-नगर आयुक्त ने गठित की कमेटी, जोनल प्रभारी और निर्माण विभाग की टीम करेगी भवनों का सर्वे
-खतरनाक इमारतों को चिन्हित कर भवन स्वामियों को दिए जाएंगे नोटिस, सुरक्षित स्थान पर भेजे जाएंगे लोग
-मुख्य अभियंता को सौंपी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी, बारिश के दौरान ढहने वाले भवनों पर विशेष निगरानी
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। बारिश के दौरान पुराने और जर्जर भवनों के ढहने से होने वाले हादसों को रोकने के लिए गाजियाबाद नगर निगम ने अभियान शुरू कर दिया है। निगम सीमा में आने वाले ऐसे भवनों को चिन्हित किया जा रहा है, जिनके बारिश के दौरान गिरने की आशंका अधिक है। इसके लिए नगर आयुक्त ने कमेटी गठित कर जोनल प्रभारियों और निर्माण विभाग की टीम को संयुक्त रूप से सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। नगर आयुक्त ने कहा कि वर्षा ऋतु में लगातार बारिश और मौसम खराब होने के कारण पुराने भवनों की स्थिति और कमजोर हो जाती है। ऐसे में जर्जर इमारतों के अचानक ढहने से जान-माल का नुकसान हो सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए निगम की टीम शहर के विभिन्न क्षेत्रों में पुराने और खतरनाक भवनों का निरीक्षण कर रही है। सर्वे के दौरान भवन की स्थिति, उसकी उम्र, निर्माण गुणवत्ता और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा का आकलन किया जाएगा। निगम अधिकारियों के अनुसार, सर्वे में जिन भवनों की स्थिति अत्यधिक जर्जर पाई जाएगी, उनके भवन स्वामियों और संबंधित बिल्डरों को नोटिस जारी किए जाएंगे। उन्हें भवन की मरम्मत कराने, आवश्यक सुरक्षा उपाय करने अथवा खतरनाक हिस्से को हटाने के निर्देश दिए जाएंगे।
निगम ने भवन स्वामियों से अपील की है कि वे अपनी संपत्तियों की स्थिति को गंभीरता से लें और किसी भी संभावित हादसे से पहले जरूरी कदम उठाएं। नगर आयुक्त ने कहा कि जर्जर भवनों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। यदि किसी भवन में रहना जोखिमपूर्ण पाया जाता है तो भवन स्वामी और बिल्डर वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की कार्रवाई करें। निगम की ओर से ऐसे मामलों में संबंधित पक्षों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। जर्जर भवनों के चिन्हांकन के लिए सभी जोन के जोनल प्रभारी, निर्माण विभाग के सहायक अभियंता और अवर अभियंता को जिम्मेदारी दी गई है। टीम क्षेत्रवार निरीक्षण कर भवनों की सूची तैयार करेगी। इसके बाद प्राथमिकता के आधार पर सबसे अधिक जोखिम वाले भवनों पर कार्रवाई की जाएगी।
निगम अधिकारियों का कहना है कि कई पुराने भवन लंबे समय से मरम्मत के अभाव में कमजोर हो चुके हैं। बारिश का पानी दीवारों और नींव में जाने से उनकी स्थिति और खराब हो जाती है। ऐसे भवनों के आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों के लिए भी खतरा बना रहता है। इसलिए सर्वे के दौरान भवन के आसपास सुरक्षा घेरा बनाने और लोगों की आवाजाही नियंत्रित करने जैसे उपाय भी सुझाए जाएंगे। नगर आयुक्त ने अभियान की निगरानी की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता निर्माण नरेंद्र कुमार चौधरी और निर्माण विभाग की टीम को सौंपी है।
टीम जोनल प्रभारियों से नियमित रिपोर्ट लेगी और चिन्हित भवनों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा करेगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सर्वे और नोटिस की प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही न बरती जाए। नगर निगम की ओर से बारिश के दौरान जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ-साथ जर्जर भवनों की पहचान पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। निगम का कहना है कि समय रहते खतरनाक भवनों को चिन्हित करने और वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने से संभावित दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।

















