इंदिरापुरम में सजेगा भारतीय ज्ञान का संसार, अक्टूबर में खुलेगा संस्कृत दर्शन पार्क

-14 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा अनूठा पार्क, संस्कृति और आधुनिकता का होगा संगम
-वेद-उपनिषद से लेकर महाकाव्य और संस्कृत साहित्य तक की झलक, बच्चों-युवाओं को आकर्षित करेगा
-थीम आधारित संरचनाओं, श्लोक-सूक्तियों, फव्वारों और आधुनिक प्रकाश व्यवस्था से संवरेगा पार्क

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। भारतीय संस्कृति, सनातन ज्ञान परंपरा और संस्कृत भाषा के गौरव से नई पीढ़ी को जोडऩे की दिशा में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की एक महत्वपूर्ण पहल अब जल्द आकार लेने जा रही है। इंदिरापुरम में करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा ‘संस्कृत दर्शन पार्क’ अपने पूर्ण स्वरूप की ओर तेजी से बढ़ रहा है। जीडीए की ओर से पार्क के निर्माण एवं विकास कार्यों का लगातार स्थलीय निरीक्षण कर प्रगति की समीक्षा की जा रही है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अक्टूबर माह में पार्क को आमजन के लिए खोले जाने की संभावना है।
संस्कृत दर्शन पार्क को सामान्य पार्क से अलग स्वरूप देने की तैयारी है। इसका उद्देश्य लोगों को मनोरंजन और प्रकृति के साथ भारतीय ज्ञान, संस्कृति और विरासत से परिचित कराना है।

पार्क में भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि बच्चों और युवाओं में अपनी संस्कृति तथा संस्कृत भाषा को जानने की जिज्ञासा पैदा हो। यहां आने वाले लोगों को एक ही स्थान पर भारतीय दर्शन, साहित्य और ज्ञान परंपरा की विविध झलक देखने को मिलेगी। जीडीए अधिकारियों की ओर से पार्क के निर्माण कार्यों का नियमित रूप से निरीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों को शेष कार्यों को निर्धारित गुणवत्ता और मानकों के अनुरूप जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं। प्राधिकरण का लक्ष्य है कि पार्क को आमजन के लिए खोलने से पहले सभी जरूरी कार्य पूरे कर लिए जाएं और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों।

पार्क के शुरू होने के बाद गाजियाबाद के लोगों को शहर में एक ऐसा नया सार्वजनिक स्थल मिलेगा, जहां मनोरंजन के साथ भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। विद्यार्थियों, युवाओं और पर्यटकों के लिए भी यह स्थान उपयोगी साबित हो सकता है। संस्कृत दर्शन पार्क के माध्यम से संस्कृति से जुड़ाव, ज्ञान का प्रसार और आधुनिकता के साथ विरासत का संरक्षण करने की दिशा में जीडीए की यह पहल शहर को एक विशिष्ट सांस्कृतिक स्थल देने जा रही है।

वेद, उपनिषद और महाकाव्यों की मिलेगी जानकारी
पार्क में वेद, उपनिषद, महाकाव्य, भारतीय दर्शन और संस्कृत साहित्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को आकर्षक प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। इसके लिए अलग-अलग विषयों पर आधारित संरचनाएं तैयार की जा रही हैं। संस्कृत के श्लोकों और सूक्तियों को भी पार्क की संरचनाओं एवं परिसर में इस तरह प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे लोगों को इनके अर्थ और महत्व को समझने का अवसर मिले।

जीडीए का प्रयास है कि पार्क केवल घूमने-फिरने की जगह न रहकर ज्ञान और संस्कृति से जुडऩे का माध्यम बने। खासतौर पर विद्यार्थियों के लिए यहां भारतीय इतिहास और ज्ञान परंपरा को सहज एवं रोचक तरीके से समझने का अवसर उपलब्ध कराने की योजना है। इससे बच्चों में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति रुचि बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

फव्वारे और रोशनी बढ़ाएंगे पार्क की खूबसूरती
संस्कृति आधारित विषय-वस्तु के साथ पार्क को आकर्षक बनाने के लिए आधुनिक सुविधाओं का भी समावेश किया जा रहा है। परिसर में बेहतर लैंडस्केपिंग, फव्वारे एवं जल संरचनाएं, आधुनिक प्रकाश व्यवस्था और जनसुविधाएं विकसित की जा रही हैं। थीम आधारित संरचनाओं के साथ हरियाली और जल संरचनाएं पार्क को अलग पहचान देने का काम करेंगी। पार्क की डिजाइन में ज्ञान, प्रकृति और आधुनिकता का संतुलन रखने का प्रयास किया गया है। दिन के समय जहां हरियाली और सांस्कृतिक संरचनाएं आकर्षण का केंद्र रहेंगी, वहीं शाम के समय प्रकाश व्यवस्था पार्क की खूबसूरती को और बढ़ाएगी। इस कारण यह स्थान परिवारों, विद्यार्थियों और युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनने की उम्मीद है।

नंद किशोर कलाल
जीडीए उपाध्यक्ष

संस्कृत दर्शन पार्क को केवल मनोरंजन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और संस्कृत भाषा से नई पीढ़ी को जोडऩे वाले महत्वपूर्ण स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। पार्क में वेद, उपनिषद, भारतीय दर्शन, महाकाव्य और संस्कृत साहित्य से जुड़े विषयों को आकर्षक एवं सहज रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि विद्यार्थी और युवा अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझ सकें। निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और निर्धारित मानकों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। शेष कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा कर अक्टूबर में पार्क को आमजन के लिए उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। जीडीए का उद्देश्य है कि यह पार्क गाजियाबाद को एक विशिष्ट सांस्कृतिक और ज्ञान आधारित सार्वजनिक स्थल के रूप में नई पहचान दे।
-नंद किशोर कलाल
जीडीए उपाध्यक्ष