गाजियाबाद। कोरोना वायरस का खतरा टला नहीं है और अभी भी वह उतना ही घातक है जितना शुरुआत के दिनों में था। कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए लोगों से चेहरे पर मास्क लगाने या गमछे का उपयोग करने, दो गज की दूरी का पालन करने, लगातार हाथ धोने, कहीं पर भी थूकने की आदत से तौबा करने के साथ ही साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखने की जरूरत है। कोविड-19 के टीकाकरण और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च द्वारा किए गए सीरो सर्वे मे आए हर्ड इम्यूनिटी के नतीजों की खबर को कोविड-19 से मुक्ति या कोरोना वायरस की समाप्ति ना मान लें। सीरो सर्वे में जारी आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में करीब 56 फिसदी लोगों को हर्ड इम्यूनिटी डेवलप हो चुकी है। वहीं अगर राष्ट्रीय स्तर पर जारी किए गए आंकड़ों को देखें तो वह मात्र 21 फिसदी ही है। यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के वरिष्ठ स्वास रोग, फेफड़ा रोग एवं कोरोना रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अर्जुन खन्ना बताते हैं कि जिन लोगों के शरीर में एंटीबॉडी बन गई है वह भी 3 महीने से 7 महीने तक ही हमारे शरीर में रहती हैं और उसके बाद नष्ट हो जाती हैं और एंटीबॉडी होने का यह कतई मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि उस व्यक्ति को कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं हो सकता, विश्व के कई देशों में हमने ऐसी गलतियों का खामियाजा देखा है जहां लोग बिल्कुल ही रिलैक्स हो गए और मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन नहीं किया। डॉ खन्ना ने कहा हमें यह समझने की गलती बिल्कुल नहीं करनी चाहिए कि कोरोना वायरस हमारी जिंदगी से चला गया है और विशेषता इस पूरे साल 2021 में हमें तीन बातों का जरूर ही पालन करना चाहिए। जिसमें पहला है मास्क पहनना और दूसरा है सोशल डिस्टेंसिंग और तीसरा है सैनिटाइजेशन। सबसे जरूरी है हाथ को बार बार साबुन एवं पानी या सेनेटाइजर से धोना और बार-बार छुई जाने वाली सतहों को रोज साफ करना, हो सकें तो ग्लव्स पहनें, अपनी कोहनी से दरवाजे खोलने की कोशिश, ट्रेनों के जरिए आवाजाही करने वाले लोग इसके हैंडल को पकडऩे से बचें, ऑफिस कर्मचारी हर सुबह अपनी डेस्क डिसइंफेक्टेंट से साफ करें, साफ-सफाई पर जोर बढ़ाएं, हेल्थकेयर वर्कर्स जो कोरोना के मरीजों के आस पास रहते हों, मॉल, बिल्डिंगों, एटीएम मशीनों के की-पैड्स को भी साफ करें, मास्क लगा कर रखें, हाथ से चेहरा छूना, वायरस वाली किसी सतह या वस्तु को छूने के बाद अपने चेहरे को छूना बिल्कुल बंद कर दें।
















