-जन्म शताब्दी समारोह में श्रीराम स्तंभ की प्रतिकृति का हुआ अनावरण, पुस्तक का भी विमोचन
-जीवन और राम जन्मभूमि आंदोलन में भूमिका पर लगी प्रदर्शनी, देश के महत्वपूर्ण अध्यायों को सहेजने पर जोर
-अशोक सिंघल जैसे व्यक्तित्व विरले, युवाओं को उनके जीवन से लेनी चाहिए प्रेरणा: डॉ. उपासना अरोड़ा
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे स्वर्गीय अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी समारोह में उनकी स्मृतियों और योगदान को समर्पित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। सोमवार को आयोजित समारोह में श्रीराम स्तंभ की प्रतिकृति का अनावरण, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के दिव्य पदचिह्न पुस्तक का विमोचन और अशोक सिंघल के जीवन तथा राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई। कार्यक्रम में देशभर से आए कई गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया और उनके जीवन एवं योगदान को स्मरण किया। समारोह में यशोदा समूह अस्पताल की प्रबंध निदेशक डॉ. उपासना अरोड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय स्व
यंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज तथा अशोक सिंघल फाउंडेशन के न्यासी एवं संयोजक महेश भगचंदका समेत कई प्रमुख व्यक्तियों के साथ मंच साझा किया। इस दौरान डॉ. अरोड़ा ने युवाओं से भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने और अशोक सिंघल के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। समारोह में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के दिव्य पदचिह्न पुस्तक का विमोचन भी किया गया। पुस्तक के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और उनके व्यक्तित्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सामने रखने का प्रयास किया गया।

वहीं अशोक सिंघल के जीवन पर आधारित प्रदर्शनी में उनके सार्वजनिक जीवन, राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े योगदान और विभिन्न महत्वपूर्ण पड़ावों को दर्शाया गया। कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने श्रीराम के आदर्शों, सामाजिक मूल्यों और देश की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर विचार रखे। समारोह का मुख्य संदेश यही रहा कि ऐतिहासिक घटनाओं और उनसे जुड़े व्यक्तित्वों की स्मृतियों को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखते हुए उन्हें आने वाली पीढिय़ों से जोड़ा जाए, ताकि युवा देश और समाज के महत्वपूर्ण अध्यायों से परिचित हो सकें।
स्मृतियों को आने वाली पीढिय़ों तक पहुंचाने पर जोर
डॉ. उपासना अरोड़ा ने कहा कि श्रीराम स्तंभ का अनावरण केवल एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भगवान श्रीराम और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ी स्मृतियों को आने वाली पीढिय़ों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि देश और समाज के महत्वपूर्ण अध्यायों से जुड़ी स्मृतियों को संजोकर रखना आवश्यक है, ताकि नई पीढ़ी अपने इतिहास और उससे जुड़े लोगों के योगदान को समझ सके। उन्होंने युवाओं से अशोक सिंघल के जीवन और उनके योगदान से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने जीवन में आदर्श, अनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को स्थान देना चाहिए।
समारोह में लगाई गई प्रदर्शनी के माध्यम से अशोक सिंघल के जीवन के विभिन्न पहलुओं और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को प्रदर्शित किया गया। डॉ. अरोड़ा ने कहा आज मेरे लिए ही नहीं, बल्कि पूरे हिंदू समाज के लिए यह बहुत ही स्वर्णिम दिन है। अशोक सिंघल जी जैसे व्यक्तित्व बहुत कम देखने को मिलते हैं। वे अपने आप में एक अलग व्यक्तित्व थे और आज उन्हें याद करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की पहचान केवल वर्तमान से नहीं, बल्कि उसकी ऐतिहासिक स्मृतियों और मूल्यों से भी बनती है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपने समाज और देश के महत्वपूर्ण अध्यायों को जानने का अवसर मिलता है।

















