- महापौर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त ने हवन-पूजन के बाद किया शुभारंभ
- 45 हजार वर्गमीटर जमीन पर पीपीपी मॉडल से तैयार हुआ प्लांट, आधुनिक मशीनों से बनेगी खाद और आरडीएफ
- दो सप्ताह तक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगा संचालन, प्रतिदिन 1000 से 2000 मीट्रिक टन कूड़ा निस्तारण की क्षमता
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शहर से निकलने वाले कूड़े के निस्तारण की वर्षों पुरानी समस्या के समाधान की दिशा में नगर निगम ने बड़ा कदम उठाया है। खोड़ा-मकनपुर नगर पालिका क्षेत्र के निडौरी गांव में क्लस्टर आधारित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्लांट का शुक्रवार को शुभारंभ किया गया। महापौर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने विधि-विधान से हवन-पूजन करने के बाद नारियल फोड़कर प्लांट की शुरुआत की। करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस प्लांट में गाजियाबाद नगर निगम और खोड़ा-मकनपुर क्षेत्र से निकलने वाले कूड़े का आधुनिक तकनीक से निस्तारण किया जाएगा। इससे दोनों निकायों को कूड़ा प्रबंधन की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। नगर निगम के सामने पिछले एक दशक से शहर के कूड़े के स्थायी निस्तारण के लिए जमीन की उपलब्धता बड़ी चुनौती बनी हुई थी। लगातार बढ़ती आबादी और कूड़े की मात्रा के चलते पुराने इंतजाम पर्याप्त साबित नहीं हो रहे थे। इसी समस्या के समाधान के लिए क्लस्टर आधारित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की योजना तैयार की गई।

निडौरी गांव में करीब 45 हजार वर्गमीटर भूमि पर यह प्लांट स्थापित किया गया है। नगर निगम ने प्लांट के लिए जमीन उपलब्ध कराई है, जबकि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत कार्यदायी संस्था एडियो ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड ने करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से इसे तैयार किया है। महापौर ने कहा कि शहर की स्वच्छता के लिए कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण बेहद जरूरी है। प्लांट शुरू होने से गाजियाबाद और खोड़ा क्षेत्र को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि घरों से निकलने वाले कूड़े के संग्रहण से लेकर प्लांट तक पहुंचाने और उसके निस्तारण की प्रक्रिया को प्रभावी बनाया जाए, ताकि परियोजना का पूरा लाभ शहरवासियों को मिल सके।
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने भी प्लांट के संचालन को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस मौके पर अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार, चीफ इंजीनियर निर्माण नरेंद्र कुमार चौधरी, प्रकाश प्रभारी स्वप्निल जैन सहित नगर निगम के अधिकारी मौजूद रहे। कार्यदायी संस्था की ओर से संजय गुप्ता, अंकित अग्रवाल और अतुल भी उपस्थित रहे।
आधुनिक मशीनों से कूड़े से बनेगी खाद और आरडीएफ
प्लांट में आधुनिक मशीनों और तकनीक की मदद से कूड़े का पृथक्करण और निस्तारण किया जाएगा। यहां आने वाले कूड़े से उपयोगी सामग्री अलग करने के साथ जैविक कचरे से खाद तैयार की जाएगी। वहीं, अन्य उपयुक्त कचरे से आरडीएफ (रिफ्यूज डेराइव्ड फ्यूल) बनाया जाएगा, जिसका उपयोग ईंधन के रूप में किया जा सकता है। इस तरह कूड़े का केवल ढेर लगाने के बजाय उसका उपयोगी रूप में प्रसंस्करण किया जा सकेगा।
प्लांट की क्षमता प्रतिदिन करीब 1000 से 2000 मीट्रिक टन कूड़े के निस्तारण की बताई गई है। इससे गाजियाबाद नगर निगम के साथ खोड़ा-मकनपुर नगर पालिका क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा। दोनों निकायों के कूड़े को एक ही स्थान पर वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित करने की व्यवस्था होने से अलग-अलग स्थानों पर कूड़ा जमा करने की समस्या कम होने की उम्मीद है। आसपास के क्षेत्रों में भी स्वच्छता व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
दो सप्ताह तक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में होगा संचालन
शुभारंभ के बाद प्लांट को शुरुआती तौर पर दो सप्ताह तक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाया जाएगा। इस दौरान मशीनों की कार्यक्षमता, कूड़े की प्रोसेसिंग और निस्तारण की पूरी व्यवस्था को परखा जाएगा। महापौर सुनीता दयाल ने संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्था को निर्देश दिए कि ट्रायल अवधि में प्लांट का संचालन व्यवस्थित ढंग से किया जाए। उन्होंने घरों से निकलने वाले कूड़े के सही निस्तारण की व्यवस्था में तेजी लाने पर भी जोर दिया।

















