ट्रांस हिंडन में IPS ऋजुल का ‘ऑपरेशन थाना’, कुर्सी संभालते ही पुलिसिंग की जमीनी हकीकत खंगाल रहे डीसीपी

  • थाने की पुलिसिंग कागजों में नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए : ऋजुल
  • शालीमार गार्डन और टीला मोड़ थाने पहुंचे ट्रांस हिंडन के नए पुलिस उपायुक्त, परिसर और अभिलेखों का निरीक्षण
  • पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली देख दिए आवश्यक दिशा-निर्देश, लापरवाही पर नजर और बेहतर पुलिसिंग पर जोर
  • इंजीनियरिंग से पुलिस सेवा तक का सफर, पांचवें प्रयास में हासिल किया भारतीय पुलिस सेवा का मुकाम

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। ट्रांस हिंडन की पुलिसिंग की कमान संभाले अभी कुछ ही दिन हुए हैं, लेकिन (आईपीएस) पुलिस उपायुक्त ऋजुल ने शुरुआती दौर में ही अपनी कार्यशैली का संकेत दे दिया है। उनका जोर कार्यालय में बैठकर रिपोर्ट देखने के बजाय सीधे थानों तक पहुंचकर पुलिसिंग की वास्तविक स्थिति समझने पर है। रविवार को उन्होंने थाना शालीमार गार्डन और थाना टीला मोड़ का भ्रमण किया। इस दौरान थाना परिसर, अभिलेखों और कार्यप्रणाली का निरीक्षण किया तथा पुलिसकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इससे पहले भी वह ट्रांस हिंडन क्षेत्र के कई थानों का निरीक्षण कर चुके हैं। लगातार थाना निरीक्षण से यह स्पष्ट है कि नई जिम्मेदारी संभालने के बाद वह क्षेत्र की पुलिसिंग को नजदीक से समझने पर विशेष जोर दे रहे हैं। उनके सामने अपराध नियंत्रण के साथ फरियादियों की समस्याओं का समयबद्ध निस्तारण, पुलिसकर्मियों की सक्रियता और थाना स्तर पर व्यवस्था को मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी है। आईपीएस ऋजुल ने 19 सितंबर 2026 को गाजियाबाद पुलिस आयुक्तालय में जिम्मेदारी संभाली है। उत्तर प्रदेश पुलिस के आधिकारिक अभिलेख में उनकी वर्तमान तैनाती अपर पुलिस उपायुक्त, गाजियाबाद के रूप में दर्ज है। नई जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने लगातार फील्ड में सक्रियता दिखाई है।

इससे पहले 25 सितंबर को उन्होंने इंदिरापुरम, कौशांबी, साहिबाबाद और लिंक रोड थानों का निरीक्षण किया था। इससे पुलिसकर्मियों के बीच भी यह संदेश गया कि थाना स्तर की पुलिसिंग, अभिलेखों का रखरखाव और रोजमर्रा की कार्यप्रणाली अब सीधे वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में है। ऋजुल की कहानी केवल एक आईपीएस अधिकारी की नियुक्ति तक सीमित नहीं है। सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई से लेकर भारतीय पुलिस सेवा तक पहुंचने का उनका सफर कई पड़ावों से होकर गुजरा। दो बार संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता हासिल करने के बावजूद मनचाही सेवा नहीं मिलने पर उन्होंने प्रयास जारी रखा। वर्ष 2021 में मां के निधन जैसी व्यक्तिगत कठिनाई के बीच भी तैयारी जारी रखी और पांचवें प्रयास में भारतीय पुलिस सेवा हासिल की। शालीमार गार्डन और टीला मोड़ थानों का रविवार का निरीक्षण ऋजुल की नई जिम्मेदारी के शुरुआती दिनों में लगातार सक्रियता को दर्शाता है। इससे पहले इंदिरापुरम, कौशांबी, साहिबाबाद और लिंक रोड थानों का निरीक्षण भी वह कर चुके हैं।

यानी ट्रांस हिंडन के अलग-अलग हिस्सों की पुलिसिंग को समझने के लिए वह क्रमवार थानों का जायजा ले रहे हैं। अब आने वाले दिनों में उनके सामने इस निरीक्षण से मिली जानकारी के आधार पर थाना स्तर की पुलिसिंग को और व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी होगी। अपराध नियंत्रण, लंबित मामलों की समीक्षा, फरियादियों की समस्याओं का निस्तारण, पुलिसकर्मियों की सक्रियता और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारियों में रहेगा। ऋजुल की तैनाती ऐसे समय हुई है, जब ट्रांस हिंडन क्षेत्र में पुलिसिंग को लेकर लोगों की अपेक्षाएं लगातार बढ़ रही हैं। मेरठ और बुलंदशहर की फील्ड पोस्टिंग का अनुभव लेकर गाजियाबाद पहुंचे ऋजुल ने शुरुआती दिनों में ही थानों का रुख कर यह स्पष्ट किया है कि वह क्षेत्र को समझने और पुलिसिंग की वास्तविक स्थिति जानने के लिए सीधे मैदान में उतरकर काम करने पर जोर दे रहे हैं। अब उनके निरीक्षणों के बाद दिए गए निर्देश किस तरह थाना स्तर की कार्यप्रणाली में दिखाई देते हैं, इस पर पुलिस विभाग और क्षेत्र के लोगों की नजर रहेगी।

कागजी रिपोर्ट नहीं, थाने पहुंचकर खुद परखी व्यवस्था
डीसीपी ऋजुल के निरीक्षण का खास पहलू यह रहा कि उन्होंने थाना परिसर में पहुंचकर वहां की व्यवस्थाओं को देखा और पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली की जानकारी ली। थाने में रखे जाने वाले अभिलेखों और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। उनका जोर इस बात पर रहा कि थाना स्तर पर होने वाला प्रत्येक कार्य व्यवस्थित तरीके से किया जाए और पुलिसकर्मी अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाएं। ट्रांस हिंडन क्षेत्र में बड़ी आबादी और लगातार बढ़ती शहरी गतिविधियों के बीच थाना स्तर की पुलिसिंग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

ऐसे में शिकायतों का समय से निस्तारण, अपराधों की रोकथाम, क्षेत्र में पुलिस की मौजूदगी और पुलिसकर्मियों की सक्रियता सीधे आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ी होती है। ऋजुल के निरीक्षण में इन्हीं बुनियादी व्यवस्थाओं को मौके पर परखने पर जोर दिखाई दिया। इससे पहले चार थानों के निरीक्षण के दौरान भी उन्होंने थाना परिसर, अभिलेख और कार्यप्रणाली की समीक्षा की थी तथा संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए थे। लगातार थाना निरीक्षण से उनकी कार्यशैली में फील्ड निगरानी को प्राथमिकता मिलने की तस्वीर सामने आ रही है।

मेरठ-बुलंदशहर की फील्ड पुलिसिंग का अनुभव
ऋजुल मूल रूप से उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के बाजपुर कस्बे के रहने वाले हैं। उनके पिता बाबूलाल वन विभाग में प्रभागीय वन अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि उनकी मां ममता सरकारी शिक्षिका थीं। परिवार के प्रशासनिक माहौल ने उन्हें शुरुआत से ही सिविल सेवा की ओर प्रेरित किया। उनकी प्रारंभिक पढ़ाई बाजपुर में हुई। वर्ष 2009 में सेंट मेरी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से हाईस्कूल और वर्ष 2011 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। इसके बाद जयपुर स्थित मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। वर्ष 2018 में उनका चयन केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में सहायक कमांडेंट के पद पर हुआ, लेकिन उनका लक्ष्य भारतीय पुलिस सेवा था। इसलिए उन्होंने उस सेवा को ज्वाइन नहीं किया और संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी जारी रखी।

वर्ष 2020 में उनका चयन दानिप्स के लिए हुआ, लेकिन उन्होंने प्रयास जारी रखा। इसी दौरान वर्ष 2021 में उनकी मां ममता का निधन हो गया। यह उनके जीवन का कठिन दौर था, लेकिन उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी। आखिरकार पांचवें प्रयास में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की और वर्ष 2022 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी बने। आईपीएस बनने के बाद ऋजुल ने उत्तर प्रदेश में फील्ड पुलिसिंग का अनुभव हासिल किया। उन्होंने मेरठ और बुलंदशहर में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में जिम्मेदारी संभाली। बुलंदशहर में उनकी तैनाती के दौरान डेढ़ लाख रुपये के इनामी बदमाश के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की घटना भी सामने आई थी। इसके बाद वह प्रशिक्षण निदेशालय, लखनऊ से जुड़े रहे। अब शासन की ओर से उन्हें गाजियाबाद पुलिस आयुक्तालय में अपर पुलिस उपायुक्त की जिम्मेदारी दी गई है। 19 सितंबर की तबादला सूची में उनके लखनऊ प्रशिक्षण निदेशालय से गाजियाबाद स्थानांतरण की पुष्टि हुई थी।

अपराध नियंत्रण से लेकर शिकायतों के निस्तारण तक चुनौती
ट्रांस हिंडन क्षेत्र में ऋजुल के सामने कई स्तर की जिम्मेदारियां हैं। यहां घनी आबादी वाले क्षेत्र, प्रमुख बाजार, औद्योगिक गतिविधियां, दिल्ली से सटी सीमाएं और लगातार बढ़ता आवासीय विस्तार पुलिस के सामने अलग-अलग तरह की चुनौतियां पेश करते हैं। ऐसे में अपराध नियंत्रण के साथ आम लोगों की शिकायतों का त्वरित और निष्पक्ष निस्तारण भी महत्वपूर्ण होगा। थाना स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली मजबूत करने के लिए अधिकारियों की नियमित निगरानी अहम भूमिका निभाती है।

ऋजुल द्वारा जिम्मेदारी संभालने के तुरंत बाद लगातार थानों का निरीक्षण किए जाने से यही संकेत मिल रहा है कि वह क्षेत्र की पुलिसिंग को नजदीक से समझने के बाद आगे की कार्ययोजना पर काम कर रहे हैं। उनकी सख्त कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि वह केवल वरिष्ठ अधिकारियों से रिपोर्ट लेने के बजाय सीधे थाना परिसर में पहुंचकर व्यवस्थाओं को देख रहे हैं। इससे पुलिसकर्मियों में जिम्मेदारी और जवाबदेही की भावना मजबूत करने का प्रयास दिखाई देता है। निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों का उद्देश्य भी थाना स्तर की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।

चार प्रयासों में चूके, मां का सपना बना हौसला
ऋजुल ने स्वयं अपने एक बयान में कहा है कि बचपन से ही वर्दी पहनने का सपना था। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें भारतीय पुलिस सेवा में जाना है। उन्होंने बताया था कि शुरुआती चार प्रयासों में दो बार संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता मिली, लेकिन भारतीय पुलिस सेवा की रैंक नहीं मिल सकी। इसके बावजूद उन्होंने तैयारी जारी रखी। उनके अनुसार, उनकी मां बचपन से चाहती थीं कि उनका बेटा पुलिस अधिकारी बने। मां के इस सपने को पूरा करने के लिए भी उन्होंने संघर्ष जारी रखा। पांचवें प्रयास में भारतीय पुलिस सेवा हासिल करना उनके लिए व्यक्तिगत और पारिवारिक रूप से बड़ी उपलब्धि रही। शुरुआती कुछ दिनों की गतिविधियों से उनकी कार्यशैली का संकेत मिल चुका है।

जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने अलग-अलग थानों का निरीक्षण शुरू किया और थाना स्तर की व्यवस्थाओं को करीब से देखा। उनका फोकस केवल अधिकारियों से रिपोर्ट लेने तक सीमित रहने के बजाय मौके पर जाकर व्यवस्था को समझने पर है। इससे पुलिसकर्मियों में जवाबदेही की भावना मजबूत होने की उम्मीद है। ट्रांस हिंडन की पुलिसिंग में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था, शिकायतों का निस्तारण और पुलिस की क्षेत्र में मौजूदगी प्रमुख विषय रहेंगे। आने वाले समय में उनके निरीक्षणों के दौरान दिए गए निर्देश किस तरह थाना स्तर की कार्यप्रणाली में दिखाई देते हैं, यह महत्वपूर्ण होगा।

आईपीएस ऋजुल
पुलिस उपायुक्त
ट्रांस हिंडन

थाना पुलिसिंग की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है और यहां किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिसकर्मी अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभाएं और थाने आने वाले प्रत्येक फरियादी की बात ध्यानपूर्वक सुनकर उसकी समस्या का नियमानुसार और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें। अपराध नियंत्रण केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पुलिस की सक्रियता क्षेत्र में साफ दिखाई देनी चाहिए। अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के साथ-साथ लंबित मामलों की नियमित समीक्षा की जाए। किसी भी शिकायत को अनदेखा न किया जाए और पीडि़त व्यक्ति को अनावश्यक रूप से थाने के चक्कर न लगाने पड़ें। थाना परिसर की व्यवस्था, अभिलेखों का रखरखाव और पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली में अनुशासन स्पष्ट रूप से नजर आना चाहिए। क्षेत्र में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने के साथ संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाए। पुलिसकर्मी जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी सक्रियता दिखाएं। वरिष्ठ अधिकारी लगातार थानों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करेंगे। जहां भी लापरवाही या उदासीनता सामने आएगी, वहां जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी। हमारा उद्देश्य ऐसी पुलिसिंग सुनिश्चित करना है, जिसमें जनता को सुरक्षा का भरोसा और फरियादियों को समय पर समाधान मिले।
ऋजुल
पुलिस उपायुक्त
ट्रांस हिंडन