- कविनगर में पहले गोबर प्रोसेसिंग प्लांट का महापौर और नगर आयुक्त ने किया शुभारंभ, बायोफ्यूल और खाद का होगा उत्पादन
- पांचों जोन में लगाए जाएंगे 25 संयंत्र, प्रतिदिन डेढ़ सौ टन से अधिक गोबर के निस्तारण की क्षमता
- बिना निगम का पैसा खर्च किए पीपीपी मॉडल पर संचालित होगा प्लांट, नगर निगम की आमदनी भी बढ़ेगी
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शहर की बड़ी समस्याओं में शामिल गोबर के निस्तारण को लेकर गाजियाबाद नगर निगम ने नई पहल शुरू की है। अब शहर में इधर-उधर फेंका जाने वाला और नालियों में बहने वाला गोबर गंदगी फैलाने के बजाय कमाई का जरिया बनेगा। गोबर से बायोफ्यूल और जैविक खाद तैयार की जाएगी। इससे एक ओर शहर को गंदगी और जलभराव की समस्या से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर गोबर का उपयोग औद्योगिक इकाइयों और पौधों के लिए किया जा सकेगा। महापौर सुनीता दयाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने मंगलवार को कविनगर जोन में स्थापित पहले गोबर प्रोसेसिंग प्लांट का शुभारंभ किया। शहर में लंबे समय से पशुपालकों और डेयरियों से निकलने वाले गोबर के निस्तारण की समस्या बनी हुई थी। कई स्थानों पर गोबर नालियों में बहा दिया जाता था, जिससे गंदगी और जलभराव की स्थिति पैदा होती थी। स्थानीय लोगों की शिकायतों को देखते हुए नगर निगम ने इसके स्थायी समाधान की योजना तैयार की। अब इसी योजना के तहत गोबर को उपयोगी उत्पादों में बदलने की व्यवस्था शुरू की गई है।

महापौर सुनीता दयाल ने कहा कि नगर निगम को गोबर के कारण शहर के विभिन्न क्षेत्रों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए गोबर प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की योजना बनाई गई। कविनगर में इसकी शुरुआत कर दी गई है। प्लांट में गोबर से बायोफ्यूल तैयार किया जाएगा, जिसे औद्योगिक इकाइयों को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा प्रसंस्करण के बाद बचने वाले अवशेष से खाद बनाई जाएगी, जिसका इस्तेमाल नर्सरी और पौधों में किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इस योजना की सबसे खास बात यह है कि नगर निगम को प्लांट स्थापित करने और संचालित करने के लिए कोई खर्च नहीं करना पड़ा है। इसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर संचालित किया जाएगा। इससे शहर को गोबर की समस्या से राहत मिलने के साथ निगम के राजस्व में भी वृद्धि होगी। महापौर ने इसे शहरवासियों के लिए उपयोगी पहल बताते हुए पशुपालकों से भी गोबर को निर्धारित प्लांट तक पहुंचाने की अपील की।
नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि कविनगर में लगाए गए पहले प्लांट में तीन मशीनें स्थापित की गई हैं। इनकी मदद से प्रतिदिन डेढ़ सौ टन से अधिक गोबर के निस्तारण की क्षमता विकसित की जाएगी। इससे लगभग 70 टन से अधिक बायोफ्यूल तैयार होने की संभावना है, जिसका उपयोग औद्योगिक इकाइयों में किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि नगर निगम की योजना केवल कविनगर तक सीमित नहीं है। शहर के पांचों जोन में इसी तरह के गोबर प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जाएंगे। पूरी योजना के तहत लगभग 25 मशीनें लगाई जाएंगी। इससे अलग-अलग क्षेत्रों से निकलने वाले गोबर का स्थानीय स्तर पर ही निस्तारण किया जा सकेगा। नगर आयुक्त ने कहा कि निगम अवैध डेयरियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ पशुपालकों को भी गोबर का उचित निस्तारण करने के लिए लगातार जागरूक कर रहा है। अब प्लांट शुरू होने से पशुपालकों को भी गोबर के निस्तारण का व्यवस्थित विकल्प मिलेगा।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार शहर को साफ-सुथरा बनाने के लिए केवल अवैध डेयरियों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गोबर के निस्तारण की स्थायी व्यवस्था भी जरूरी है। इसी सोच के तहत यह योजना तैयार की गई है। प्लांट के माध्यम से गोबर को उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित किया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। नगर आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पांचों जोन में योजना को तेजी से आगे बढ़ाया जाए और पशुपालकों को प्लांट तक गोबर पहुंचाने के लिए जागरूक किया जाए। शुभारंभ के दौरान अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, मुख्य अभियंता निर्माण नरेंद्र कुमार चौधरी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार, प्रभारी उद्यान डॉ. अनुज कुमार सिंह सहित निगम अधिकारी मौजूद रहे। कार्यदायी संस्था आलिया ऑर्गेनिक की ओर से पूनम श्रीवास्तव, अनन्या सक्सेना और उनकी टीम भी उपस्थित रही।

















