नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड में लिए गए कई बड़े फैसले, फ्लैट खरीदारों को बड़ी राहत, रजिस्ट्री का रास्ता होगा आसान

-223वीं बोर्ड बैठक में कई अहम फैसले, तैयार फ्लैटों के अनुपात में बकाया जमा करने की सुविधा से बिल्डरों को राहत; किसानों के मुआवजे में भी बड़ा इजाफा

उदय भूमि संवाददाता
नोएडा। नोएडा में वर्षों से रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे फ्लैट खरीदारों के लिए बड़ी राहत की राह खुल गई है। शनिवार को नोएडा प्राधिकरण की 223वीं बोर्ड बैठक में ऐसे कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई, जिनका सीधा असर फ्लैट बायर्स, बिल्डरों, किसानों और शहर के विकास पर पड़ेगा। खास तौर पर तैयार फ्लैटों की संख्या के आधार पर बिल्डरों को बकाया भुगतान करने की सुविधा देने वाली नई नीति से उन परियोजनाओं में रजिस्ट्री का रास्ता आसान होने की उम्मीद है, जहां प्राधिकरण का बकाया जमा नहीं होने के कारण एनओसी अटकी हुई थी। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त एवं नोएडा प्राधिकरण के अध्यक्ष दीपक कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में नोएडा के सीईओ कृष्ण करुणेश समेत प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों ने लंबित मामलों को गति देने और शहर के विकास से जुड़े कई प्रस्तावों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए। फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री, सहकारी आवासीय समितियों में लंबे समय से अटके संपत्ति हस्तांतरण, किसानों के मुआवजे में वृद्धि और बिल्डरों से बकाया वसूली जैसे मुद्दों पर बोर्ड ने सकारात्मक फैसले किए।

फ्लैट बायर्स के लिए सबसे बड़ी राहत
फ्लैट खरीदारों के लिए बोर्ड बैठक का सबसे अहम फैसला रजिस्ट्री प्रक्रिया को आसान बनाने से जुड़ा रहा। नई नीति के तहत बिल्डर अपनी परियोजना में जितने फ्लैट तैयार हो चुके हैं, उनके अनुपात के आधार पर प्राधिकरण का बकाया जमा कर सकेंगे। अब तक कई परियोजनाओं में बिल्डर का प्राधिकरण पर बकाया होने के कारण फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री के लिए एनओसी जारी नहीं हो पा रही थी। इसका खामियाजा उन खरीदारों को भुगतना पड़ रहा था, जिन्होंने अपनी पूरी रकम चुकाकर फ्लैट का कब्जा तक हासिल कर लिया था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद तैयार फ्लैटों से जुड़े बकाये का भुगतान कर रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकेगा। इससे वर्षों से अपने घर के कानूनी दस्तावेज का इंतजार कर रहे हजारों खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद है। प्राधिकरण का यह कदम खास तौर पर उन परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन बिल्डर और प्राधिकरण के बीच बकाया भुगतान का विवाद रजिस्ट्री में बाधा बना हुआ है।

सीईओ कृष्ण करुणेश

1996 से लंबित मामलों को भी समाधान की उम्मीद
नोएडा की कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटियों में लंबे समय से अटके रजिस्ट्री के मामलों को भी बोर्ड ने रास्ता देने का फैसला किया है। वर्ष 1996 से लंबित ऐसे मामलों के समाधान के लिए प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इन सोसायटियों में जीपीए के आधार पर जिन फ्लैटों की बिक्री हुई थी, अब निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद मौजूदा मालिकों के नाम रजिस्ट्री का रास्ता खुल सकेगा। इसके लिए सोसायटी की एनओसी, ट्रांसफर शुल्क और निर्धारित प्रमाण-पत्रों के आधार पर प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके तहत 2.5 से 15 प्रतिशत तक शुल्क निर्धारित किया गया है। इससे लंबे समय से संपत्ति पर वैध कब्जे के बावजूद दस्तावेजों की कमी से परेशान लोगों को राहत मिल सकेगी। इस व्यवस्था से न केवल संपत्ति के दस्तावेज मौजूदा मालिकों के नाम हो सकेंगे, बल्कि सरकार को स्टांप ड्यूटी के रूप में राजस्व भी प्राप्त होगा।

किसानों के लिए भी बड़ा फैसला, मुआवजे की दर बढ़ी
बोर्ड बैठक में किसानों के हित में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। नोएडा में जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों को अब 6459 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजा और 5 प्रतिशत आबादी भूखंड नई दरों के अनुसार दिया जाएगा। पहले अलग-अलग व्यवस्था के तहत 5324 रुपये प्रति वर्गमीटर बिना 5 प्रतिशत आबादी भूखंड और 4224 रुपये प्रति वर्गमीटर 5 प्रतिशत आबादी भूखंड के साथ लाभ दिया जाता था। नई व्यवस्था में किसानों को मिलने वाले लाभ में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। यह फैसला भूमि अधिग्रहण और किसानों के हितों से जुड़े मामलों में प्राधिकरण की ओर से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

न्यू नोएडा के लिए भी जमीन खरीद की नीति स्पष्ट
न्यू नोएडा के विकास को गति देने के लिए फेज-1 और फेज-2 में किसानों से आपसी सहमति के आधार पर भूमि खरीद की व्यवस्था के लिए मुआवजा दर और 6 प्रतिशत आबादी भूखंड ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की व्यवस्था के अनुरूप रखने का निर्णय लिया गया है। वहीं फेज-3 और फेज-4 में मुआवजा दर तथा 7 प्रतिशत आबादी भूखंड के लिए यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण की व्यवस्था को आधार बनाया जाएगा। इससे न्यू नोएडा के प्रस्तावित विकास के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बकाया नहीं चुकाने वाले बिल्डरों पर सख्ती
जहां प्राधिकरण ने फ्लैट खरीदारों को राहत देने के लिए नई व्यवस्था को मंजूरी दी है, वहीं बकाया भुगतान नहीं करने वाले बिल्डरों पर सख्ती का संकेत भी दिया गया है। अमिताभ कांत कमेटी की पॉलिसी के तहत एग्रीमेंट कर जीरो पीरियड का लाभ लेने वाले ऐसे बिल्डर, जो आगे का बकाया जमा नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ प्राधिकरण एग्रीमेंट निरस्त करने की कार्रवाई कर सकता है। प्राधिकरण ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) का इंतजार करते हुए बिल्डरों को अनिश्चितकाल तक अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। इससे एक ओर जहां ईमानदारी से भुगतान करने वाले बिल्डरों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, वहीं बकाया भुगतान में लगातार देरी करने वालों पर दबाव बढ़ेगा।

शहर के विकास और रखरखाव के लिए कॉर्पस फंड
बोर्ड बैठक में प्राधिकरण में आने वाले वन टाइम लीज रेंट के लिए कॉर्पस फंड की एसओपी को भी मंजूरी दी गई। इस फंड को सेविंग फंड के तौर पर सुरक्षित रखा जाएगा। भविष्य में इस फंड से मिलने वाले ब्याज का इस्तेमाल शहर के रखरखाव और नागरिक सुविधाओं पर किया जा सकेगा। प्राधिकरण में इस मद से हर साल करीब 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि आने का अनुमान है। इस व्यवस्था को शहर के लंबे समय तक बेहतर रखरखाव और वित्तीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

तीनों प्राधिकरणों में समान औद्योगिक नीति की तैयारी
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के बीच औद्योगिक नीतियों में समानता लाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। इसके लिए तीनों प्राधिकरणों के अधिकारियों की एक समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। इससे औद्योगिक निवेशकों के लिए नीतियों को समझना आसान होगा और तीनों क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को एक समान दिशा देने में मदद मिलेगी।

सेक्टर-145 में आधुनिक कूड़ा निस्तारण प्लांट
शहर में कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए सेक्टर-145 में करीब 100 की क्षमता वाले कूड़ा निस्तारण प्लांट को मंजूरी दी गई है। सूखे और आरडीएफ कचरे के निस्तारण के लिए थर्मोलिसिस आधारित इंटीग्रेटेड वेस्ट टू एनर्जी एंड रिसोर्स रिकवरी फैसिलिटी स्थापित की जाएगी। इस परियोजना से कचरा प्रबंधन को वैज्ञानिक और आधुनिक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सेक्टर-94 का औषधि पार्क होगा ज्यादा टिकाऊ
सेक्टर-94 में विकसित औषधि पार्क की मेंटिनेंस व्यवस्था को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए इसे कंपनी के माध्यम से संचालित करने की मंजूरी दी गई है। इसी तर्ज पर सेक्टर-8 की नर्सरी को भी विकसित किया जाएगा।

सेक्टर-96 में 12 मंजिला इमारत, 315 करोड़ का बजट मंजूर
नोएडा प्राधिकरण की अपनी प्रशासनिक व्यवस्था को और बेहतर करने के लिए सेक्टर-96 में शेष बिल्डिंग का निर्माण पूरा किया जाएगा। इसके लिए 315 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी गई है। प्रस्ताव के तहत 12 मंजिला इमारत तैयार की जाएगी। निर्माण पूरा होने के बाद प्राधिकरण के शेष विभागों को भी सेक्टर-96 स्थित कार्यालय परिसर में स्थानांतरित किया जा सकेगा। इससे अलग-अलग स्थानों पर संचालित विभागों को एक जगह लाने में मदद मिलेगी और प्रशासनिक कामकाज को गति मिल सकती है।

शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को मिला विस्तार
शहर की प्रकाश व्यवस्था से जुड़े टाटा एलईडी लाइट प्रोजेक्ट को 30 महीने का एक्सटेंशन देने को मंजूरी दी गई है। कंपनी वर्ष 2019 से शहर की प्रकाश व्यवस्था के लिए काम कर रही है। सस्टेनेबल मॉडल पर आधारित इस परियोजना के विस्तार से शहर की प्रकाश व्यवस्था को बनाए रखने और उसे बेहतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सेक्टर-153 में बनेगा पुलिस आयुक्त कार्यालय
नोएडा में पुलिस प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। सेक्टर-153 में पुलिस आयुक्त कार्यालय के निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने की मंजूरी दी गई है। इसके लिए करीब 13,347.18 वर्गमीटर भूमि आवंटित करने का निर्णय लिया गया है।

फैसलों से विकास को मिलेगी नई गति
नोएडा प्राधिकरण की 223वीं बोर्ड बैठक के फैसलों को व्यापक नजरिए से देखें तो इसमें एक साथ कई वर्गों को राहत और विकास की नई दिशा देने की कोशिश दिखाई देती है। फ्लैट खरीदारों के लिए रजिस्ट्री की बाधा दूर करने की पहल, किसानों के मुआवजे में बढ़ोतरी, बकायेदार बिल्डरों पर सख्ती, न्यू नोएडा के लिए भूमि व्यवस्था, औद्योगिक नीति में एकरूपता और शहर की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने वाले फैसले एक साथ लिए गए हैं। सीईओ कृष्ण करुणेश की मौजूदगी में हुई बैठक में लंबित समस्याओं के व्यावहारिक समाधान पर जोर दिया गया। खास तौर पर फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री से जुड़े फैसले को नोएडा के रियल एस्टेट सेक्टर में लंबे समय से चली आ रही अड़चन को कम करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इन नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन से जहां घर खरीदारों को अपने फ्लैट की रजिस्ट्री का लाभ मिल सकता है, वहीं किसानों को बेहतर मुआवजा, शहर को बेहतर सुविधाएं और नोएडा-ग्रेटर नोएडा-यमुना क्षेत्र को औद्योगिक विकास की अधिक एकीकृत दिशा मिलने की उम्मीद है।