नंदी पार्क की व्यवस्था देख दुग्ध आयुक्त बोलीं- यूपी की मॉडल गौशालाओं में शामिल करने योग्य

  • नंदी पार्क की व्यवस्था मॉडल गौशाला जैसी, इसे और बेहतर बनाने की जरूरत:  धनलक्ष्मी के.
  • 1900 से अधिक निराश्रित गोवंशों का हो रहा पालन, बढ़ती संख्या के साथ क्षमता विस्तार का काम तेज
  • गोवंशों के खान-पान और चिकित्सा व्यवस्था की सराहना, गोबर के बेहतर उपयोग की योजना बनाने के निर्देश
  • टीकाकरण, बधियाकरण और टैगिंग में तेजी लाने को कहा, पशुपालकों से गोवंश सड़क पर न छोडऩे की अपील

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नगर निगम की ओर से संचालित नंदी पार्क गौशाला में सोमवार को गोवंशों के बेहतर रखरखाव और व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए उत्तर प्रदेश की दुग्ध आयुक्त एवं महानिदेशक मत्स्य पालन श्रीमती धनलक्ष्मी के. ने औचक निरीक्षण किया। उन्होंने गौशाला में गोवंशों के रहने की व्यवस्था, खान-पान, पेयजल, चिकित्सा समेत अन्य व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंशों के बेहतर रखरखाव को देखकर उन्होंने नगर निगम की टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नंदी पार्क गौशाला को उत्तर प्रदेश की मॉडल गौशालाओं में शामिल किए जाने योग्य व्यवस्था विकसित की गई है। निरीक्षण के दौरान दुग्ध आयुक्त ने गौशाला में मौजूद गोवंशों की संख्या, उनके रखरखाव और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से यह भी पूछा कि गोवंशों के लिए चारे और पानी की व्यवस्था किस तरह की जा रही है तथा बीमार या कमजोर गोवंशों की चिकित्सा के लिए क्या प्रबंध हैं।

नगर निगम अधिकारियों ने उन्हें गौशाला की मौजूदा व्यवस्था और भविष्य में क्षमता बढ़ाने की योजना की जानकारी दी। उप मुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. अनुज कुमार सिंह ने बताया कि दुग्ध आयुक्त ने निरीक्षण के दौरान निराश्रित गोवंशों के पालन-पोषण से जुड़ी व्यवस्थाओं की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने गोबर के निस्तारण और उसके उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की। गौशाला में उपलब्ध सुविधाओं और गोवंशों की देखभाल की व्यवस्था का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने नगर निगम की टीम के कार्यों की सराहना की।

उन्होंने पशुपालकों से भी अपील की कि वे अपने गोवंशों को सड़कों पर खुला न छोड़ें। अधिकारियों के अनुसार, पशुपालक अपने पशुओं की जिम्मेदारी स्वयं लें, ताकि सड़क पर घूमने वाले गोवंशों के कारण होने वाली समस्याओं को कम किया जा सके। निरीक्षण के दौरान नगर निगम और पशुपालन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। दुग्ध आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गौशाला में उपलब्ध व्यवस्थाओं को बनाए रखने के साथ भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सुविधाओं का विस्तार किया जाए। खासकर गोवंशों के स्वास्थ्य, स्वच्छता, खान-पान और सुरक्षित आश्रय पर लगातार ध्यान देने को कहा गया।

बढ़ती संख्या के हिसाब से बढ़ाई जा रही क्षमता
नगर निगम की नंदी पार्क गौशाला में वर्तमान में करीब 1900 से अधिक निराश्रित गोवंश आश्रय ले रहे हैं। नगर निगम की टीम इनके पालन-पोषण और देखभाल की जिम्मेदारी संभाल रही है। गोवंशों की बढ़ती संख्या को देखते हुए गौशाला की क्षमता बढ़ाने का काम भी तेजी से किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान प्रस्तावित और निर्माणाधीन सुविधाओं को लेकर भी अधिकारियों से जानकारी ली गई। दुग्ध आयुक्त ने कहा कि बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंशों को एक स्थान पर सुरक्षित रखते हुए उनके खान-पान और स्वास्थ्य की उचित व्यवस्था करना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए। नगर निगम टीम के प्रयासों पर उन्होंने प्रसन्नता भी जाहिर की।

गोबर के उपयोग पर बनाई जाए प्रभावी योजना
निरीक्षण के दौरान गोबर के निस्तारण और उसके उपयोग को लेकर भी चर्चा हुई। दुग्ध आयुक्त ने अधिकारियों को गोबर के बेहतर उपयोग और उससे संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी योजना तैयार करने के निर्देश दिए। मौके पर प्राकृतिक रंग के बारे में भी जानकारी दी गई और गोबर से उपयोगी उत्पाद तैयार करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

उन्होंने उप मुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. अनुज कुमार सिंह और उनकी टीम को गौशाला में व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर करने के निर्देश दिए। पशुपालन विभाग की टीम और संबंधित अधिकारियों से चिकित्सा, टीकाकरण, बधियाकरण तथा गोवंशों की पहचान के लिए टैग लगाने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। साथ ही इन कार्यों की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए।