सोमवार को राजधानी लखनऊ में 33 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों, उप जिला निर्वाचन अधिकारियों और एफएलसी सुपरवाइजरों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में लखनऊ के डीएम विशाख जी, संतकबीरनगर के डीएम महेंन्द्र सिंह तंवर, कानपुर देहात के डीएम कपिल सिंह, अमरोहा के डीएम नितिन गौड़, बांदा के डीएम अमित आसेरी, औरैया के डीएम ब्रिजेश कुमार, अयोध्या के डीएम शशांक त्रिपाठी, रायबरेली की डीएम सरनीत कौर ब्रोका और सीतापुर के डीएम डॉ. राजागणपति आर., कानपुर नगर के डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह, मुरादाबाद के डीएम डॉ. राजेन्द्र पेंसिया, झांसी के डीएम गौरांग राठी, जालौन के डीएम समीर, चित्रकूट के डीएम पुलकित गर्ग समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहें। सात मंडलों के अधिकारी हुए शामिल, गौतमबुद्धनगर और वाराणसी में 42 जिलों के अफसर पहले ले चुके प्रशिक्षण।
उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर निर्वाचन आयोग ने भी कमर कसनी शुरू कर दी है। इसी क्रम में सोमवार को राजधानी लखनऊ में 33 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों, उप जिला निर्वाचन अधिकारियों और एफएलसी सुपरवाइजरों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और वीवीपैट की फर्स्ट लेवल चेकिंग (एफएलसी) प्रक्रिया को गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और निर्धारित मानकों के अनुरूप कराने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने केंद्रीय निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत अधिकारियों को एफएलसी की पूरी प्रक्रिया में तय तकनीकी और प्रशासनिक मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ईवीएम-वीवीपैट की जांच में गुणवत्ता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि एफएलसी प्रक्रिया के प्रत्येक चरण की जानकारी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को दी जाएगी।

राजनीतिक दलों को संज्ञान में लेकर और उनकी सहभागिता के साथ ही एफएलसी की कार्रवाई पूरी कराई जाएगी। इसका उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के साथ चुनावी व्यवस्था में सभी संबंधित पक्षों का भरोसा कायम रखना है। उन्होंने कहा कि एफएलसी के दौरान किसी भी स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया और मानकों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ उप जिला निर्वाचन अधिकारियों और एफएलसी सुपरवाइजरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी, लखनऊ में आयोजित कार्यशाला सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक चली। इसमें लखनऊ, कानपुर, मुरादाबाद, झांसी, चित्रकूट, अयोध्या और देवीपाटन मंडलों से जुड़े जिलों के निर्वाचन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को एफएलसी से संबंधित तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यशाला का उद्देश्य जिलों में ईवीएम और वीवीपैट की फर्स्ट लेवल चेकिंग को एक समान प्रक्रिया और निर्धारित मानकों के तहत सुनिश्चित करना है, ताकि आगामी चुनाव की तैयारियों में किसी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक कमी न रहे।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि एफएलसी को लेकर अधिकारियों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे पहले गौतमबुद्धनगर में आयोजित प्रशिक्षण में 21 जिलों तथा वाराणसी में आयोजित प्रशिक्षण में भी 21 जिलों के अधिकारी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। अब लखनऊ की कार्यशाला के माध्यम से 33 जिलों के अधिकारियों को एफएलसी की प्रक्रिया, गुणवत्ता, पारदर्शिता और राजनीतिक दलों की सहभागिता से जुड़े जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

















