श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन में छिपे नेतृत्व के गुर, विद्यार्थियों ने सीखे प्रबंधन के मंत्र

  • मॉडर्न कॉलेज में विशेष व्याख्यान, कर्तव्य, निर्णय क्षमता और रणनीति पर हुई चर्चा
  • प्रभावी नेता आदेश नहीं देता, कठिन परिस्थितियों में मार्गदर्शन करता है: सुरभि शर्मा
  • ध्यान सत्र में विद्यार्थियों ने जाना एकाग्रता और सकारात्मक सोच का महत्व

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। मोहन नगर स्थित मॉडर्न कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज में बुधवार को भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से नेतृत्व और प्रबंधन के सिद्धांतों को समझने का अवसर विद्यार्थियों को मिला। महाविद्यालय के भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ एवं विद्वत परिषद की ओर से पावन चिंतन धारा आश्रम के संयुक्त तत्वावधान में ‘श्रीकृष्ण : भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से नेतृत्व एवं प्रबंधन’ विषय पर विशेष अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता सुश्री सुरभि शर्मा, महिमा वाचक-श्रीकृष्ण, ने श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन में निहित नेतृत्व, निर्णय क्षमता, रणनीति, संवाद-कौशल और कर्तव्यबोध के विभिन्न पहलुओं पर विद्यार्थियों से संवाद किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण, विद्यार्थी, विद्वत परिषद के सदस्य तथा पावन चिंतन धारा आश्रम के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता सुश्री सुरभि शर्मा का महाविद्यालय परिवार की ओर से स्वागत एवं सम्मान किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित मूल्यों को आधुनिक शिक्षा, व्यक्तिगत जीवन और व्यावसायिक क्षेत्र से जोड़कर देखने का आह्वान किया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. (डॉ.) निशा सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए इस प्रकार के ज्ञानवर्धक कार्यक्रम आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा विद्यार्थियों को जीवन मूल्यों, जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच से जोडऩे का महत्वपूर्ण माध्यम है। कार्यक्रम के अंत में मुख्य वक्ता, पावन चिंतन धारा आश्रम के प्रतिनिधियों, विद्वत परिषद के सदस्यों, शिक्षकगण, गैर-शिक्षण कर्मचारियों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता और अनुशासित उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल एवं गरिमामय बनाया।

कठिन परिस्थितियों में मार्गदर्शन ही नेतृत्व की पहचान
मुख्य वक्ता सुश्री सुरभि शर्मा ने कहा कि श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व केवल आध्यात्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उनके जीवन में ऐसे अनेक सिद्धांत दिखाई देते हैं, जिन्हें आधुनिक नेतृत्व और प्रबंधन से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों के माध्यम से विद्यार्थियों को बताया कि नेतृत्व का अर्थ केवल निर्णय लेना या दूसरों को निर्देश देना नहीं है, बल्कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सही दिशा दिखाना और लोगों को लक्ष्य की ओर प्रेरित करना भी है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां लगातार बदलती रहती हैं और ऐसे में एक कुशल नेतृत्वकर्ता को परिस्थितियों को समझते हुए निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।

संवाद-कौशल, रणनीति, धैर्य और समय के अनुरूप निर्णय लेने की क्षमता किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के संदेश ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपने प्रयासों और जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए तथा परिणाम की चिंता से अपने कर्म को प्रभावित नहीं होने देना चाहिए।

प्रश्नोत्तर ने बढ़ाई विद्यार्थियों की सहभागिता
व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा और श्रीकृष्ण के नेतृत्व-दर्शन से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं रखीं। विद्यार्थियों के सवालों का मुख्य वक्ता ने सहजता से जवाब दिया। प्रश्नोत्तर सत्र के कारण कार्यक्रम और अधिक संवादात्मक एवं ज्ञानवर्धक बन गया। विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि भारतीय ज्ञान परंपरा में वर्णित जीवन मूल्यों को आधुनिक शिक्षा और व्यावसायिक जीवन में भी उपयोगी रूप में अपनाया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान पावन चिंतन धारा की सुश्री ज्योति देसवाल ने ध्यान सत्र भी कराया। इसमें विद्यार्थियों और उपस्थित प्रतिभागियों को मानसिक शांति, एकाग्रता तथा सकारात्मक चिंतन के महत्व से परिचित कराया गया। प्रतिभागियों को नियमित ध्यान को स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया।