पीयूसीसी नहीं तो पेट्रोल-डीजल भी नहीं, 1 अक्टूबर से गाजियाबाद में लागू होगी सख्त व्यवस्था

  • पेट्रोल पंपों पर खुद उतरकर व्यवस्था परख रहे जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी
  • फोटो खींचते ही स्कैन होगा वाहन नंबर, चंद सेकंड में सामने आएगी पीयूसीसी की जानकारी
  • 20 हजार से ज्यादा दोपहिया वाहन बिना पीयूसीसी, 135 पंपों पर लागू होगी नई व्यवस्था

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। वाहन स्वामियों के लिए जरूरी खबर है। जिले में एक अक्टूबर से ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था लागू होने जा रही है। यानी जिस वाहन का वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) नहीं होगा, उसे पेट्रोल पंप पर पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा। इतना ही नहीं, बिना वैध पीयूसीसी के सड़क पर वाहन चलाने पर चालान की कार्रवाई भी हो सकती है। ऐसे में वाहन स्वामियों के पास प्रमाणपत्र बनवाने या उसका नवीनीकरण कराने के लिए अब सिर्फ नौ दिन का समय बचा है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देशों के अनुपालन में जिला प्रशासन ने व्यवस्था को प्रभावी बनाने की तैयारी तेज कर दी है। जिले के सभी पेट्रोल-डीजल पंप संचालकों को आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। खास बात यह है कि व्यवस्था लागू होने से पहले जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी खुद मैदान में उतरकर पेट्रोल पंपों का निरीक्षण कर रहे हैं और कर्मचारियों को नई व्यवस्था के संबंध में प्रशिक्षण देने के साथ जागरूक भी कर रहे हैं। जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी की सक्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सोमवार को वह खुद विभिन्न पेट्रोल पंपों पर पहुंचे।

उन्होंने पंप कर्मियों को पीयूसीसी जांच की पूरी प्रक्रिया समझाई और मौके पर वाहनों की फोटो खींचकर स्वयं भी जांच की कि संबंधित वाहन का वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र है या नहीं। पहले वाहन की पीयूसीसी स्थिति जांचने के लिए मोबाइल एप पर वाहन का पंजीकरण नंबर दर्ज करना पड़ता था। इससे जांच में समय लगता था और पेट्रोल पंपों पर वाहनों की कतार लगने की संभावना रहती थी। अब व्यवस्था को आसान और तेज बनाने के लिए एप में बदलाव किया गया है। नए सिस्टम में पंप कर्मियों को वाहन का नंबर अलग से दर्ज करने की जरूरत नहीं होगी। वाहन की फोटो खींचकर एप पर अपलोड करते ही उसका नंबर स्वत: स्कैन हो जाएगा और वाहन से संबंधित जानकारी सामने आ जाएगी। जिला पूर्ति अधिकारी ने पंप कर्मियों को मौके पर इस प्रक्रिया का अभ्यास भी कराया, ताकि एक अक्टूबर से व्यवस्था लागू होने के बाद किसी तरह की परेशानी न हो। उनका जोर इस बात पर है कि नई व्यवस्था में जांच तेजी से हो और वाहन चालकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

जिले में 26,384 वाहनों के पास नहीं है पीयूसीसी
जिला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक गाजियाबाद में कुल 26,384 वाहनों के पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र नहीं है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या दोपहिया वाहनों की है। जिले में 20,193 दोपहिया वाहन ऐसे हैं, जिनके पास पीयूसीसी नहीं है। इसके अलावा 6,070 कारें भी बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के हैं। आंकड़ों में 108 ट्रैक्टर, एक एंबुलेंस, एक गुड्स कैरियर वाहन और नौ बसें भी शामिल हैं, जिनका प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं है। ऐसे में एक अक्टूबर से पहले इन वाहन स्वामियों को पीयूसीसी बनवाना या उसका नवीनीकरण कराना होगा। जिले में वाहनों को ईंधन उपलब्ध कराने के लिए कुल 135 पेट्रोल, डीजल और सीएनजी पंप संचालित हैं। प्रशासन इन सभी पंपों पर नई व्यवस्था को लागू कराने की तैयारी कर रहा है। पंप संचालकों और कर्मचारियों को एप के जरिए पीयूसीसी जांच की प्रक्रिया समझाई जा रही है।

‘पीयूसीसी नहीं तो ईंधन नहीं, नियम का सख्ती से होगा पालन’
जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी का कहना है कि एक अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था को लेकर जिले के सभी पेट्रोल पंपों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों को एप के माध्यम से वाहन की पीयूसीसी स्थिति जांचने की प्रक्रिया समझाई जा रही है। नई व्यवस्था में वाहन की फोटो खींचते ही नंबर स्कैन होकर उसकी जानकारी सामने आ जाएगी। इससे जांच प्रक्रिया पहले की तुलना में तेज होगी। उन्होंने वाहन स्वामियों से अपील की है कि अंतिम समय का इंतजार न करें और अपने वाहन का वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र समय रहते बनवा लें। जिला प्रशासन का उद्देश्य व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करना है, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के साथ वाहन चालकों को भी पहले से आवश्यक जानकारी मिल सके।

समय रहते पीयूसीसी बनवाएं, वरना हो सकती है चालान की कार्रवाई
एक अक्टूबर के बाद बिना वैध पीयूसीसी वाले वाहनों के लिए मुश्किल बढ़ सकती है। पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं मिलने के साथ यातायात नियमों के तहत चालान की कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में वाहन स्वामियों के लिए बेहतर है कि वह आखिरी तारीख का इंतजार न करें। जिला प्रशासन की ओर से पेट्रोल पंप संचालकों को भी निर्देशित किया गया है कि व्यवस्था लागू होने से पहले अपने कर्मचारियों को पूरी तरह प्रशिक्षित कर लें। जिला पूर्ति अधिकारी की ओर से लगातार पेट्रोल पंपों पर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया जा रहा है। प्रशासन की सख्ती और निगरानी के चलते एक अक्टूबर से ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ व्यवस्था को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने की तैयारी है।