका था और उसे अपनी गिरफ्तारी का कोई अफसोस नहीं है।