- सीईआईआर पोर्टल की मदद से चोरी और लूटे गए मोबाइलों तक पहुंची पुलिस, पीडि़तों के चेहरे पर लौटी खुशी
- नगर जोन की स्वॉट, सर्विलांस और थाना पुलिस ने मिलकर चलाया अभियान, दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों से बरामदगी
- नगर कोतवाली से सर्वाधिक मोबाइल मिले, डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने पुलिस टीम की कार्यशैली को सराहा
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। चोरी, लूट और गुम हुए मोबाइल फोन को वापस पाने की उम्मीद छोड़ चुके लोगों के लिए गाजियाबाद पुलिस ने बड़ी राहत दी है। कमिश्नरेट के नगर जोन की पुलिस ने तकनीकी निगरानी और लगातार ट्रैकिंग के जरिए करीब 1.55 करोड़ रुपये कीमत के 555 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। मंगलवार को पुलिस लाइन स्थित परमजीत हॉल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में इन मोबाइल फोन को उनके वास्तविक मालिकों को सौंपा गया। लंबे समय बाद अपना मोबाइल वापस पाकर लोगों के चेहरे पर खुशी साफ नजर आई। पुलिस की इस कार्रवाई ने न केवल पीडि़तों को उनका सामान वापस दिलाया, बल्कि तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल और पुलिस की सक्रिय कार्यशैली का भी उदाहरण पेश किया।
मंगलवार को प्रेसवार्ता में डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने बताया कि मोबाइल चोरी, लूट या गुम होने की शिकायतों को केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर (सीईआईआर) पोर्टल पर दर्ज कराया गया था।
शिकायत मिलने के बाद संबंधित मोबाइल के आईएमईआई नंबर के आधार पर उसे ब्लॉक करने के साथ ही उसकी निगरानी शुरू की गई। पुलिस की तकनीकी टीम लगातार ऐसे मोबाइल फोन पर नजर रख रही थी, जिन्हें अपराधी या अन्य लोग इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस की इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट हुआ कि चोरी या लूट के बाद मोबाइल को किसी दूसरे सिम से चलाना उसके मालिक से हमेशा के लिए दूर कर देना नहीं है। जैसे ही वह मोबाइल नेटवर्क पर सक्रिय होता है, तकनीकी माध्यमों से उसकी पहचान और लोकेशन का पता लगाया जा सकता है। नगर जोन पुलिस की यह सफलता तकनीक, सर्विलांस और मैदानी पुलिसिंग के बेहतर तालमेल का परिणाम है।

मोबाइल चालू होते ही सक्रिय हो जाती थी पुलिस की निगरानी
पुलिस की कार्यशैली का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा लगातार तकनीकी निगरानी रहा। बरामद किए गए मोबाइल फोन में जब भी किसी ने नया सिम डालकर उन्हें चालू किया अथवा इस्तेमाल किया, उनकी जानकारी पुलिस के तकनीकी तंत्र तक पहुंच गई। इसके बाद सर्विलांस के माध्यम से मोबाइल की लोकेशन का पता लगाया गया और संबंधित स्थानों पर पुलिस टीम भेजकर फोन बरामद किए गए। डीसीपी ने बताया कि इस अभियान में केवल गाजियाबाद तक सीमित रहकर कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि जिन मोबाइल फोन की लोकेशन दिल्ली-एनसीआर के अलावा दूसरे शहरों और राज्यों में मिली, वहां भी पुलिस टीमों ने समन्वय बनाकर कार्रवाई की।
इससे साफ है कि पुलिस ने मोबाइल बरामदगी को केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि हर मोबाइल के दोबारा सक्रिय होने का इंतजार कर उसे ट्रैक करने की रणनीति पर काम किया। इस पूरी कार्रवाई में नगर जोन की स्वॉट टीम, सर्विलांस टीम और विभिन्न थानों की पुलिस ने आपसी तालमेल के साथ काम किया। तकनीकी जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस की मदद से मोबाइल बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार, लगातार निगरानी और टीमों के बीच बेहतर समन्वय के कारण बड़ी संख्या में मोबाइल फोन बरामद करना संभव हुआ।
नगर कोतवाली से सबसे ज्यादा 103 मोबाइल बरामद
पुलिस के मुताबिक अलग-अलग थाना क्षेत्रों से बरामद किए गए 555 मोबाइल फोन में सबसे अधिक 103 मोबाइल नगर कोतवाली क्षेत्र से बरामद हुए हैं। इसके अलावा विजयनगर से 91, सिहानी गेट से 56, नंदग्राम से 52, मधुबन बापूधाम से 67, क्रॉसिंग रिपब्लिक से 55, वेव सिटी से 54, कविनगर से 64 और साइबर क्राइम थाना से 13 मोबाइल फोन बरामद किए गए। पुलिस ने बरामद मोबाइलों को उनके मालिकों की पहचान और आवश्यक सत्यापन के बाद मंगलवार को उन्हें सौंप दिया।
अपना मोबाइल वापस मिलने पर कई पीडि़तों ने पुलिस की कार्यशैली की सराहना की। मोबाइल फोन में लोगों के जरूरी संपर्क, दस्तावेज, फोटो और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी भी होती है। ऐसे में मोबाइल की बरामदगी लोगों के लिए आर्थिक नुकसान से राहत के साथ-साथ निजी जानकारी वापस मिलने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। डीसीपी सिटी ने बताया कि सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से मोबाइल बरामदगी का अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि मोबाइल गुम या चोरी होने पर शिकायत दर्ज कराने के साथ उसका आईएमईआई नंबर उपलब्ध कराएं। सीईआईआर पर शिकायत दर्ज होने के बाद मोबाइल को ब्लॉक कर उसकी ट्रैकिंग की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

















