- एचआईएमटी कॉलेज ऑफ फार्मेसी में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आईसीआईआरआईपीएएस-2026 का सफल आयोजन
- भारत समेत विदेशों से पहुंचे शिक्षाविद, शोधकर्ता और उद्योग विशेषज्ञ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवा पर भी चर्चा
- युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए शोधपत्र, समापन पर वक्ताओं व प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए
उदय भूमि संवाददाता
एनसीआर/ग्रेटर नोएडा। फार्मास्यूटिकल एवं संबद्ध विज्ञान के क्षेत्र में शोध और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से एचआईएमटी कॉलेज ऑफ फार्मेसी, ग्रेटर नोएडा में शनिवार को आयोजित दो दिवसीय दूसरी अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आईसीआईआरआईपीएएस-2026 का शनिवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ। 18 और 19 सितंबर को आयोजित सम्मेलन में भारत और विदेशों से आए 300 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें शिक्षाविद, शोधकर्ता, उद्योग विशेषज्ञ, संकाय सदस्य और विद्यार्थी शामिल रहे। दो दिनों तक चले आयोजन में वैज्ञानिक विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान, शोध प्रस्तुतियां, विचार-विमर्श और परिचर्चा के साथ शोधकर्ताओं को एक-दूसरे से जुडऩे का अवसर मिला। सम्मेलन का उद्घाटन 18 सितंबर को दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।आईसीआईआरआईपीएएस-2026 के सफल आयोजन में एचआईएमटी समूह के अध्यक्ष एच.एस. बंसल, सचिव अनिल बंसल, संयुक्त सचिव अनमोल बंसल और समूह निदेशक प्रो. सुधीर कुमार का मार्गदर्शन और सहयोग रहा।
उद्घाटन सत्र को एचआईएमटी कॉलेज ऑफ फार्मेसी के निदेशक प्रो. (डॉ.) अनुज मित्तल तथा एचआईएमटी समूह संस्थानों के समूह निदेशक प्रो. सुधीर कुमार ने संबोधित किया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि प्रो. विजय भल्ला और मुख्य अतिथि प्रो. विभु साहनी मौजूद रहे। दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान विभिन्न विषयों पर हुए सत्रों ने विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को नवीनतम वैज्ञानिक गतिविधियों तथा उद्योग की आवश्यकताओं को समझने का अवसर दिया। विशेषज्ञों ने शोध को प्रयोगशाला तक सीमित रखने के बजाय उसके व्यावहारिक उपयोग और समाज तक प्रभावी पहुंच पर भी जोर दिया।

समापन सत्र में वक्ताओं, प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के योगदान की सराहना की गई। इसके बाद प्रमाणपत्र वितरण समारोह आयोजित हुआ। सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ. विनोद गहलोत ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए सभी विशेषज्ञों, प्रतिभागियों, संस्थान के पदाधिकारियों और आयोजन से जुड़े सदस्यों के प्रति आभार जताया। दो दिनों तक चले सम्मेलन ने फार्मेसी और संबद्ध विज्ञान के क्षेत्र में शोध, नवाचार और उद्योग के बीच संवाद को आगे बढ़ाने का मंच प्रदान किया।
व्यावहारिक शिक्षा और अच्छे मूल्यों पर जोर
मुख्य अतिथि प्रो. विभु साहनी ने विद्यार्थियों के लिए केवल सैद्धांतिक शिक्षा तक सीमित रहने के बजाय व्यावहारिक ज्ञान और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने विषय की जानकारी के साथ वास्तविक परिस्थितियों में काम करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। उन्होंने व्यावसायिक और व्यक्तिगत जीवन में दीर्घकालिक सफलता के लिए मजबूत चरित्र और अच्छे मूल्यों को भी महत्वपूर्ण आधार बताया। पहले दिन तीन विशेषज्ञ तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा के एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी के डॉ. एच.आर. चिटमे ने भारतीय दृष्टिकोण से गोलियों की औषधीय प्रौद्योगिकी के स्थानांतरण में हालिया प्रगति पर विचार रखे।

मलेशिया के कुआलालंपुर स्थित यूसीएसआई विश्वविद्यालय के डॉ. कुशाग्र खन्ना ने शोध को वास्तविक दुनिया के प्रभाव से जोडऩे और औषधीय नवाचार, उद्योग तथा प्रयोगशाला से व्यवहार में आने वाले शोध के बीच समन्वय पर चर्चा की। गुजरात की यूकेए तरसाडिया विश्वविद्यालय के डॉ. प्रणव जे. शाह ने गुणवत्ता आधारित डिजाइन के आधार पर नैनो औषधि संरचनाओं के विकास की जानकारी दी। विशेषज्ञ सत्रों के बाद प्रश्नोत्तर और परिचर्चा का आयोजन हुआ। इसमें विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं ने विशेषज्ञों से विभिन्न तकनीकी विषयों पर सवाल पूछे।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता से स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव पर चर्चा
सम्मेलन के दूसरे दिन 19 सितंबर को भी समसामयिक विषयों और औषधि उद्योग की बदलती जरूरतों पर विशेषज्ञ सत्र जारी रहे। पुणे की डॉ. विश्वनाथ कराड एमआईटी विश्व शांति विश्वविद्यालय के डॉ. सतीश पोलशेट्टीवार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवा में बदलाव और फार्मा 1.0 से फार्मा 5.0 तक के सफर पर व्याख्यान दिया। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा और औषधि क्षेत्र में नई तकनीकों की बढ़ती भूमिका पर विचार रखे। सम्मेलन में पोस्टर और मौखिक शोध प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं।
इसमें युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को अपने वैज्ञानिक कार्य प्रस्तुत करने तथा विशेषज्ञों से प्रतिक्रिया प्राप्त करने का अवसर मिला। इसके बाद दक्षिण कोरिया की सैमसंग बायोलॉजिक्स के एमएसएटी विभाग के ललित सक्सेना ने जैव-समान औषधियों से जुड़ी चुनौतियों और जैविक औषधियों के निर्माण में एमएसएटी की भूमिका पर उद्योग केंद्रित प्रस्तुति दी। मलेशिया के यूसीएसआई विश्वविद्यालय के डॉ. मारवान अब्देलमहमूद अब्देलकरीम मक्की ने सटीक बृहदान्त्र-आंत्र कैंसर उपचार के लिए कार्यात्मक नैनो वाहकों पर व्याख्यान दिया।

















