छुट्टी के दिन भी बीएलओ पर ड्यूटी का दबाव, कर्मचारियों को राहत दे प्रशासन : मनीष शर्मा

  • महर्षि जयंती के विशेष अवकाश पर भी घर-घर जाकर वोट बनाने के अभियान पर उठाए सवाल
  • करवाचौथ पर महिला बीएलओ और सुपरवाइजर की बैठक बुलाने पर जताई नाराजगी
  • जनगणना और निर्वाचन ड्यूटी से स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने का दावा, दबाव के बजाय बेहतर समन्वय की मांग

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। निर्वाचन संबंधी कार्यों के नाम पर शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों पर लगातार बढ़ते काम के दबाव को लेकर अटेवा के जिलाध्यक्ष मनीष कुमार शर्मा ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों से काम कराने के लिए अवकाश के दिन भी ड्यूटी लगाना और हर समय अधिकारियों का दबाव बनाए रखना उचित नहीं है। प्रशासन को कर्मचारियों की परिस्थितियों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और धार्मिक मान्यताओं का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों से मांग की कि शिक्षकों तथा कर्मचारियों से काम कराने के लिए दबाव बनाने के बजाय बेहतर समन्वय और व्यावहारिक व्यवस्था अपनाई जाए।

मनीष कुमार शर्मा ने कहा कि 26 अक्टूबर को प्रदेश शासन की ओर से महर्षि जयंती का विशेष अवकाश घोषित किया गया था, लेकिन उसी दिन बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) और सुपरवाइजरों को घर-घर जाकर मतदाता सूची में नाम जोडऩे का अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बीएलओ और सुपरवाइजर सरकारी कर्मचारी या शिक्षक हैं, तो विशेष अवकाश का लाभ उन्हें कैसे मिलेगा, यदि उसी दिन नियमित ड्यूटी कराई जाती है।

करवाचौथ पर बैठक बुलाने पर उठाए सवाल
मनीष शर्मा ने करवाचौथ के दिन लोनी के एसडीएम की ओर से बीएलओ और सुपरवाइजरों की बैठक रखे जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कई महिला कर्मचारी निर्जला व्रत रखती हैं और धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना करती हैं। ऐसे में बैठक या ड्यूटी का दबाव उनके लिए परेशानी पैदा कर सकता है। अधिकारियों को ऐसे अवसरों पर कर्मचारियों की परिस्थितियों को समझते हुए समय और व्यवस्था तय करनी चाहिए, ताकि उन्हें अपनी धार्मिक मान्यताओं के पालन में कठिनाई न हो।

उन्होंने कहा कि एसआईआर के दौरान भी कर्मचारियों पर काम के दबाव को लेकर चिंताएं सामने आई थीं। अब मतदाता सूची से जुड़े कार्यों में भी ऐसी स्थिति बनना ठीक नहीं है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि लगातार दबाव कर्मचारियों के मानसिक तनाव को बढ़ा सकता है। यदि किसी कर्मचारी ने तनाव में आकर कोई गंभीर कदम उठा लिया, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? प्रशासन को ऐसी स्थिति पैदा होने से रोकने के लिए संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए।

जनगणना ड्यूटी से पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता
अटेवा जिलाध्यक्ष ने कहा कि शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना कार्य में भी लगाई गई है। निर्वाचन और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों के चलते विद्यालयों में शिक्षण कार्य प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना भी है। इसलिए प्रशासन को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे सरकारी कार्यों के साथ स्कूलों की पढ़ाई भी सुचारु रूप से चल सके।

मनीष कुमार शर्मा ने यह भी कहा कि रविवार या राजपत्रित अवकाश के दिन मतदान केंद्रों पर काम करने वाले कर्मचारियों को कई बार प्रतिकर अवकाश भी नहीं मिल पाता। ऐसे मामलों की समीक्षा कर कर्मचारियों को नियमानुसार राहत दी जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि निर्वाचन आयोग के नाम पर शिक्षकों और कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव न बनाया जाए। उनके अनुसार, काम प्रभावी ढंग से कराने के लिए समयबद्ध योजना, पर्याप्त समन्वय और कर्मचारियों की समस्याओं को सुनना जरूरी है।