-बारिश में त्वचा को सूखा और साफ रखना जरूरी, लापरवाही से बढ़ सकता है संक्रमण: कुंदन पाण्डेय
-दाद-खुजली, फंगल संक्रमण, घमौरियां और फोड़े-फुंसियों का खतरा बढ़ता है, साफ-सफाई पर दें विशेष ध्यान
-गीले कपड़े तुरंत बदलें, पैरों और शरीर के जोड़ वाले हिस्सों को रखें सूखा; समस्या होने पर चिकित्सक से लें सलाह
उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। मानसून के मौसम में बारिश के साथ वातावरण में नमी बढऩे से त्वचा संबंधी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है। उमस और लगातार पसीने के कारण त्वचा लंबे समय तक नम रहती है, जिससे फंगल संक्रमण, दाद-खुजली, घमौरियां, फोड़े-फुंसियां और अन्य त्वचा संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसे में थोड़ी सी सावधानी बरतकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। डर्मैक्स स्किन क्लीनिक, लखनऊ के सीनियर नर्सिंग स्टाफ कुंदन पाण्डेय ने मानसून के दौरान त्वचा की देखभाल को लेकर लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। कुंदन पाण्डेय के अनुसार, बारिश के मौसम में लोग अक्सर त्वचा की देखभाल को नजरअंदाज कर देते हैं। लोगों को लगता है कि गर्मी कम होने के कारण त्वचा से जुड़ी परेशानियां भी कम हो जाएंगी, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत हो सकती है। वातावरण में अधिक नमी और पसीने के कारण त्वचा पर संक्रमण पैदा करने वाले जीवाणु और फंगस पनपने के लिए अनुकूल वातावरण मिल जाता है। खासकर शरीर के उन हिस्सों में परेशानी अधिक हो सकती है, जहां पसीना लंबे समय तक जमा रहता है। उन्होंने बताया कि मानसून में फंगल संक्रमण की समस्या आम हो जाती है। दाद और खुजली इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। लगातार गीली रहने वाली त्वचा पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
इसी तरह जीवाणु संक्रमण भी त्वचा को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा उमस और पसीने के कारण घमौरियां, लाल चकत्ते तथा खुजली जैसी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं। कुंदन पाण्डेय ने बताया कि त्वचा के अलावा पैरों की उंगलियों के बीच, बगल, कमर और शरीर के अन्य जोड़ वाले हिस्सों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इन स्थानों पर नमी अधिक समय तक बनी रहने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बारिश में बाहर से लौटने के बाद शरीर को अच्छी तरह साफ करने के साथ इन हिस्सों को पूरी तरह सुखाना भी जरूरी है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़ों को लंबे समय तक शरीर पर न रखें। गीले कपड़े जल्द से जल्द बदलकर सूखे कपड़े पहनें। कपड़ों को अच्छी तरह सुखाकर ही इस्तेमाल करें। शरीर की सफाई के लिए साबुन का उचित इस्तेमाल करें और पसीने वाले हिस्सों को विशेष रूप से साफ रखें।
पैरों को भी साफ और सूखा रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मानसून में बाहर निकलते समय पैरों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना चाहिए। लंबे समय तक गीले जूते या मोजे पहनकर रहने से पैरों में संक्रमण की समस्या हो सकती है। इसलिए संभव हो तो पैरों को सूखा रखने की व्यवस्था करें और गीले मोजे तुरंत बदलें। कुंदन पाण्डेय के मुताबिक, त्वचा पर अचानक लाल चकत्ते, अत्यधिक खुजली, दाने, फोड़े-फुंसी या किसी तरह का संक्रमण दिखाई देने पर इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार लोग बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई भी क्रीम या दवा इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं, जिससे समस्या बढ़ सकती है। इसलिए त्वचा संबंधी परेशानी लगातार बनी रहने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।
उन्होंने कहा कि मानसून में त्वचा की सुरक्षा का सबसे आसान उपाय साफ-सफाई और नमी से बचाव है। त्वचा को साफ और सूखा रखने, गीले कपड़े तुरंत बदलने, रोजाना स्नान करने और शरीर के पसीना अधिक आने वाले हिस्सों की विशेष सफाई रखने से कई समस्याओं से बचा जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि बारिश के मौसम में त्वचा को लेकर लापरवाही न बरतें। किसी भी तरह की असामान्य समस्या दिखाई देने पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लें। थोड़ी सी सावधानी न केवल त्वचा को संक्रमण से बचा सकती है, बल्कि मानसून के पूरे मौसम को स्वस्थ और सुरक्षित बनाने में भी मददगार साबित हो सकती है।

सीनियर नर्सिंग स्टाफ
डर्मैक्स स्किन क्लीनिक, लखनऊ।
मानसून में त्वचा पर नमी और पसीना लंबे समय तक रहने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़े तुरंत बदलें और शरीर को अच्छी तरह सुखाएं। खासकर पैरों की उंगलियों, बगल और शरीर के जोड़ वाले हिस्सों को सूखा रखना बेहद जरूरी है। दाद, खुजली, लाल चकत्ते या फंगल संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर खुद से कोई क्रीम लगाने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। थोड़ी सी सावधानी बरतकर मानसून में होने वाली अधिकांश त्वचा संबंधी परेशानियों से बचा जा सकता है।
-कुंदन पाण्डेय
सीनियर नर्सिंग स्टाफ
डर्मैक्स स्किन क्लीनिक, लखनऊ।

















